Rashtra Bharat Logo

महाराष्ट्र में गुटखा कारोबार में मची खलबली, कई शहरों में बढ़े पान मसाला के रेट

महाराष्ट्र में गुटखा कारोबार में मची खलबली, कई शहरों में बढ़े पान मसाला के रेट
महाराष्ट्र में गुटखा कारोबार में मची खलबली, कई शहरों में बढ़े पान मसाला के रेट (AI generated)

महाराष्ट्र में एफडीए के नए आयुक्त तुकाराम मुंढे की नियुक्ति के बाद गुटखा और पान मसाला के दामों में बढ़ोतरी की चर्चा तेज हो गई है। संभावित सख्त कार्रवाई की आशंका के बीच कई शहरों में कीमतें बढ़ी हैं, जिससे अवैध कारोबार और बाजार की गतिविधियों में हलचल देखी जा रही है।

Updated:
·by
Dipali Kumari
Dipali Kumari
Share:

विषयसूची

Maharashtra Gutkha Price Hike: महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के नए आयुक्त के रूप में तुकाराम मुंढे की नियुक्ति के बाद अवैध गुटखा और पान मसाला कारोबार में हलचल तेज हो गई है। बाजार में इन उत्पादों की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है। कारोबारियों का मानना है कि सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की आशंका और संभावित छापेमारी के कारण बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने लगी है, जिसका असर सीधे कीमतों पर पड़ रहा है।

कई शहरों में बढ़े गुटखा और पान मसाला के दाम

जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र में प्रतिबंध के बावजूद चोरी-छिपे गुटखा और पान मसाला की बिक्री जारी है। हालांकि, तुकाराम मुंढे के एफडीए आयुक्त बनने के बाद कई शहरों में इनके दाम बढ़ गए हैं। नागपुर के कई इलाकों में पहले 15 रुपये में मिलने वाला पान मसाला अब 20 से 25 रुपये तक बेचा जा रहा है। वहीं अमरावती में इसकी कीमत 25 से 30 रुपये प्रति पाउच तक पहुंच गई है, जबकि अकोला में यही उत्पाद 30 रुपये तक बिक रहा है।

इन ब्रांडों की कीमतों में सबसे ज्यादा असर

बाजार में रजनीगंधा, विमल, राजश्री, पराग और पान पराग जैसे प्रमुख ब्रांडों के दाम बढ़ने की जानकारी सामने आई है। व्यापारियों का कहना है कि संभावित कार्रवाई और आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के चलते बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बन गया है, जिसके कारण कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।

व्यापारियों के मुताबिक, पूर्व विदर्भ में रजनीगंधा की सबसे अधिक मांग है, जबकि पश्चिम विदर्भ में पराग और काली बहार की बिक्री अधिक होती है। वहीं अमरावती और वर्धा जिलों में विमल पान मसाला सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। मांग और उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में कीमतों में भी अंतर देखने को मिल रहा है।

हालांकि, गुटखा और पान मसाला की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद बाजार में यह चर्चा तेज है कि एफडीए की सख्त निगरानी और संभावित कार्रवाई के कारण अवैध कारोबार प्रभावित हो सकता है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं की नजर अब आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और बाजार की स्थिति पर बनी हुई है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Dipali Kumari

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।