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एआई और तकनीक के दौर में बढ़ रही हिंदी की ताकत, नागपुर में राजभाषा सम्मेलन आयोजित

एआई और तकनीक के दौर में बढ़ रही हिंदी की ताकत, नागपुर में राजभाषा सम्मेलन आयोजित
एआई और तकनीक के दौर में बढ़ रही हिंदी की ताकत, नागपुर में राजभाषा सम्मेलन आयोजित

नागपुर विश्वविद्यालय में आयोजित राजभाषा सम्मेलन में हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षा, तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में इसकी बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में हिंदी की भूमिका महत्वपूर्ण है और इसके लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं।

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Dipali Kumari
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Nagpur University News: राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (नई दिल्ली) तथा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में शिक्षा, प्रशासन, तकनीक और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों ने हिंदी के बढ़ते प्रभाव और राजभाषा के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।

राजभाषा हिंदी का महत्व

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी के इस दौर में हिंदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आज हिंदी केवल सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, तकनीक, मीडिया, व्यापार और वैश्विक संचार की भी महत्वपूर्ण भाषा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में राजभाषा हिंदी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गंभीर चिंतन और ठोस प्रयास भी आवश्यक हैं।

सम्मेलन में पावरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक अशोक कुमार बेहेरा, वीएनआईटी के प्रभारी निदे शक प्रो. ज्ञान प्रकाश सिंह, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के महाप्रबंधक (मानव संसाधन) राजेश कुमार सिन्हा, बैंक ऑफ इंडिया के उपक्षेत्रीय प्रबंधक पन्ना मंडल, राजभाषा अधिकारी उदयवीर सिंह, डॉ. वंदना खुशालानी तथा हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पांडे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

एआई और तकनीक के दौर में बढ़ रही हिंदी की ताकत, नागपुर में राजभाषा सम्मेलन आयोजित
एआई और तकनीक के दौर में बढ़ रही हिंदी की ताकत, नागपुर में राजभाषा सम्मेलन आयोजित

विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा हिंदी का उपयोग

हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पांडे ने प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि राजभाषा विभिन्न भाषाई क्षेत्रों के बीच संवाद और समन्वय का मजबूत माध्यम है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

मुख्य अतिथि अशोक कुमार बेहेरा ने कहा कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिंदी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। प्रो. ज्ञान प्रकाश सिंह ने कहा कि समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन, डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया ने हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं राजेश कुमार सिन्हा ने व्यवसाय, विपणन और ग्राहक संवाद में हिंदी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

हिंदी में करियर के अवसर

बैंक ऑफ इंडिया के उपक्षेत्रीय प्रबंधक पन्ना मंडल ने कहा कि आज ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, पत्रकारिता, कंटेंट राइटिंग, अनुवाद, पर्यटन, प्रकाशन और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में हिंदी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने युवाओं से हिंदी को रोजगार और करियर के अवसर के रूप में देखने की अपील भी की।

तकनीकी सत्र में राजभाषा अधिकारी उदयवीर सिंह ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ई-गवर्नेंस और डिजिटल मीडिया में हिंदी का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। वहीं डॉ. वंदना खुशालानी ने कहा कि मशीन ट्रांसलेशन, वॉइस असिस्टेंट, चैटबॉट और एआई आधारित तकनीकों के विकास से हिंदी का भविष्य और अधिक उज्ज्वल होता जा रहा है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।