देश की जानी-मानी पाइप और ट्यूब निर्माता कंपनी जिंदल सॉ ने अपने दिसंबर 2025 तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी किए हैं। कंपनी के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे हैं। कंपनी की शुद्ध बिक्री और मुनाफे में साल दर साल आधार पर काफी गिरावट देखी गई है। यह आंकड़े बाजार के विशेषज्ञों और निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।
दिसंबर तिमाही के प्रमुख आंकड़े
जिंदल सॉ ने दिसंबर 2025 तिमाही में 4,129.47 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री दर्ज की है। यह आंकड़ा दिसंबर 2024 की तुलना में 7.69 फीसदी कम है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी की शुद्ध बिक्री 4,473.62 करोड़ रुपये थी। इस तरह कंपनी की आय में करीब 344 करोड़ रुपये की कमी आई है।
कंपनी का शुद्ध लाभ और भी चिंताजनक स्थिति में है। दिसंबर 2025 तिमाही में शुद्ध लाभ 226.77 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 477.16 करोड़ रुपये था। इस तरह मुनाफे में 52.48 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि कंपनी का लाभ आधे से भी ज्यादा घट गया है।
ईबिटडा में भी आई कमी
कंपनी का ईबिटडा यानी ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई भी काफी कम हुई है। दिसंबर 2025 तिमाही में यह 527.06 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल यह 882.06 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार ईबिटडा में 40.25 फीसदी की गिरावट आई है। यह कंपनी के परिचालन मुनाफे में कमी को दर्शाता है।
प्रति शेयर आय यानी ईपीएस भी काफी घट गई है। दिसंबर 2025 में ईपीएस 3.56 रुपये रही, जबकि पिछले साल यह 7.50 रुपये थी। यह निवेशकों के लिए एक निराशाजनक संकेत है क्योंकि इससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ता है।

शेयर बाजार में प्रदर्शन
जिंदल सॉ के शेयर 16 जनवरी 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर 179.29 रुपये के भाव पर बंद हुए। पिछले छह महीनों में शेयर ने निवेशकों को 21.63 फीसदी का नकारात्मक रिटर्न दिया है। यानी अगर किसी ने छह महीने पहले इसमें निवेश किया था तो उसे नुकसान हुआ है।
स्थिति और भी खराब तब दिखती है जब हम बारह महीनों का प्रदर्शन देखते हैं। पिछले एक साल में शेयर ने 31.97 फीसदी का नकारात्मक रिटर्न दिया है। यह दर्शाता है कि कंपनी लंबे समय से दबाव में है और निवेशकों का विश्वास कमजोर हुआ है।
गिरावट के संभावित कारण
विशेषज्ञों के अनुसार कंपनी के प्रदर्शन में गिरावट के कई कारण हो सकते हैं। स्टील उद्योग में कच्चे माल की बढ़ती कीमतें एक प्रमुख कारण हो सकती हैं। लोहे और अन्य धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ता है।
वैश्विक बाजार में मांग में कमी भी एक कारण हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक मंदी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे निर्यात प्रभावित होता है। जिंदल सॉ का एक बड़ा हिस्सा निर्यात से आता है, इसलिए वैश्विक मांग में कमी का असर दिख रहा है।
घरेलू बाजार में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। नई कंपनियां बाजार में आ रही हैं और पुरानी कंपनियां अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। इससे कीमतों पर दबाव बनता है और मुनाफा कम होता है।
उद्योग की स्थिति
स्टील और पाइप उद्योग पूरे देश में थोड़ी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सरकारी खर्च में कमी का असर दिख रहा है। निर्माण गतिविधियों में सुस्ती आई है जिससे पाइप और ट्यूब की मांग कम हुई है।
रियल एस्टेट क्षेत्र में भी मंदी के संकेत मिल रहे हैं। नए प्रोजेक्ट कम शुरू हो रहे हैं और पुराने प्रोजेक्ट धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं। यह सब जिंदल सॉ जैसी कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण है।
कंपनी के बारे में
जिंदल सॉ भारत की अग्रणी स्टील पाइप निर्माता कंपनी है। कंपनी विभिन्न प्रकार के पाइप और ट्यूब बनाती है जो तेल और गैस, जल आपूर्ति, और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उपयोग होते हैं। कंपनी का नेटवर्क देश और विदेश दोनों में फैला हुआ है।
कंपनी के पास आधुनिक उत्पादन सुविधाएं हैं और यह गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। हालांकि, वर्तमान तिमाही के नतीजे बताते हैं कि कंपनी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
निवेशकों के लिए सुझाव
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। कंपनी के लगातार कमजोर प्रदर्शन को देखते हुए नए निवेश से पहले गहन विश्लेषण जरूरी है। जो निवेशक पहले से इस शेयर में हैं, उन्हें अपनी स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए।
हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक अवसर भी हो सकता है अगर कंपनी अपने प्रदर्शन में सुधार करती है। स्टील उद्योग चक्रीय प्रकृति का होता है और समय के साथ सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
आगे की राह
कंपनी के प्रबंधन को अब लागत नियंत्रण पर ध्यान देना होगा। कच्चे माल की खरीद में बेहतर रणनीति और परिचालन दक्षता बढ़ाने की जरूरत है। नए बाजारों की तलाश और मौजूदा ग्राहकों के साथ संबंध मजबूत करना भी महत्वपूर्ण होगा।
सरकार की बुनियादी ढांचा योजनाओं से आगे फायदा हो सकता है। अगर सरकार अपने खर्च में बढ़ोतरी करती है तो स्टील और पाइप की मांग बढ़ेगी। कंपनी को इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहना होगा।