नागपुर ग्रामीण RTO में बड़ा फर्जीवाड़ा! 2 हजार तक चोरी के ट्रकों के अवैध पंजीकरण का खुलासा, जांच तेज

नागपुर ग्रामीण RTO में चोरी के ट्रकों के अवैध पंजीकरण का बड़ा मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में 1,500 से 2,000 ट्रकों के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण की आशंका जताई गई है। मामले की जांच तेज कर दी गई है और पुलिस के साथ परिवहन विभाग पूरे रैकेट की पड़ताल में जुटा है।
विषयसूची
Nagpur RTO Fraud: नागपुर ग्रामीण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में चोरी के ट्रकों के अवैध पंजीकरण का बड़ा मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान करीब 1,500 से 2,000 चोरी के ट्रकों का फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराया गया हो सकता है। इस खुलासे के बाद परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है और पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
खंगाले जा रहे 8 हजार ट्रकों के रिकॉर्ड
नागपुर ग्रामीण के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी विजयसिंह चव्हाण ने बताया कि शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसी के आधार पर देशभर की प्रमुख ट्रक निर्माण कंपनियों को पत्र भेजकर लगभग 8,000 ट्रकों का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। विभाग इन वाहनों के चेसिस नंबर, इंजन नंबर, निर्माण संबंधी जानकारी और स्वामित्व रिकॉर्ड का मिलान करेगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन वाहनों का पंजीकरण फर्जी दस्तावेजों के जरिए कराया गया है।
अरुणाचल और नागालैंड के नियमों का दुरूपयोग
जांच में यह भी सामने आया है कि पूरे फर्जीवाड़े में अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड की वाहन पंजीकरण प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। अधिकारियों के मुताबिक इन राज्यों में कुछ परिस्थितियों में वाहन की भौतिक जांच या प्रत्यक्ष उपस्थिति की अनिवार्यता नहीं होने का फायदा उठाया गया। आरोप है कि चोरी के ट्रकों का पहले इन राज्यों में पंजीकरण कराया गया और बाद में वैध दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उन्हें नागपुर ग्रामीण आरटीओ में ट्रांसफर कर दिया गया। इसी प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में चोरी के वाहन वैध रिकॉर्ड में शामिल कर दिए गए।
कपिलनगर थाने में मामला दर्ज,
आरटीओ की शिकायत के आधार पर नागपुर के कपिलनगर पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम पूरे रैकेट की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस फर्जीवाड़े में शामिल दलालों, वाहन मालिकों, संबंधित कर्मचारियों और अन्य आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले के सामने आने के बाद राज्य की वाहन पंजीकरण व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद पूरे मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल संबंधित दस्तावेजों और पंजीकरण रिकॉर्ड की बारीकी से जांच जारी है।

