Petrol Diesel Price Today: देश में आम बजट पेश होने में अब कुछ ही घंटे बाकी हैं और ऐसे समय में आम आदमी की नजरें एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर टिकी हुई हैं। हर बार की तरह इस बार भी लोगों को उम्मीद है कि बजट के जरिए महंगे ईंधन से राहत मिलेगी, लेकिन 31 जनवरी 2026 को भी हालात जस के तस बने हुए हैं। देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर स्थिर हैं, जो भले ही रोजाना न बढ़ रही हों, लेकिन पहले से ही आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं।
ग्लोबल स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोर स्थिति ने बाजार में असमंजस की स्थिति बना दी है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देश पर पड़ रहा है। नतीजतन, पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने के बजाय लंबे समय से ऊंचे बने हुए हैं।
31 जनवरी को भी ऊंचे बने ईंधन के भाव
31 जनवरी 2026 को सुबह 6 बजे तेल कंपनियों द्वारा जारी किए गए ताजा रेट्स के अनुसार, देश के ज्यादातर महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि यह स्थिरता राहत देने वाली नहीं है, क्योंकि दरें पहले से ही रिकॉर्ड स्तर के आसपास बनी हुई हैं।
नई दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल 104.21 रुपये और डीजल 92.15 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर है। हैदराबाद, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहरों में भी ईंधन के दाम 100 रुपये के पार बने हुए हैं।
महंगे ईंधन का सीधा असर आम जीवन पर
पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों का असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा प्रभाव रसोई के खर्च, सब्जियों के दाम, दूध और अन्य जरूरी सामानों पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से हर चीज की लागत बढ़ जाती है, जिसका बोझ अंततः आम उपभोक्ता को ही उठाना पड़ता है। मध्यम वर्ग और कम आय वर्ग के लिए यह स्थिति खास तौर पर परेशान करने वाली है।
बजट 2026 से क्यों हैं उम्मीदें
फरवरी 2026 में पेश होने वाले आम बजट से लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं। खासकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर और मध्यम वर्ग की निगाहें सरकार के फैसलों पर टिकी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कटौती करती है, तभी कीमतों में वास्तविक राहत संभव है। फिलहाल टैक्स का बड़ा हिस्सा कीमतों में जुड़ा हुआ है, जिससे तेल कंपनियों के हाथ भी बंधे हुए हैं।
सरकार और तेल कंपनियों की मजबूरी
तेल कंपनियां कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी सी तेजी भी सीधे घरेलू कीमतों पर असर डालती है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति कमजोर होने पर आयात और महंगा हो जाता है। ऐसे में तेल कंपनियां कीमतें घटाने से बचती हैं। सरकार के लिए भी टैक्स घटाना आसान फैसला नहीं होता, क्योंकि इससे राजस्व पर असर पड़ता है।
शहरों में अलग-अलग दाम क्यों
अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि एक ही देश में पेट्रोल और डीजल के दाम हर शहर में अलग-अलग क्यों होते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट है। इसके अलावा केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, माल ढुलाई का खर्च और डीलर कमीशन मिलकर अंतिम कीमत तय करते हैं। यही कारण है कि दिल्ली के मुकाबले मुंबई, हैदराबाद या पटना में पेट्रोल-डीजल ज्यादा महंगा नजर आता है।
आम आदमी की बढ़ती चिंता
महंगे पेट्रोल-डीजल के बीच आम आदमी बजट से राहत की आस लगाए बैठा है। लोगों को उम्मीद है कि सरकार कोई ऐसा कदम उठाएगी, जिससे रोजमर्रा के खर्च में थोड़ी राहत मिल सके। हालांकि बजट से पहले संकेत यही हैं कि जब तक टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव नहीं होता, तब तक ईंधन की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद करना मुश्किल है।