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India US Interim Trade Deal: टैक्स में राहत, तकनीक में सहयोग और चीन को संदेश, जानिए भारत–अमेरिका डील की बड़ी बातें

टैक्स में राहत, तकनीक में सहयोग और चीन को संदेश, जानिए भारत–अमेरिका डील की बड़ी बातें
टैक्स में राहत, तकनीक में सहयोग और चीन को संदेश, जानिए भारत–अमेरिका डील की बड़ी बातें (Pic Credit- X @moneygurusumit)

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता टैक्स, सप्लाई चेन, डिजिटल ट्रेड और रणनीतिक साझेदारी को नया आकार देगा। यह डील फार्मा, टेक्नोलॉजी और एनर्जी सेक्टर के लिए अहम है और भविष्य में पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रास्ता खोलती है।

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India US Interim Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम व्यापार समझौता सिर्फ दो देशों के बीच आर्थिक सहमति नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत भी है। शनिवार को सामने आए इस समझौते ने साफ कर दिया है कि दुनिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं अब सिर्फ रणनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि व्यापारिक तौर पर भी एक-दूसरे पर भरोसा बढ़ा रही हैं।

फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच शुरू हुई बातचीत का यह पहला ठोस नतीजा माना जा रहा है। यह समझौता अंतरिम है, लेकिन इसके दायरे और शर्तें बताती हैं कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंध किस दिशा में बढ़ने वाले हैं।

भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की बुनियाद

यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है, जब वैश्विक सप्लाई चेन में अस्थिरता, चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश और टेक्नोलॉजी व एनर्जी सेक्टर में नए गठजोड़ बन रहे हैं। संयुक्त बयान में साफ कहा गया है कि इस डील का उद्देश्य व्यापार संतुलन सुधारना, सप्लाई चेन को मजबूत करना और भविष्य के लिए सुरक्षित व्यापारिक ढांचा तैयार करना है।

यह भी पहली बार है जब दोनों देश खुलकर “नॉन-मार्केट इकोनॉमी” की नीतियों का जिक्र कर रहे हैं, जिसे सीधे तौर पर चीन से जोड़कर देखा जा रहा है।

अमेरिका ने किन भारतीय उत्पादों पर टैक्स लगाया

समझौते के तहत अमेरिका भारत में बने कई उत्पादों पर 18 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा। इसमें कपड़े, जूते-चप्पल, लेदर प्रोडक्ट्स, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, हैंडिक्राफ्ट, होम डेकोर और कुछ मशीनें शामिल हैं।

हालांकि, यह तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा है। जैसे ही यह अंतरिम समझौता पूरी तरह लागू होगा, अमेरिका जेनेरिक दवाओं, हीरे-जवाहरात और एयरक्राफ्ट पार्ट्स जैसे अहम भारतीय उत्पादों पर से टैक्स हटाने पर सहमत हुआ है। भारत के फार्मा और जेम्स-ज्वेलरी सेक्टर के लिए यह बड़ी राहत मानी जा रही है।

भारत को क्या-क्या रियायतें देनी होंगी

इस समझौते में भारत ने भी कई अहम प्रतिबद्धताएं की हैं। अमेरिका से आने वाले ज्यादातर औद्योगिक सामानों पर भारत या तो आयात शुल्क खत्म करेगा या उसे काफी कम करेगा। इसके अलावा कृषि और फूड सेक्टर में भी बदलाव होंगे।

अमेरिका से आने वाले मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट पर टैक्स में कटौती की जाएगी। जानवरों के चारे के लिए इस्तेमाल होने वाले लाल ज्वार और सूखे अनाज पर भी भारत ने ड्यूटी कम करने का वादा किया है।

500 बिलियन डॉलर की खरीद का वादा

सबसे अहम बिंदु यह है कि भारत ने अगले पांच सालों में अमेरिका से करीब 500 बिलियन डॉलर का सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें एनर्जी प्रोडक्ट्स, विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं और डेटा सेंटर से जुड़े उपकरण शामिल होंगे।

इस फैसले को भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों, डिजिटल इकोनॉमी और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। यह सिर्फ आयात का मामला नहीं है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।

स्टील, एल्युमीनियम और दवाओं पर क्या बदलेगा

स्टील और एल्युमीनियम को लेकर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नियम लंबे समय से विवाद का कारण रहे हैं। नए समझौते में यह तय हुआ है कि भारतीय एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर लगने वाले कुछ टैक्स हटाए जाएंगे और ऑटो पार्ट्स के लिए भारत को विशेष कोटा मिलेगा।

फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए फिलहाल समीक्षा की बात कही गई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि अमेरिका भारतीय दवाओं के महत्व को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

डिजिटल ट्रेड और चीन को लेकर साझा रणनीति

इस समझौते का एक अहम पहलू डिजिटल ट्रेड है। दोनों देश डेटा सेंटर, GPUs और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े व्यापार को बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इसके साथ ही सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और उन नीतियों का मुकाबला करने की बात भी कही गई है, जो बाजार आधारित नहीं हैं।

यह साफ इशारा है कि भारत और अमेरिका अब वैश्विक आर्थिक संतुलन में मिलकर भूमिका निभाना चाहते हैं।

यह समझौता अंतरिम है, यानी अस्थायी। लेकिन इसे तुरंत लागू किया जाएगा और आने वाले महीनों में इसे पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रूप देने की तैयारी है। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत होगी, जहां व्यापार सिर्फ मुनाफे का नहीं, बल्कि रणनीतिक भरोसे का भी आधार बनेगा।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।