अमेरिका के साथ हुआ ऐतिहासिक व्यापार समझौता
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद आखिरकार एक बड़ा व्यापार समझौता हो गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आज इस डील को “पड़ोस में सबसे बेहतरीन” करार देते हुए कहा कि यह भारत के लिए एक बहुत अच्छी उपलब्धि है। यह समझौता कई महीनों की मेहनत और कई बाधाओं को पार करने के बाद संभव हो सका है।
इस डील की घोषणा सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी पुष्टि करते हुए ट्रंप को धन्यवाद दिया। यह समझौता भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया अध्याय साबित हो सकता है।
टैरिफ में भारी कटौती का ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट Truth Social पर पोस्ट करते हुए बताया कि भारत और अमेरिका ने एक व्यापार समझौते पर सहमति बना ली है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाले पारस्परिक शुल्क यानी टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।
यह कटौती बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में सबसे कम टैरिफ में से एक है। खासकर जब हम भारत के पड़ोसी देशों से तुलना करें तो यह और भी साफ हो जाता है कि भारत को कितना फायदा हुआ है।
पड़ोसी देशों से बेहतर स्थिति
जब हम इस समझौते को भारत के पड़ोसी देशों के साथ तुलना करते हैं, तो भारत की जीत साफ नजर आती है। चीन को फिलहाल 37 प्रतिशत टैरिफ चुकाना पड़ रहा है, जो भारत से दोगुने से भी ज्यादा है। बांग्लादेश को 20 प्रतिशत और पाकिस्तान को 19 प्रतिशत टैरिफ देना पड़ रहा है।
इस तरह भारत को 18 प्रतिशत की दर मिलना एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं को इससे भी कम दरें मिली हुई हैं, लेकिन विकासशील देशों की श्रेणी में भारत की स्थिति सबसे मजबूत है।
रूसी तेल पर सवाल
ट्रंप ने अपनी घोषणा में दावा किया है कि यह समझौता भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बंद करने के साथ आएगा। हालांकि, न तो भारत और न ही अमेरिका ने इस बारे में कोई आधिकारिक विवरण जारी किया है कि यह प्रावधान कब से लागू होगा।
रूस ने भी इस मामले पर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। यह एक संवेदनशील मुद्दा है क्योंकि भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से रूसी तेल की खरीद बढ़ाई थी, जिससे भारत को सस्ते दामों पर तेल मिल रहा था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस मामले में क्या रुख अपनाता है।
लंबी बातचीत के बाद मिली सफलता
यह समझौता कई महीनों की लंबी और जटिल बातचीत का नतीजा है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में पिछले कुछ समय से तनाव बना हुआ था। ट्रंप प्रशासन ने कई बार भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी थी और दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे को लेकर विवाद चल रहा था।
इन सभी चुनौतियों के बावजूद, भारत सरकार ने धैर्य और कूटनीति के साथ काम किया और आखिरकार एक सकारात्मक नतीजा हासिल किया। पीयूष गोयल ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी की मजबूत नेतृत्व क्षमता और विदेश मंत्रालय की टीम को दिया।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए फायदे
इस समझौते से भारतीय अर्थव्यवस्था को कई तरह से फायदा होने की उम्मीद है। टैरिफ में कटौती से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद बेचना आसान हो जाएगा। इससे भारत का निर्यात बढ़ेगा और विदेशी मुद्रा में भी इजाफा होगा।
खासकर कपड़ा, फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है। यह छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी नए अवसर खोलेगा और रोजगार के नए मौके पैदा होंगे।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भारत की मजबूत स्थिति
यह समझौता भारत की बढ़ती हुई अंतर्राष्ट्रीय साख को भी दर्शाता है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत कर रहा है। अमेरिका के साथ यह डील इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी विदेश नीति में काफी सक्रियता दिखाई है। चाहे वह G20 की अध्यक्षता हो या फिर विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते, भारत ने हर मोर्चे पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह नया व्यापार समझौता इसी श्रृंखला की एक और कड़ी है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि सरकार इस समझौते को एक बड़ी उपलब्धि बता रही है, लेकिन विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रूसी तेल की खरीद बंद करने की शर्त भारत के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
इसके अलावा, समझौते के बारीक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, इसलिए पूरी तस्वीर साफ होने में अभी समय लगेगा। विपक्ष की ओर से यह सवाल उठाए जा सकते हैं कि क्या भारत को इस समझौते में सभी क्षेत्रों में उचित लाभ मिला है या नहीं।
आगे की राह
अब सवाल यह है कि यह समझौता कब से लागू होगा और इसके क्या-क्या प्रावधान होंगे। दोनों देशों को अभी इसके कानूनी पहलुओं और कार्यान्वयन की रणनीति पर काम करना होगा। यह भी देखना होगा कि रूसी तेल के मुद्दे पर भारत क्या फैसला लेता है।
इस समझौते से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। अगर यह ठीक से लागू हुआ, तो यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद करेगा।
पीयूष गोयल का बयान साफ करता है कि सरकार इस समझौते को लेकर काफी आशावादी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह डील जमीन पर कैसे काम करती है और भारतीय व्यापार और उद्योग जगत को इससे वास्तव में कितना लाभ मिलता है।