सोना-चांदी की कीमतों में तीसरे दिन गिरावट जारी
सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली है। 2 फरवरी को दोनों कीमती धातुओं में भारी गिरावट दर्ज की गई। पिछले महीने रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब निवेशक मुनाफावसूली में जुटे हुए हैं। इस वजह से बाजार में भारी दबाव बना हुआ है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों दोनों में कमजोरी देखी जा रही है। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर बदलती उम्मीदों ने सोने-चांदी की कीमतों पर नकारात्मक असर डाला है।
MCX पर सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी के फ्यूचर्स में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। पिछले कारोबारी सत्र में MCX सिल्वर फ्यूचर्स 26,273 रुपये यानी 9 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,65,652 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। वहीं अप्रैल में डिलीवरी वाले सोने के फ्यूचर्स में 3 प्रतिशत यानी 4,592 रुपये की गिरावट आई और यह 1,47,753 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
सोमवार को कारोबार के दौरान सोना और चांदी में शुरुआत में करीब 20 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। हालांकि बाद में ETFs में कुछ सुधार हुआ और कीमतें दोबारा 10 प्रतिशत तक ऊपर आईं। यह तेज गिरावट हाल ही में रिकॉर्ड ऊंचाई से आई तेज गिरावट का नतीजा है। निवेशकों ने मुनाफा बुक किया और व्यापारियों ने अपनी लीवरेज वाली पोजीशन को बंद कर दिया, जिससे बाजार में व्यापक बिकवाली शुरू हो गई।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर
अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है। निवेशक फेडरल रिजर्व की संभावित नीति को लेकर सोच-विचार कर रहे हैं। केविन वार्श को फेड का अगला चेयरमैन बनाए जाने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि वह फेड की बैलेंस शीट को कम करने के पक्ष में हैं। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने की कीमतों पर दबाव बनता है। क्योंकि दूसरी मुद्राओं में सोना खरीदने वालों के लिए यह महंगा हो जाता है।
सोमवार को वैश्विक बाजारों में कमोडिटी की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई। सोना, चांदी, तेल और औद्योगिक धातुओं में गहरी गिरावट रही। केविन वार्श को फेड का अगला चेयरमैन चुने जाने की खबर के बाद जोखिम भरी संपत्तियों में बिकवाली की लहर चल पड़ी। इससे कीमती धातुओं में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट आई।
स्पॉट गोल्ड और सिल्वर में भारी गिरावट
स्पॉट गोल्ड में 9 प्रतिशत की गिरावट आई और यह दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। चांदी में 13 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। पिछले सप्ताह दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई थी। शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड में 1983 के बाद सबसे तेज गिरावट देखी गई। एक ही दिन में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। सोमवार को सुबह तक यह 3.6 प्रतिशत और गिरकर 4,686.51 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिका में अप्रैल डिलीवरी के लिए गोल्ड फ्यूचर्स 0.8 प्रतिशत गिरकर 4,707.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
स्पॉट सिल्वर सोमवार को 6.7 प्रतिशत और गिरकर 78.96 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। पिछले कुछ हफ्तों में चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया था। लेकिन अब मुनाफावसूली के चलते तेज गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।
CME ने बढ़ाई मार्जिन आवश्यकताएं
CME ग्रुप ने पिछले सप्ताह कीमती धातुओं में आई तेज गिरावट के बाद मार्जिन आवश्यकताओं में बढ़ोतरी की है। इस कदम के बाद सोमवार को सोना और चांदी में गिरावट और तेज हो गई। COMEX गोल्ड फ्यूचर्स के लिए मार्जिन 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं COMEX 5000 सिल्वर फ्यूचर्स के लिए मार्जिन 11 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। प्लैटिनम और पैलेडियम फ्यूचर्स के लिए भी मार्जिन आवश्यकताओं में बढ़ोतरी की गई है।
मार्जिन बढ़ाने से व्यापारियों को अपनी पोजीशन बनाए रखने के लिए अधिक पैसा लगाना पड़ता है। इससे कई व्यापारी अपनी पोजीशन बंद कर देते हैं, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है।
भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताएं
भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के साथ-साथ फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंताओं ने चांदी की सुरक्षित निवेश के रूप में अपील को मजबूत किया था। मोमेंटम बाइंग ने भी तेजी को बढ़ावा दिया। चीनी सट्टेबाजों की ओर से बड़े पैमाने पर खरीदारी ने कीमतों में उछाल को और तेज कर दिया था। लेकिन जब मुनाफावसूली शुरू हुई तो गिरावट भी उतनी ही तेज रही।
हाल के हफ्तों में सोने और चांदी में जो तेजी देखी गई थी, उसमें कई कारकों का योगदान था। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति की चिंताएं और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी ने कीमतों को ऊपर धकेला था। लेकिन रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया।
MCX पर लोअर सर्किट की स्थिति
सोमवार को MCX पर सोना 6 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। कीमतों में 9,700 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई। चांदी 12 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गई और करीब 32,000 रुपये प्रति किलोग्राम गिर गई। यह गिरावट हाल के समय में सबसे तेज गिरावट में से एक है। मार्च डिलीवरी के लिए MCX सिल्वर फ्यूचर्स में 12 प्रतिशत की गिरावट जारी रही।
लोअर सर्किट तब लगता है जब किसी कमोडिटी या शेयर की कीमत एक निश्चित सीमा से अधिक गिर जाती है। यह नियामक तंत्र अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए बनाया गया है। लेकिन जब बाजार में भारी बिकवाली का दबाव होता है तो सर्किट लग जाना आम बात है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की संभावनाएं
JP Morgan के विशेषज्ञों ने कहा कि हालिया अस्थिरता के बावजूद, वे लंबी अवधि में तेजी बरकरार रहने की उम्मीद करते हैं। उन्होंने एक नोट में कहा कि वे मध्यम अवधि में सोने पर दृढ़ता से तेजी की उम्मीद कर रहे हैं। यह एक स्वच्छ, संरचनात्मक और निरंतर विविधीकरण की प्रवृत्ति पर आधारित है। कागजी संपत्तियों की तुलना में वास्तविक संपत्तियों के बेहतर प्रदर्शन का दौर अभी भी जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है। लंबी अवधि में सोना और चांदी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। वैश्विक अनिश्चितताएं, मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक कीमती धातुओं की मांग को बनाए रखेंगे। केंद्रीय बैंक अभी भी अपने भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीद रहे हैं।
हालांकि निकट भविष्य में और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर मुनाफावसूली जारी रहती है तो कीमतें और नीचे जा सकती हैं। निवेशकों को सावधानी से निवेश करना चाहिए। बाजार की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका हो सकता है। लेकिन शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को सावधान रहना होगा।
भारतीय बाजार में त्योहारों के मौसम में सोने और चांदी की मांग बढ़ती है। अगर कीमतें इसी तरह नरम रहती हैं तो खरीदारी में तेजी आ सकती है। ग्रामीण इलाकों में अच्छी बारिश और फसल की अच्छी पैदावार से भी मांग को समर्थन मिल सकता है। शादी के सीजन में भी सोने की खरीदारी बढ़ती है। इन सभी कारकों को देखते हुए आने वाले समय में बाजार में स्थिरता आ सकती है।
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