भारतीय सिनेमा में हर साल ऐसी कई फिल्में आती हैं जो बड़े बजट और बड़े सितारों के साथ परदे पर उतरती हैं। लेकिन कभी-कभी कुछ छोटी फिल्में ऐसा धमाल मचा देती हैं कि बड़ी फिल्में भी पीछे रह जाती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है एक गुजराती फिल्म के साथ जिसका नाम है लालो: कृष्ण सदा सहायते। यह फिल्म सिर्फ 50 लाख रुपये के बजट में बनी और बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की कमाई कर चुकी है।
इस फिल्म की खासियत यह है कि इसे किसी बड़े सितारे या भारी प्रचार की जरूरत नहीं पड़ी। दर्शकों ने अपने प्यार से इसे ब्लॉकबस्टर बना दिया। अब पब्लिक की मांग पर यह फिल्म हिंदी भाषा में भी रिलीज होने जा रही है। 9 जनवरी 2025 को यह फिल्म हिंदी दर्शकों के लिए सिनेमाघरों में आएगी।
फिल्म ने कैसे बनाया रिकॉर्ड
लालो: कृष्ण सदा सहायते 10 अक्तूबर 2025 को गुजराती भाषा में रिलीज हुई थी। फिल्म को रिलीज हुए करीब 90 दिन हो चुके हैं लेकिन आज भी सिनेमाघरों में इसके टिकट बिक रहे हैं। यह बात साबित करती है कि दर्शकों ने इस फिल्म को दिल से अपनाया है। फिल्म को आईएमडीबी पर 8.6 की शानदार रेटिंग मिली है जो किसी भी फिल्म के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
जब बॉलीवुड में बड़ी-बड़ी फिल्में जैसे सैयारा और धुरंधर अपनी चर्चा बटोर रही थीं, तब यह छोटी सी गुजराती फिल्म चुपचाप बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रही थी। हिंदी दर्शकों को इसकी भनक तक नहीं लगी कि एक रीजनल फिल्म इतनी बड़ी कामयाबी हासिल कर रही है।
क्या है फिल्म की कहानी
लालो: कृष्ण सदा सहायते एक साधारण रिक्शा चालक लालो की कहानी है। यह फिल्म आस्था, विश्वास और भक्ति पर आधारित है। कहानी में लालो एक मेहनती इंसान है जो पर्यटकों को घुमाने का काम करता है। एक दिन वह अपने ग्राहकों को घुमाते हुए एक फार्महाउस में फंस जाता है।
वहां से निकलने की बहुत कोशिश करने के बाद भी वह बाहर नहीं निकल पाता। खाने-पीने की कमी हो जाती है और हालात बहुत मुश्किल हो जाते हैं। इस बीच उसके घर वाले बेहद परेशान हो जाते हैं और पुलिस के पास जाते हैं। पुलिस लालो को ढूंढने की कोशिश करती है लेकिन उसका कोई पता नहीं चलता।
इस मुश्किल घड़ी में लालो भगवान कृष्ण से प्रार्थना करता है। वह कहता है कि उसका कोई दोस्त नहीं है और उसे मदद की जरूरत है। तभी उसे भगवान कृष्ण का विजन मिलता है और उनकी रहनुमाई उसे सही रास्ता दिखाती है। इसके बाद लालो की पूरी जिंदगी बदल जाती है।
कांतारा और 12वीं फेल से तुलना
फिल्म को लेकर कई लोग इसकी तुलना कांतारा और 12वीं फेल जैसी सफल फिल्मों से कर रहे हैं। कांतारा की तरह इसमें भी दैवीय शक्ति और आस्था का तत्व है। वहीं 12वीं फेल की तरह यह भी एक आम आदमी के संघर्ष की कहानी बयान करती है।
हालांकि कांतारा से अलग यह फिल्म बेहद सौम्य और सरल है। इसमें कोई डरावने दृश्य या तनाव भरे क्षण नहीं हैं। यह एक ऐसी फिल्म है जिसे पूरा परिवार मिलकर देख सकता है। अगर आप साफ-सुथरा मनोरंजन चाहते हैं तो यह फिल्म आपके लिए बेहतरीन विकल्प है।
फिल्म की खास बातें
लालो: कृष्ण सदा सहायते की सबसे बड़ी खासियत है इसकी सादगी। फिल्म में कोई बड़ा तामझाम नहीं है। विजुअल्स बहुत साधारण हैं लेकिन बैकग्राउंड म्यूजिक ने फिल्म में जान डाल दी है। संगीत ने कहानी को और भी प्रभावशाली बना दिया है।
फिल्म की शूटिंग स्थानीय जगहों पर बेहद गोपनीय तरीके से की गई थी। फिल्म के मुख्य कलाकार करण जोशी ने बताया कि जहां शूटिंग हो रही थी, वहां के लोगों को यह नहीं बताया गया था कि यह फिल्म की शूटिंग है। जूनागढ़ के स्थानीय लोगों को कहा गया था कि यह एक प्री-वेडिंग शूट है।
करण ने यह भी बताया कि निर्माता नहीं चाहते थे कि फिल्म से कोई नकारात्मक माहौल जुड़े। इसलिए बहुत शांति से छोटे कैमरे के साथ पूरी फिल्म शूट की गई। यह तरीका काफी अलग और प्रभावी साबित हुआ।
बॉक्स ऑफिस पर धमाल
50 लाख रुपये के बजट में बनी यह फिल्म विश्वभर में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा चुकी है। यह आंकड़ा किसी भी छोटे बजट की फिल्म के लिए बहुत बड़ा है। फिल्म ने साबित कर दिया कि अच्छी कहानी और सच्ची भावनाएं दर्शकों तक पहुंचती हैं।
गुजराती सिनेमा में यह एक मील का पत्थर है। इससे पहले शायद ही किसी गुजराती फिल्म ने इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की हो। फिल्म की सफलता ने साबित किया कि क्षेत्रीय सिनेमा में भी बहुत दम है।
अब हिंदी में होगी रिलीज
फिल्म की जबरदस्त सफलता देखते हुए निर्माताओं ने इसे हिंदी में भी रिलीज करने का फैसला किया है। यह फैसला दर्शकों की मांग पर लिया गया है। बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर फिल्म को हिंदी में देखने की इच्छा जताई थी।
9 जनवरी को जब यह फिल्म हिंदी में रिलीज होगी तो उत्तर भारत के दर्शक भी इसे देख सकेंगे। उम्मीद है कि हिंदी भाषी दर्शक भी इस फिल्म को उतना ही प्यार देंगे जितना गुजराती दर्शकों ने दिया है।
फिल्म की जानकारी
फिल्म का नाम लालो: कृष्ण सदा सहायते है। यह एक गुजराती ड्रामा और भक्ति पर आधारित फिल्म है। फिल्म की अवधि 2 घंटे 15 मिनट है। इसे अंकित सखिया ने निर्देशित किया है।
फिल्म में कोई बड़े सितारे नहीं हैं बल्कि स्थानीय कलाकारों ने अभिनय किया है। लेकिन सभी ने अपने किरदार इतनी खूबसूरती से निभाए हैं कि दर्शक भावुक हो गए। यही इस फिल्म की ताकत है।
लालो: कृष्ण सदा सहायते एक ऐसी फिल्म है जो साबित करती है कि सिनेमा के लिए बड़े बजट या बड़े सितारों की जरूरत नहीं होती। अगर कहानी दिल को छू जाए तो दर्शक अपने आप सिनेमाघरों में पहुंच जाते हैं। यह फिल्म हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो सपने देखता है और मेहनत करता है।