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संस्कृत के बिना भारतीयता अधूरी, भैय्याजी जोशी ने पुणे में कही बड़ी बात

संस्कृत के बिना भारतीयता अधूरी, भैय्याजी जोशी ने पुणे में कही बड़ी बात
Bhaiyyaji Joshi Sanskrit Importance: संस्कृत के बिना भारतीयता अधूरी, पुणे में हुआ पुस्तक विमोचन

पुणे में संस्कृत भारती के कार्यक्रम में आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैय्याजी जोशी ने कहा कि संस्कृत के बिना भारतीयता अधूरी है। उन्होंने संस्कृत को भारत की अमूल्य धरोहर बताया और इसे मृत भाषा कहने वालों की आलोचना की। कार्यक्रम में दस पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। विद्वानों ने संस्कृत शिक्षा को अनिवार्य बनाने की मांग की।

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Asfi Shadab
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विषयसूची

पुणे में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैय्याजी जोशी ने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत की पहचान और भारतीयता संस्कृत के बिना अधूरी है। संस्कृत भारती, पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में संस्कृत की दस पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। तिलक रोड स्थित गणेश सभागृह में हुए इस समारोह में देश भर से आए विद्वानों और संस्कृत प्रेमियों ने हिस्सा लिया।

भैय्याजी जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय दर्शन, विज्ञान, चिंतन और जीवन मूल्यों को समझने के लिए संस्कृत भाषा के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वास्तविक अर्थों में संस्कृत के बिना भारतीयता अथवा हिंदुत्व की कल्पना अधूरी है। यह भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं है बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान का आधार स्तंभ है।

संस्कृत को मृत भाषा कहना गलत

भैय्याजी जोशी ने उन लोगों की आलोचना की जो संस्कृत को मृत भाषा कहते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को भारत का सही अर्थ समझ में नहीं आया, वही लोग इस जीवंत भाषा को मृत कहने की भूल करते हैं। संस्कृत आज भी हमारे दैनिक जीवन में, हमारी अन्य भाषाओं में, हमारे त्योहारों में और हमारे संस्कारों में जीवित है। यह भाषा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि विज्ञान, गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा और अन्य अनेक क्षेत्रों में इसका विशाल साहित्य मौजूद है।

इज़राइल का हिब्रू भाषा का उदाहरण

भैय्याजी जोशी ने इज़राइल का उदाहरण देते हुए समझाया कि कैसे हिब्रू भाषा को पुनर्जीवित किया गया। उन्होंने कहा कि इज़राइल ने अपनी भाषा के प्रति स्वाभिमान दिखाते हुए हिब्रू को फिर से जीवित कर दिया। यदि हम भी संस्कृत के प्रति ऐसा ही स्वाभिमान और समर्पण दिखाएं तो यह भाषा फिर से अपने पुराने गौरव को प्राप्त कर सकती है। भाषा के प्रति स्वाभिमान ही किसी भी भाषा के पुनरुत्थान की पहली शर्त है।

संस्कृत भारत की अमूल्य धरोहर

कार्यक्रम में भैय्याजी जोशी ने संस्कृत को भारत की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि यह भाषा हजारों वर्षों के ज्ञान, अनुभव और चिंतन का खजाना है। वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत जैसे महान ग्रंथ संस्कृत में ही रचे गए हैं। इन ग्रंथों में जीवन जीने की कला, समाज को चलाने के नियम, प्रकृति के रहस्य और मानव जीवन के उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया गया है।

Bhaiyyaji Joshi Sanskrit Importance: संस्कृत के बिना भारतीयता अधूरी, पुणे में हुआ पुस्तक विमोचन
Bhaiyyaji Joshi Sanskrit Importance: संस्कृत के बिना भारतीयता अधूरी, पुणे में हुआ पुस्तक विमोचन

भारतीय भाषाओं का आधार है संस्कृत

भैय्याजी जोशी ने कहा कि भारत की कोई भी भाषा संस्कृत के बिना पूर्ण नहीं है। हिंदी, मराठी, गुजराती, बंगाली, तमिल, तेलुगू सभी भाषाओं में संस्कृत के शब्द बहुतायत में पाए जाते हैं। संस्कृत की व्याकरण प्रणाली इतनी वैज्ञानिक है कि आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान भी इससे प्रभावित है। पाणिनि की अष्टाध्यायी को दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे सटीक व्याकरण की पुस्तक माना जाता है।

दस पुस्तकों का हुआ लोकार्पण

कार्यक्रम में संस्कृत भारती, पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत की ओर से संस्कृत भाषा की दस पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। ये पुस्तकें विभिन्न विषयों पर आधारित हैं और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इन पुस्तकों में संस्कृत व्याकरण, साहित्य, दर्शन और आधुनिक विषयों को संस्कृत में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

विद्वानों की उपस्थिति

कार्यक्रम में राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. वेंपटी कुटुंबशास्त्री, अखिल भारतीय गीता शिक्षण प्रमुख शिरीष भेडसगावकर, डेक्कन कॉलेज अभिमत विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रसाद जोशी, कर्नल सतीश परांजपे, डॉ. रामचंद्र सिधये सहित कई गणमान्य विद्वान उपस्थित थे। सभी विद्वानों ने संस्कृत भाषा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए और इसके प्रचार-प्रसार के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।

संस्कृत शिक्षा की आवश्यकता

विद्वानों ने कहा कि संस्कृत शिक्षा को विद्यालयों और महाविद्यालयों में अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही संस्कृत से परिचित कराया जाना चाहिए। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है बल्कि यह हमारी पहचान और हमारी संस्कृति का प्रतीक है। जब बच्चे संस्कृत सीखेंगे तो उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका मिलेगा और वे भारतीय संस्कृति और परंपराओं को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।

संस्कृत और आधुनिक विज्ञान

कई विद्वानों ने संस्कृत और आधुनिक विज्ञान के बीच के संबंध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्कृत भाषा की संरचना इतनी वैज्ञानिक है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए इसे सबसे उपयुक्त भाषा माना जाता है। नासा जैसी संस्थाएं भी संस्कृत की वैज्ञानिकता को स्वीकार कर चुकी हैं।

संस्कृत भारती का योगदान

संस्कृत भारती संगठन पिछले कई दशकों से संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में लगा हुआ है। यह संगठन देश भर में संस्कृत शिविरों का आयोजन करता है जहां लोगों को सरल तरीके से संस्कृत बोलना सिखाया जाता है। इस संगठन का उद्देश्य संस्कृत को आम लोगों की भाषा बनाना है। पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत में भी संस्कृत भारती सक्रिय रूप से काम कर रही है और हजारों लोगों को संस्कृत से जोड़ चुकी है।

समापन और संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए संकल्प लिया। यह तय किया गया कि आने वाले समय में और अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिससे अधिक से अधिक लोग संस्कृत से जुड़ सकें। पुणे जैसे शैक्षणिक और सांस्कृतिक नगर में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल है जो संस्कृत के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाएगी।

यह कार्यक्रम संस्कृत भाषा के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। भैय्याजी जोशी के विचार और संस्कृत भारती के प्रयास निश्चित रूप से इस प्राचीन भाषा को फिर से जीवंत बनाने में सहायक होंगे।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।