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नागपुर: हाईकोर्ट से काटोल नगराध्यक्ष अर्चना देशमुख को बड़ी राहत, जाति प्रमाणपत्र रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक

नागपुर: हाईकोर्ट से काटोल नगराध्यक्ष अर्चना देशमुख को बड़ी राहत, जाति प्रमाणपत्र रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक
नागपुर: काटोल नगराध्यक्ष अर्चना देशमुख को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, जाति प्रमाणपत्र रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक (File Photo)

काटोल नगर परिषद की नगराध्यक्ष अर्चना राहुल देशमुख को जाति प्रमाणपत्र विवाद मामले में मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने जिला जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए अंतिम फैसला आने तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

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Dipali Kumari
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Archana Deshmukh Caste Certificate Case: काटोल नगर परिषद की नगराध्यक्ष अर्चना राहुल देशमुख को कुणबी जाति प्रमाणपत्र विवाद मामले में मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने जिला जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें उनके जाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किया गया था। इसके साथ ही अदालत ने मामले में अंतिम फैसला आने तक ‘यथास्थिति (स्टेटस क्वो)’ बनाए रखने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद फिलहाल उनके नगराध्यक्ष पद पर अपात्रता का संकट टल गया है।

चुनाव के बाद शुरू हुआ कानूनी विवाद

जानकारी के अनुसार, काटोल नगर परिषद चुनाव में शेतकरी कामगार पक्ष (शेकाप) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के गठबंधन की उम्मीदवार के रूप में अर्चना देशमुख नगराध्यक्ष चुनी गई थीं। चुनाव के बाद जिला जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने उनके कुणबी जाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित कर दिया। समिति के इस निर्णय के बाद उनके निर्वाचित पद पर कानूनी संकट खड़ा हो गया और उनके नगराध्यक्ष पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठने लगे।

हाईकोर्ट ने दिया अंतरिम संरक्षण

समिति के फैसले को चुनौती देते हुए अर्चना देशमुख ने मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की। न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाळके और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान समिति के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने निर्देश दिया कि जाति प्रमाणपत्र की वैधता पर अंतिम निर्णय होने तक वर्तमान स्थिति बरकरार रखी जाए। इस आदेश के चलते फिलहाल उनके नगराध्यक्ष पद पर किसी तरह की तत्काल कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

सुनवाई के दौरान नगराध्यक्ष अर्चना देशमुख की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मार्डीकर ने पैरवी की। उनके साथ अधिवक्ता शकील देशमुख और कपिल देशमुख भी न्यायालय में उपस्थित रहे। अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए समिति के आदेश को चुनौती दी, जिसके बाद अदालत ने अंतरिम राहत प्रदान की।

राहत के बाद संभाला कार्यभार

हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद अर्चना देशमुख नगर परिषद कार्यालय पहुंचीं और दोबारा अपना कार्यभार संभाला। इस दौरान पूर्व नगराध्यक्ष एवं शेकाप नेता राहुल वीरेंद्रबाबू देशमुख, उपाध्यक्ष संदीप वंजारी, स्वास्थ्य सभापति डॉ. लतेश जोगेकर, निर्माण सभापति गणेश चन्ने, नगरसेवकों, पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में समर्थकों ने उनका स्वागत किया। नगर परिषद परिसर में समर्थकों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया और अदालत के फैसले पर खुशी जताई। इसके अलावा पूर्व विधायक एवं पूर्व नगराध्यक्ष स्वर्गीय वीरेंद्रबाबू देशमुख की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सम्मान भी अर्पित किया गया।

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