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धुरंधर फिल्म का नेटफ्लिक्स पर छोटा रनटाइम और सेंसरशिप विवाद

धुरंधर फिल्म का नेटफ्लिक्स पर छोटा रनटाइम और सेंसरशिप विवाद
Dhurandhar Netflix version: जानिए क्यों नेटफ्लिक्स पर धुरंधर फिल्म का रनटाइम कम है (IMDB Photo)

धुरंधर: रणवीर सिंह की सुपरहिट फिल्म धुरंधर 30 जनवरी 2026 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई, लेकिन सिनेमाघरों के मुकाबले इसकी लंबाई 9 मिनट कम होने की वजह से विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म के इस वर्जन में कानूनी आपत्तियों और सेंसर बोर्ड के नियमों के कारण बलोच समुदाय से जुड़े कुछ डायलॉग्स को म्यूट (आवाज बंद) कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों की नाराजगी के बावजूद, निर्माताओं ने साफ किया है कि नियमों का पालन करने के लिए केवल सेंसर बोर्ड द्वारा पास किए गए नए वर्जन को ही दिखाया जा रहा है।

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Asfi Shadab
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नेटफ्लिक्स पर धुरंधर फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर मचा बवाल

Dhurandhar Netflix version: नेटफ्लिक्स पर धुरंधर फिल्म के आते ही इंटरनेट पर एक नई बहस शुरू हो गई है। रणवीर सिंह की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म ने सिनेमाघरों में 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर इतिहास रच दिया था। अब जब यह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है तो दर्शक इसके रनटाइम यानी फिल्म की लंबाई को लेकर काफी नाराज दिख रहे हैं। शुक्रवार सुबह से ही एक्स (पहले ट्विटर) पर कई यूजर्स ने दावा किया कि नेटफ्लिक्स पर फिल्म का काटा हुआ वर्जन दिखाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जो फिल्म उन्होंने थिएटर में देखी थी वह अब वैसी नहीं रही। सोशल मीडिया पर फिल्म के मेकर्स और नेटफ्लिक्स को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं।

सिनेमाघर और नेटफ्लिक्स के समय में अंतर

जब दर्शकों ने नेटफ्लिक्स पर धुरंधर फिल्म देखना शुरू किया तो उन्होंने पाया कि इसका समय सिनेमाघर वाले वर्जन से काफी कम है। थिएटर में यह फिल्म 3 घंटे 34 मिनट की थी जबकि नेटफ्लिक्स पर इसकी लंबाई केवल 3 घंटे 25 मिनट दिखाई दे रही है। यह सीधा 9 मिनट का अंतर है जिसने प्रशंसकों को चौंका दिया है। फैन्स का मानना है कि ओटीटी के लिए फिल्म के कई जरूरी सीन हटा दिए गए हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि ओटीटी पर फिल्म की स्पीड और फ्रेम रेट में मामूली बदलाव की वजह से भी समय में अंतर आ जाता है लेकिन दर्शक इस बात से संतुष्ट नहीं हैं।

विवादित डायलॉग पर चली सेंसर की कैंची

इस फिल्म के छोटे होने का एक बड़ा कारण इसमें मौजूद कुछ विवादित डायलॉग बताए जा रहे हैं। फिल्म में संजय दत्त ने एसपी चौधरी असलम का किरदार निभाया है। फिल्म के एक सीन में वह बलोच समुदाय को लेकर एक डायलॉग बोलते हैं जिसे काफी आपत्तिजनक माना गया था। गुजरात हाई कोर्ट में इस सीन के खिलाफ याचिका भी दायर की गई थी। इसके बाद सेंसर बोर्ड के निर्देश पर मेकर्स ने बलोच शब्द को पूरी तरह से म्यूट कर दिया है। मूल डायलॉग में कहा गया था कि मगरमच्छ पर भरोसा किया जा सकता है लेकिन बलोच पर नहीं। अब नेटफ्लिक्स पर इस शब्द को हटाकर आवाज बंद कर दी गई है।

फिल्म के मेकर्स का क्या है कहना

धुरंधर के मेकर्स जियो स्टूडियोज और बी62 स्टूडियोज ने इस मामले पर सफाई दी है। उनका कहना है कि नेटफ्लिक्स पर वही वर्जन दिखाया जा रहा है जो सेंसर बोर्ड द्वारा पास किया गया है। 1 जनवरी से सिनेमाघरों में भी फिल्म का यही नया वर्जन चलाया जा रहा था। फिल्म में हिंसा और खून-खराबे वाले सीन अभी भी वैसे ही रखे गए हैं। मेकर्स का कहना है कि उन्होंने किसी सीन को काटा नहीं है बल्कि कानूनी आपत्तियों और सेंसर बोर्ड के नियमों का पालन करते हुए केवल शब्दों को म्यूट किया है। फिल्म की कहानी में इससे कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

बलोच समुदाय का विरोध और कानूनी मामला

फिल्म धुरंधर की कहानी वास्तविक घटनाओं और खुफिया ऑपरेशंस पर आधारित है। फिल्म में बलोच समुदाय के चित्रण को लेकर पाकिस्तान और भारत के कुछ हिस्सों में भारी विरोध हुआ था। बलोच समुदाय के लोगों ने इसे अपनी मानहानि बताया था। इसी दबाव के चलते मेकर्स को फिल्म में बदलाव करने पड़े। नेटफ्लिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर किसी भी विवाद से बचने के लिए कंपनी ने अपडेटेड वर्जन को ही स्ट्रीम करने का फैसला किया। दर्शकों का एक वर्ग इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला मान रहा है तो दूसरा वर्ग इसे सामाजिक शांति के लिए सही कदम बता रहा है।

धुरंधर 2 की तैयारियों में जुटे फैन्स

Dhurandhar Netflix version: इतने विवादों के बावजूद फिल्म की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। धुरंधर के पहले भाग की अपार सफलता के बाद अब दर्शकों को इसके दूसरे भाग का इंतजार है। फिल्म के आखिर में ही इसके सीक्वल धुरंधर: द रिवेंज का ऐलान कर दिया गया था। यह फिल्म 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। माना जा रहा है कि दूसरे भाग में कहानी और भी ज्यादा रोमांचक और हिंसक होगी। रणवीर सिंह के साथ-साथ आर माधवन और अक्षय खन्ना भी अपने पुराने अंदाज में नजर आएंगे। ओटीटी पर फिल्म देखने के बाद अब फैन्स थिएटर में दूसरे भाग का अनुभव लेने के लिए बेताब हैं।

ओटीटी और सेंसरशिप का नया दौर

धुरंधर फिल्म का यह विवाद दिखाता है कि अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी सेंसरशिप के नियम कड़े होते जा रहे हैं। पहले ओटीटी को एक स्वतंत्र मंच माना जाता था लेकिन अब बड़े बजट की फिल्मों को रिलीज करने से पहले कई तरह के कानूनी और सामाजिक पहलुओं का ध्यान रखना पड़ता है। नेटफ्लिक्स और अन्य प्लेटफॉर्म्स अब वही कंटेंट दिखा रहे हैं जो सरकार और सेंसर बोर्ड की गाइडलाइन्स के हिसाब से सही हो। धुरंधर का केस भविष्य की अन्य बड़ी फिल्मों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।