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पुणे मेट्रो कामगारों का हक़ के लिए धरना

Pune Metro Workers Protest: पुणे मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के ठेका कामगारों ने भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में धरना दिया। कामगारों ने केंद्रीय वेतन दर, अवकाश भुगतान, राष्ट्रीय अवकाश पर दोगुना वेतन और महिला सुरक्षा की मांग की। 18 फरवरी 2025 के शासन निर्णय के पालन की मांग करते हुए संघ ने चेतावनी दी।

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Pune Metro Workers Protest: पुणे शहर में मेट्रो रेल सेवा के विकास के साथ ही हजारों कामगारों को रोजगार मिला है, लेकिन इन कामगारों के साथ हो रहे अन्याय और उनके मूलभूत अधिकारों की अनदेखी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। पुणे मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन में काम करने वाले ठेका कामगारों ने अपने न्यायसंगत अधिकारों की मांग को लेकर मेट्रो प्रशासन कार्यालय के सामने सांकेतिक धरना दिया। यह धरना पुणे मेट्रो रेल कामगार संघ के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जो भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध है।

कामगारों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से केंद्रीय वेतन दर, नियमित अवकाश, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक व्यवहार जैसे बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं। सरकार की ओर से जारी किए गए स्पष्ट आदेशों के बावजूद इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे कामगारों में गहरा असंतोष और निराशा का माहौल बना हुआ है।

सरकारी आदेश का पालन क्यों नहीं

अखिल भारतीय ठेका मजदूर महासंघ के सरचिटणीस सचिन मेंगाळे ने धरने के दौरान कहा कि 18 फरवरी 2025 को राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय जारी किया था। इस शासन निर्णय के अनुसार सभी ठेका कामगारों को केंद्रीय वेतन दर के अनुसार वेतन दिया जाना चाहिए। साथ ही पहले से जो वेतन अंतर बना हुआ है, उसका भुगतान भी तुरंत किया जाना चाहिए। लेकिन अफसोस की बात यह है कि मेट्रो प्रशासन इस आदेश को लागू करने में कोई गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

मेंगाळे ने कहा कि कामगार सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं, कोई दान या एहसान नहीं। उन्होंने कहा कि जब सरकार खुद नियम बनाती है तो उसका पालन करना सरकारी विभागों की जिम्मेदारी है। यदि ऐसा नहीं होता है तो कामगारों के पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

Pune Metro Workers Protest: पुणे मेट्रो कामगारों ने मांगे अपने न्यायसंगत अधिकार, संघ ने दी चेतावनी
Pune Metro Workers Protest: पुणे मेट्रो कामगारों ने मांगे अपने न्यायसंगत अधिकार, संघ ने दी चेतावनी

कामगारों की प्रमुख मांगें

धरने में शामिल कामगारों ने अपनी कई मांगें रखीं। सबसे पहली मांग यह है कि जो कामगार अपने बचे हुए अवकाश का उपयोग नहीं कर पाते, उनका भुगतान किया जाए। दूसरी मांग है कि राष्ट्रीय अवकाश के दिनों में काम करने वाले कामगारों को दोगुना वेतन दिया जाए, जैसा कि श्रम कानूनों में प्रावधान है।

कामगारों ने यह भी मांग की कि उन्हें नियमित रूप से वेतन पर्ची दी जाए ताकि उन्हें पता रहे कि उनका वेतन कैसे काटा या जोड़ा जा रहा है। ओवरटाइम काम करने वाले कामगारों को कानूनी दर के अनुसार भुगतान की मांग भी की गई है।

Pune Metro Workers Protest: पुणे मेट्रो कामगारों ने मांगे अपने न्यायसंगत अधिकार, संघ ने दी चेतावनी
Pune Metro Workers Protest: पुणे मेट्रो कामगारों ने मांगे अपने न्यायसंगत अधिकार, संघ ने दी चेतावनी

महिला कर्मचारियों की सुरक्षा का सवाल

धरने में एक अहम मुद्दा महिला कामगारों की सुरक्षा का भी उठाया गया। कामगार संघ का कहना है कि मेट्रो में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। देर रात या सुबह की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को विशेष सुरक्षा की जरूरत होती है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

इसके अलावा कामगारों ने अनावश्यक तबादलों पर रोक लगाने की भी मांग की। कई बार कामगारों को बिना किसी वजह के एक जगह से दूसरी जगह भेज दिया जाता है, जिससे उनकी पारिवारिक और सामाजिक जिंदगी प्रभावित होती है।

Pune Metro Workers Protest: पुणे मेट्रो कामगारों ने मांगे अपने न्यायसंगत अधिकार, संघ ने दी चेतावनी
Pune Metro Workers Protest: पुणे मेट्रो कामगारों ने मांगे अपने न्यायसंगत अधिकार, संघ ने दी चेतावनी

आंदोलन को तेज करने की चेतावनी

कामगार संघ ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 18 फरवरी 2025 के शासन निर्णय को तुरंत लागू नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हालांकि संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण और कानूनी रहेगा। किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।

संघ के नेताओं ने कहा कि कामगार देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें उनके काम का पूरा दाम भी मिलना चाहिए। उनका नारा है – “देश के हित में करेंगे काम, काम का लेंगे पूरा दाम!”

Pune Metro Workers Protest: पुणे मेट्रो कामगारों ने मांगे अपने न्यायसंगत अधिकार, संघ ने दी चेतावनी
Pune Metro Workers Protest: पुणे मेट्रो कामगारों ने मांगे अपने न्यायसंगत अधिकार, संघ ने दी चेतावनी

क्या है श्रम कानून का प्रावधान

भारतीय श्रम कानूनों के तहत ठेका कामगारों को भी नियमित कर्मचारियों के बराबर सुविधाएं और अधिकार दिए जाने चाहिए। केंद्रीय वेतन दर, न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, अवकाश, और सुरक्षित कार्य वातावरण हर कामगार का मूलभूत अधिकार है।

जब कोई सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्था इन नियमों का पालन नहीं करती, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि मानवीय गरिमा पर भी चोट है। पुणे मेट्रो जैसी आधुनिक और महत्वपूर्ण परियोजना में यदि कामगारों के साथ अन्याय होता है, तो यह चिंता का विषय है।

समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी

Pune Metro Workers Protest: पुणे मेट्रो रेल परियोजना शहर के विकास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस परियोजना की सफलता में कामगारों का बड़ा योगदान है। जो लोग दिन-रात मेहनत करके इस सेवा को चला रहे हैं, उनके प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें उनका हक समय पर मिले।

समाज को भी इस मुद्दे पर संवेदनशील होना चाहिए। कामगारों के अधिकारों की लड़ाई केवल उनकी नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना की लड़ाई है। जब तक हर व्यक्ति को उसके परिश्रम का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा।

पुणे मेट्रो प्रशासन से अपेक्षा है कि वह जल्द से जल्द इन मांगों पर ध्यान दे और कामगारों के साथ संवाद स्थापित करके समस्या का समाधान निकाले। यह न केवल कामगारों के हित में है बल्कि पूरी मेट्रो सेवा की सुचारू व्यवस्था के लिए भी जरूरी है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।