नेटफ्लिक्स पर धुरंधर फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर मचा बवाल
Dhurandhar Netflix version: नेटफ्लिक्स पर धुरंधर फिल्म के आते ही इंटरनेट पर एक नई बहस शुरू हो गई है। रणवीर सिंह की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म ने सिनेमाघरों में 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर इतिहास रच दिया था। अब जब यह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है तो दर्शक इसके रनटाइम यानी फिल्म की लंबाई को लेकर काफी नाराज दिख रहे हैं। शुक्रवार सुबह से ही एक्स (पहले ट्विटर) पर कई यूजर्स ने दावा किया कि नेटफ्लिक्स पर फिल्म का काटा हुआ वर्जन दिखाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जो फिल्म उन्होंने थिएटर में देखी थी वह अब वैसी नहीं रही। सोशल मीडिया पर फिल्म के मेकर्स और नेटफ्लिक्स को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं।
सिनेमाघर और नेटफ्लिक्स के समय में अंतर
जब दर्शकों ने नेटफ्लिक्स पर धुरंधर फिल्म देखना शुरू किया तो उन्होंने पाया कि इसका समय सिनेमाघर वाले वर्जन से काफी कम है। थिएटर में यह फिल्म 3 घंटे 34 मिनट की थी जबकि नेटफ्लिक्स पर इसकी लंबाई केवल 3 घंटे 25 मिनट दिखाई दे रही है। यह सीधा 9 मिनट का अंतर है जिसने प्रशंसकों को चौंका दिया है। फैन्स का मानना है कि ओटीटी के लिए फिल्म के कई जरूरी सीन हटा दिए गए हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि ओटीटी पर फिल्म की स्पीड और फ्रेम रेट में मामूली बदलाव की वजह से भी समय में अंतर आ जाता है लेकिन दर्शक इस बात से संतुष्ट नहीं हैं।
WTF color grading is this ? @NetflixIndia
No contrast #DhurandharOnNetflix
YouTube video has better sound & video quality… Check this and sort out #DhurandharNetflix print vs Youtube print pic.twitter.com/zXn4ISYKOM
— Aravinth hyped for D2 (@weekday_19) January 29, 2026
विवादित डायलॉग पर चली सेंसर की कैंची
इस फिल्म के छोटे होने का एक बड़ा कारण इसमें मौजूद कुछ विवादित डायलॉग बताए जा रहे हैं। फिल्म में संजय दत्त ने एसपी चौधरी असलम का किरदार निभाया है। फिल्म के एक सीन में वह बलोच समुदाय को लेकर एक डायलॉग बोलते हैं जिसे काफी आपत्तिजनक माना गया था। गुजरात हाई कोर्ट में इस सीन के खिलाफ याचिका भी दायर की गई थी। इसके बाद सेंसर बोर्ड के निर्देश पर मेकर्स ने बलोच शब्द को पूरी तरह से म्यूट कर दिया है। मूल डायलॉग में कहा गया था कि मगरमच्छ पर भरोसा किया जा सकता है लेकिन बलोच पर नहीं। अब नेटफ्लिक्स पर इस शब्द को हटाकर आवाज बंद कर दी गई है।
फिल्म के मेकर्स का क्या है कहना
धुरंधर के मेकर्स जियो स्टूडियोज और बी62 स्टूडियोज ने इस मामले पर सफाई दी है। उनका कहना है कि नेटफ्लिक्स पर वही वर्जन दिखाया जा रहा है जो सेंसर बोर्ड द्वारा पास किया गया है। 1 जनवरी से सिनेमाघरों में भी फिल्म का यही नया वर्जन चलाया जा रहा था। फिल्म में हिंसा और खून-खराबे वाले सीन अभी भी वैसे ही रखे गए हैं। मेकर्स का कहना है कि उन्होंने किसी सीन को काटा नहीं है बल्कि कानूनी आपत्तियों और सेंसर बोर्ड के नियमों का पालन करते हुए केवल शब्दों को म्यूट किया है। फिल्म की कहानी में इससे कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
Dhurandhar on Netflix
Uncut version. 10,m cut on OTT pic.twitter.com/Tn6sF7OAKV
— Jasmin (@Jasmincinema) January 30, 2026
बलोच समुदाय का विरोध और कानूनी मामला
फिल्म धुरंधर की कहानी वास्तविक घटनाओं और खुफिया ऑपरेशंस पर आधारित है। फिल्म में बलोच समुदाय के चित्रण को लेकर पाकिस्तान और भारत के कुछ हिस्सों में भारी विरोध हुआ था। बलोच समुदाय के लोगों ने इसे अपनी मानहानि बताया था। इसी दबाव के चलते मेकर्स को फिल्म में बदलाव करने पड़े। नेटफ्लिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर किसी भी विवाद से बचने के लिए कंपनी ने अपडेटेड वर्जन को ही स्ट्रीम करने का फैसला किया। दर्शकों का एक वर्ग इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला मान रहा है तो दूसरा वर्ग इसे सामाजिक शांति के लिए सही कदम बता रहा है।
Why the fuɔk Dhurandhar is so heavily censored on Netflix‽
Despite holding an ‘A’ (Adults only) rating, the streaming version features muted dialogues — censored swear words, abuses, and in some cases, even crucial dialogues are muted, and approximately 10 minutes of edited… pic.twitter.com/M7IWyyYD3C
— 卂乇 (@imAlter_Ego) January 30, 2026
धुरंधर 2 की तैयारियों में जुटे फैन्स
Dhurandhar Netflix version: इतने विवादों के बावजूद फिल्म की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। धुरंधर के पहले भाग की अपार सफलता के बाद अब दर्शकों को इसके दूसरे भाग का इंतजार है। फिल्म के आखिर में ही इसके सीक्वल धुरंधर: द रिवेंज का ऐलान कर दिया गया था। यह फिल्म 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। माना जा रहा है कि दूसरे भाग में कहानी और भी ज्यादा रोमांचक और हिंसक होगी। रणवीर सिंह के साथ-साथ आर माधवन और अक्षय खन्ना भी अपने पुराने अंदाज में नजर आएंगे। ओटीटी पर फिल्म देखने के बाद अब फैन्स थिएटर में दूसरे भाग का अनुभव लेने के लिए बेताब हैं।
ओटीटी और सेंसरशिप का नया दौर
धुरंधर फिल्म का यह विवाद दिखाता है कि अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी सेंसरशिप के नियम कड़े होते जा रहे हैं। पहले ओटीटी को एक स्वतंत्र मंच माना जाता था लेकिन अब बड़े बजट की फिल्मों को रिलीज करने से पहले कई तरह के कानूनी और सामाजिक पहलुओं का ध्यान रखना पड़ता है। नेटफ्लिक्स और अन्य प्लेटफॉर्म्स अब वही कंटेंट दिखा रहे हैं जो सरकार और सेंसर बोर्ड की गाइडलाइन्स के हिसाब से सही हो। धुरंधर का केस भविष्य की अन्य बड़ी फिल्मों के लिए एक मिसाल बन सकता है।