Stock Market Crash: आज गुरुवार का कारोबारी दिन निवेशकों के लिए झटके भरा साबित हुआ। सुबह बाजार ने हरे निशान के साथ उम्मीद जगाई, लेकिन कुछ ही देर में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। जो सेंसेक्स तेजी के साथ खुला था, वही अचानक 900 अंकों तक लुढ़क गया। निफ्टी भी 250 अंक तक फिसल गया। इस गिरावट ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि शेयर बाजार में भरोसा जितनी जल्दी बनता है, उतनी ही तेजी से टूट भी सकता है।
शुरुआती कारोबार में माहौल सकारात्मक था। निवेशकों को लगा कि पिछले कुछ दिनों की तेजी आगे भी जारी रहेगी। लेकिन अचानक आई गिरावट ने छोटे और मझोले निवेशकों को बेचैन कर दिया। कई लोगों के पोर्टफोलियो में एक ही दिन में बड़ी गिरावट दर्ज हुई।
अचानक आई गिरावट से हिला बाजार
बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 83,734 की तुलना में 83,969 के स्तर पर खुला। कुछ समय तक यह हरे निशान में रहा, लेकिन जल्द ही बिकवाली का दबाव बढ़ गया। खबर लिखे जाने तक यह करीब 913 अंक गिरकर 82,821 के आसपास कारोबार कर रहा था।
एनएसई का निफ्टी भी इसी राह पर चला। 25,819 के पिछले बंद के मुकाबले 25,873 पर खुला निफ्टी थोड़ी ही देर में 250 अंक टूटकर 25,567 तक आ गया।
इस गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण साफ तौर पर नजर आए।
पहला कारण: मुनाफावसूली का दबाव
पिछले तीन कारोबारी दिनों से बाजार में लगातार तेजी थी। कई शेयरों में अच्छा उछाल देखने को मिला था। ऐसे में बड़े निवेशकों ने मौके का फायदा उठाते हुए मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया।
जब बड़े स्तर पर बिकवाली शुरू होती है, तो बाजार पर दबाव बढ़ना तय है। यही हुआ। शुरुआत में मामूली गिरावट दिखी, लेकिन धीरे-धीरे यह तेज गिरावट में बदल गई।
तेजी के बाद मुनाफावसूली सामान्य बात है, लेकिन जिस रफ्तार से गिरावट आई, उसने घबराहट जरूर बढ़ाई।
दूसरा कारण: आईटी शेयरों पर विदेशी बिकवाली
इस गिरावट में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में दिखा। विदेशी निवेशकों ने इस महीने के पहले 15 दिनों में आईटी शेयरों में बड़ी बिकवाली की। आंकड़ों के अनुसार करीब 10,956 करोड़ रुपये के आईटी शेयर बेचे गए।
आईटी कंपनियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबल डिमांड को लेकर भी चिंता बनी हुई है। विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में करीब 16 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।
जब विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करते हैं, तो बाजार का भरोसा कमजोर होता है। इसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर पड़ा।
तीसरा कारण: अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल के दाम
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव भी बाजार की गिरावट का बड़ा कारण बना। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत में गुरुवार को 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई और यह 71 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। तेल की कीमत बढ़ने का मतलब है कि भारत जैसे आयात पर निर्भर देश की लागत बढ़ेगी। इससे महंगाई और व्यापार घाटे की चिंता बढ़ती है।
जब तेल महंगा होता है, तो निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है और वे सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। इसका असर शेयर बाजार पर साफ दिखा।
छोटे निवेशकों के लिए सबक
आज की गिरावट ने यह साफ कर दिया कि बाजार में केवल तेजी देखकर निवेश करना समझदारी नहीं है। बाजार हमेशा सीधी रेखा में नहीं चलता।
मेरी समझ से छोटे निवेशकों को घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है। अगर निवेश लंबी अवधि के लिए किया गया है और कंपनी की बुनियाद मजबूत है, तो हर गिरावट संकट नहीं होती।
अब सबकी नजर आने वाले कारोबारी सत्रों पर होगी। क्या यह गिरावट कुछ दिनों तक जारी रहेगी या फिर बाजार संभल जाएगा, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा।