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RTMNU में शुरू होगा स्नातकोत्तर हस्तलिपि विज्ञान डिप्लोमा, 2026-27 सत्र से मिलेंगे प्रवेश

RTMNU में शुरू होगा स्नातकोत्तर हस्तलिपि विज्ञान डिप्लोमा, 2026-27 सत्र से मिलेंगे प्रवेश
RTMNU में शुरू होगा स्नातकोत्तर हस्तलिपि विज्ञान डिप्लोमा, 2026-27 सत्र से मिलेंगे प्रवेश

राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (RTMNU) ने 2026-27 सत्र से स्नातकोत्तर हस्तलिपि विज्ञान (मैन्युस्क्रिप्टोलॉजी) डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। इस कोर्स के माध्यम से विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय हस्तलिपियों के अध्ययन, संरक्षण, डिजिटलीकरण और शोध का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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Dipali Kumari
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RTMNU Admission 2026: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (RTMNU) ने भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन हस्तलिपियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय के भगवान श्री चक्रधर स्वामी अध्यासन द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पीजी डिप्लोमा इन मैन्युस्क्रिप्टोलॉजी (स्नातकोत्तर हस्तलिपि विज्ञान डिप्लोमा) पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है।

इस विशेष पाठ्यक्रम की रूपरेखा डॉ. भारतभूषण शास्त्री ने तैयार की है। इसे विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर, प्रति-कुलगुरु डॉ. अखिलेश पेशवे और कुलसचिव डॉ. राजू हिवसे की मंजूरी मिल चुकी है।

प्राचीन हस्तलिपियों के संरक्षण पर रहेगा फोकस

विश्वविद्यालय के अनुसार, इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय प्राचीन हस्तलिपियों के अध्ययन, संरक्षण, संपादन, डिजिटलीकरण और शोध से जुड़ा व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है। इससे छात्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समझने के साथ-साथ इस क्षेत्र में विशेषज्ञता भी हासिल कर सकेंगे।

फिलहाल विश्वविद्यालय में करीब 14 हजार प्राचीन हस्तलिपियां सुरक्षित हैं, जिनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है। विदर्भ क्षेत्र महानुभाव संप्रदाय की समृद्ध परंपरा के लिए जाना जाता है और यहां इस परंपरा से जुड़ी 43 प्रकार की लिपियां उपलब्ध हैं। पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को इन लिपियों के साथ-साथ ब्राह्मी, खरोष्ठी, शारदा और मोडी जैसी प्राचीन भारतीय लिपियों का भी अध्ययन कराया जाएगा।

क्या-क्या पढ़ाया जाएगा?

पाठ्यक्रम में हस्तलिपि विज्ञान का परिचय, प्राचीन भारतीय लिपियों का अध्ययन, पांडुलिपियों का संरक्षण और संवर्धन, संपादन, डिजिटल संरक्षण, शोध पद्धति तथा विभिन्न लिपियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल किया गया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को शोध कार्य के साथ-साथ भारत सरकार की ‘ज्ञानभारतम’ जैसी परियोजनाओं में भी काम करने के अवसर मिल सकते हैं।

कौन ले सकता है प्रवेश?

इस डिप्लोमा पाठ्यक्रम में कला, वाणिज्य, विज्ञान या किसी भी संकाय से स्नातक छात्र-छात्राएं प्रवेश ले सकेंगे। खासतौर पर संस्कृत, मराठी, इतिहास, पुरातत्व, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह कोर्स काफी उपयोगी माना जा रहा है।

प्रवेश से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए इच्छुक विद्यार्थी भगवान श्री चक्रधर स्वामी अध्यासन के प्रमुख डॉ. भारतभूषण शास्त्री से गांधी भवन, एल.ए.डी. चौक, नागपुर स्थित कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा 9405269822 नंबर पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।