Silver Price Today: जनवरी 2026 में चांदी ने जिस तरह की ऐतिहासिक तेजी दिखाई थी, उसने निवेशकों को चौंका दिया था। लेकिन फरवरी आते-आते तस्वीर बदल गई है। अब बाजार में नरमी है और कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा रही है। 18 फरवरी 2026 की सुबह दिल्ली में चांदी 260 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रही है, जो पिछले दिन से 8 रुपये कम है।
आज के प्रमुख रेट
दिल्ली में 1 ग्राम चांदी 260 रुपये पर है। 10 ग्राम की कीमत 2,600 रुपये और 1 किलोग्राम की कीमत 2,60,000 रुपये दर्ज की गई है। बीते दिन की तुलना में 1 किलोग्राम पर 8,000 रुपये की गिरावट आई है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी चांदी के वायदा भाव 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास हैं। यह गिरावट सोने की तुलना में ज्यादा तेज है, जो बताती है कि चांदी में उतार-चढ़ाव अधिक रहता है क्योंकि यह निवेश के साथ-साथ औद्योगिक धातु भी है।
रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे की ओर
11 फरवरी को दिल्ली में चांदी 290 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गई थी। वहां से अब तक करीब 30 रुपये प्रति ग्राम की गिरावट आई है, यानी लगभग 10 प्रतिशत की साप्ताहिक कमी।
जनवरी के अंत में वायदा बाजार में चांदी 4,10,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। मौजूदा स्तर उस उच्चतम बिंदु से काफी नीचे है। हालांकि साल की शुरुआत से अब तक देखें तो चांदी अब भी करीब 10 प्रतिशत ऊपर है।
दिल्ली में मांग का आधार
राजधानी में बड़ी आबादी के कारण चांदी के बर्तन, सिक्के और छोटे निवेश की मांग बनी रहती है। कीमतों में गिरावट से खुदरा खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ी है।
मुंबई में हल्का प्रीमियम
मुंबई में 1 ग्राम चांदी 262 रुपये पर है, जो दिल्ली से थोड़ा अधिक है। बंदरगाह और आभूषण व्यापार के कारण यहां हल्का प्रीमियम देखने को मिलता है।
कोलकाता में स्थिर रुख
कोलकाता में 1 ग्राम चांदी 261 रुपये पर दर्ज की गई है। पूर्वी भारत में विवाह सीजन की तैयारी के कारण मांग स्थिर बनी हुई है।
बेंगलुरु में औद्योगिक सहारा
बेंगलुरु में 1 ग्राम चांदी 259 रुपये पर है। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उद्योगों में चांदी का उपयोग होने से मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है।
चेन्नई में धार्मिक और आभूषण मांग
चेन्नई में 1 ग्राम चांदी 260 रुपये पर है। दक्षिण भारत में मंदिरों और पारंपरिक आभूषणों की मांग कीमतों को संतुलित बनाए रखती है।
गिरावट के पीछे क्या कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि जनवरी में 47 प्रतिशत की तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक थी। फरवरी में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट इसी का परिणाम है।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत घोषणाओं और वैश्विक बाजार में ठंडे पड़ते कमोडिटी रुझान का भी असर पड़ा है। छुट्टियों के बाद मांग में कमी और निवेशकों का सतर्क रुख भी कारणों में शामिल है।
आगे क्या हो सकता है
चांदी की प्रकृति सोने से अलग है। यह सुरक्षित निवेश के साथ-साथ औद्योगिक धातु भी है, इसलिए इसकी कीमतें अधिक अस्थिर रहती हैं। यदि वैश्विक औद्योगिक मांग मजबूत होती है तो कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है।
छोटे निवेशकों को एकमुश्त बड़ी खरीद के बजाय चरणबद्ध निवेश पर विचार करना चाहिए। गिरावट अवसर जरूर है, लेकिन बाजार अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है।
चांदी का इतिहास बताता है कि यह धैर्य रखने वालों को निराश नहीं करती, लेकिन जल्दबाजी करने वालों को सबक जरूर सिखाती है। ऐसे में समझदारी, संतुलन और सही समय की पहचान ही सफलता की कुंजी है।
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