किसानों के हित में सरकार की प्राथमिकता
Shivraj Singh Chouhan on FTA Agreement 2026: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को लोकसभा में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर बातचीत करने से पहले भारतीय कृषि, संबद्ध क्षेत्रों और किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा करती है। उन्होंने यह भी बताया कि इसमें छोटे और सीमांत किसानों का विशेष ध्यान रखा जाता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर चर्चा चल रही है।
लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में चौहान ने कहा कि भारत कृषि उत्पादों का शुद्ध निर्यातक देश है। सरकार एफटीए पर बातचीत करने से पहले भारतीय कृषि, संबद्ध क्षेत्रों और छोटे-सीमांत किसानों के हितों की सावधानीपूर्वक रक्षा करती है। उन्होंने बताया कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय बनाए जाते हैं।
कांग्रेस सांसद ने उठाई थी चिंता
कृषि मंत्री का यह जवाब कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन के सवाल पर आया था। उन्नीथन ने पूछा था कि क्या सरकार ने किसान संगठनों की इन चिंताओं का आकलन किया है कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते, खासकर अमेरिका के साथ, भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने केरल के कासरगोड जैसे क्षेत्रों में छोटे और सीमांत किसानों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करने की आशंका जताई थी।
हालांकि चौहान ने अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि भारत ने प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी ऊर्जा, कृषि उत्पाद, कोयला और अन्य वस्तुएं खरीदने पर सहमति जताई है।
किसानों के साथ लगातार संवाद
किसानों को दिए गए आश्वासनों की पूर्ति न होने के सवाल पर चौहान ने कहा कि सरकार किसानों से जुड़े मुद्दों को सक्रिय रूप से और शीघ्रता से संबोधित करती है ताकि उनकी सामाजिक-आर्थिक भलाई सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि 2021 में तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद, सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के स्तर पर दो चरणों में सात दौर की चर्चा की है।
पहली चर्चा 8 फरवरी 2024 को हुई थी। इसके बाद 12, 15 और 18 फरवरी 2024 को, फिर 14 और 22 फरवरी 2025 को तथा 19 मार्च 2025 को चर्चा हुई। चौहान ने कहा कि लगातार संवाद के जरिए ज्यादातर मुद्दे, जैसे बिजली संशोधन विधेयक से जुड़े मुद्दे, मिर्च, हल्दी और अन्य मसालों के लिए राष्ट्रीय आयोग की स्थापना, पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी समुदायों के पानी, जंगल और जमीन पर अधिकार, नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के निर्माण के लिए कड़ी सजा, और धान की पराली जलाने से संबंधित दंडात्मक प्रावधानों को तर्कसंगत बनाना आदि का समाधान किया गया है।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौता
अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रॉलिन्स ने कहा कि यह समझौता भारतीय बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों की पहुंच बढ़ाएगा और भारत के साथ अमेरिका के कृषि व्यापार घाटे को कम करने में मदद करेगा। 2024 में यह घाटा 1.3 अरब डॉलर था। इस समझौते के तहत भारत ऊर्जा, कृषि उत्पाद, कोयला और अन्य वस्तुओं की बड़ी मात्रा में खरीद करेगा।
भारत की कृषि निर्यात स्थिति
कृषि मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत कृषि उत्पादों का शुद्ध निर्यातक है। यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है जो यह दर्शाता है कि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत है और देश विदेशी बाजारों में अपने कृषि उत्पादों की आपूर्ति करता है। इसलिए किसी भी व्यापार समझौते में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करना और भी जरूरी हो जाता है।
संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा
Shivraj Singh Chouhan on FTA Agreement 2026: सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को किसी भी तरह के अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाया जाए। इसके लिए व्यापार समझौतों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल किए जाते हैं। यह कदम विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जो देश की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
किसान संगठनों की चिंताएं
किसान संगठनों ने समय-समय पर यह चिंता जताई है कि विदेशी देशों के साथ व्यापार समझौतों से भारतीय कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। केरल जैसे राज्यों में जहां डेयरी उद्योग महत्वपूर्ण है, वहां विदेशी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा से स्थानीय उत्पादकों को नुकसान हो सकता है।
सरकार का संतुलित दृष्टिकोण
कृषि मंत्री के बयान से यह स्पष्ट होता है कि सरकार एक संतुलित दृष्टिकोण अपना रही है। एक तरफ देश के आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना जरूरी है, तो दूसरी तरफ घरेलू कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सरकार इन दोनों उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
इस पूरे मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार किस तरह से किसानों के हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाती है। किसान संगठनों के साथ निरंतर संवाद और उनकी चिंताओं को दूर करने के प्रयास सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।