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बॉलीवुड की चमक छोड़ दुबई में ऐसा काम कर रही है ये एक्ट्रेस, जान आपके भी उड़ जायेंगे होश

बॉलीवुड की चमक छोड़ दुबई में ऐसा काम कर रही है ये एक्ट्रेस, जान आपके भी उड़ जायेंगे होश
रिमी सेन

रिमी सेन ने शुरुआती 2000 के दशक में बॉलीवुड पर राज किया, लेकिन एक जैसे किरदारों से ऊबकर उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। आज वह दुबई में रियल एस्टेट की दुनिया में सफल और संतुलित जीवन जी रही हैं, जहां पहचान मेहनत से बनती है, शोहरत से नहीं।

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Dipali Kumari
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Rimi Sen: हर दौर की बॉलीवुड इंडस्ट्री में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो अचानक हर फिल्म में दिखने लगते हैं और फिर उतनी ही खामोशी से परदे से गायब हो जाते हैं। शुरुआती 2000 के दशक में अगर आपने हिंदी फिल्में देखी हों, तो रिमी सेन से बच पाना नामुमकिन था। कभी ‘धूम’ में बाइक चोरों की दुनिया में उलझी स्वीटी, तो कभी ‘हंगामा’ और ‘गोलमाल’ में मासूम लेकिन चुलबुली लड़की—रिमी सेन एक समय बड़े पर्दे की पहचान बन चुकी थीं।

लेकिन आज वही सवाल बार-बार पूछा जाता है—धूम वाली लड़की अब कहां है? जवाब थोड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि रिमी सेन ने मुंबई की चकाचौंध छोड़कर दुबई की रियल एस्टेट की दुनिया में अपनी नई कहानी लिख ली है।

रिमी सेन: शोहरत से पहले की साधारण शुरुआत

रिमी सेन का असली नाम शुभमित्रा सेन है। उनका जन्म 1981 में कोलकाता में हुआ। वह किसी फिल्मी परिवार से नहीं आती थीं, लेकिन अभिनय का सपना बचपन से ही उनकी आंखों में था। बहुत कम उम्र में उन्होंने बंगाली फिल्म ‘दामू’ (1996) में काम किया और यहीं से उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा हुआ।

मुंबई आने का फैसला आसान नहीं था। उनके साथ न कोई गॉडफादर था, न कोई बड़ा नाम। लेकिन उनके दादा ने उनका हौसला बढ़ाया और रिमी ने विज्ञापन फिल्मों से अपने करियर की नींव रखी। आमिर खान के साथ किया गया एक सॉफ्ट ड्रिंक विज्ञापन उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसने उन्हें बॉलीवुड के दरवाज़े तक पहुंचा दिया।

हंगामा से धूम तक: जब हर फिल्म में दिखती थीं रिमी

2003 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘हंगामा’ से रिमी सेन ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। अक्षय खन्ना और परेश रावल जैसे कलाकारों के बीच भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। इसके ठीक एक साल बाद आई ‘धूम’, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया।

‘धूम’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक ट्रेंड थी। रिमी की सादगी, उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और कहानी में उनकी भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। इसके बाद ‘बागबान’, ‘गरम मसाला’, ‘फिर हेरा फेरी’, ‘गोलमाल: फन अनलिमिटेड’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर को मजबूत किया। उस दौर में वह कॉमेडी फिल्मों की भरोसेमंद अभिनेत्री मानी जाने लगी थीं।

जब चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी

2008 के बाद हालात बदलने लगे। ‘दे ताली’, ‘संकट सिटी’ और ‘थैंक यू’ जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल सकीं। अच्छे रोल कम होने लगे और रिमी को बार-बार एक ही तरह के किरदार ऑफर किए जाने लगे।

2011 में आई फिल्म ‘शागिर्द’ के बाद उन्होंने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली। यह दूरी अचानक नहीं थी, बल्कि सोच-समझकर लिया गया फैसला था।

क्यों छोड़ा बॉलीवुड? रिमी सेन की साफ़ राय

2021 में दिए एक इंटरव्यू में रिमी सेन ने अपने फैसले को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अभिनय ने उन्हें पैसा, पहचान और सम्मान दिया, लेकिन एक समय के बाद वह खुद को दोहराते हुए थक गई थीं।

उनका कहना था कि फिल्मों में सिर्फ ग्लैमर का हिस्सा बनकर रह जाना उन्हें मंज़ूर नहीं था। वह ऐसे रोल नहीं करना चाहती थीं, जिनमें हीरो के पीछे खड़े होकर सिर्फ सजावट बनना पड़े। उन्हें उन फिल्मों पर गर्व है, जिनमें उन्होंने अलग तरह के किरदार निभाए, भले ही वे बॉक्स ऑफिस पर सफल न रही हों।

रियलिटी शो और प्रोडक्शन की कोशिश

बॉलीवुड से दूरी के बाद रिमी सेन ने टीवी का रुख किया। ‘बिग बॉस 9’ में उनकी एंट्री ने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया। उन्होंने ‘झलक दिखला जा’ जैसे शो में भी किस्मत आज़माई।

इसके अलावा उन्होंने निर्माता के तौर पर भी कदम रखा और फिल्म ‘बुधिया सिंह – बॉर्न टू रन’ को प्रोड्यूस किया। यहां उन्होंने अपने असली नाम शुभमित्रा सेन का इस्तेमाल किया, जो उनके लिए एक नई पहचान जैसा था।

दुबई में नई शुरुआत, नई पहचान

आखिरकार रिमी सेन ने पूरी तरह नई ज़िंदगी चुनने का फैसला किया। वह दुबई चली गईं और रियल एस्टेट सेक्टर में काम शुरू किया। यह बदलाव जितना बड़ा था, उतना ही सुकून देने वाला भी।

रिमी के मुताबिक, दुबई की प्रोफेशनल लाइफ उन्हें अनुशासन, सम्मान और स्थिरता देती है। यहां न तो लाइमलाइट का दबाव है और न ही हर दिन खुद को साबित करने की होड़। वह अब एक शांत, संतुलित और आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।

क्या रिमी सेन की बॉलीवुड में वापसी होगी?

यह सवाल आज भी उनके फैंस के मन में है। रिमी ने साफ किया है कि अगर वह कभी वापसी करेंगी, तो सिर्फ ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए, जिन पर उन्हें गर्व हो। वह किसी भी कीमत पर सिर्फ दिखने भर के किरदार नहीं निभाना चाहतीं।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।