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विजय की फिल्म जन नायगन के लिए बुकमाईशो पर 10 लाख से ज्यादा दर्शकों ने दिखाई दिलचस्पी, मद्रास हाई कोर्ट में सुनवाई का इंतजार

विजय की फिल्म जन नायगन के लिए बुकमाईशो पर 10 लाख से ज्यादा दर्शकों ने दिखाई दिलचस्पी, मद्रास हाई कोर्ट में सुनवाई का इंतजार
Jana Nayagan BookMyShow Interest: विजय की फिल्म के लिए 10 लाख से ज्यादा दर्शकों ने जताई दिलचस्पी, कोर्ट में अटकी रिलीज (Image Source: IMDB)

तमिल अभिनेता विजय की आखिरी फिल्म जन नायगन ने बुकमाईशो पर 10 लाख से ज्यादा interests के साथ रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि CBFC से सर्टिफिकेट ना मिलने से फिल्म की रिलीज अटकी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्माताओं की याचिका खारिज कर दी। अब 20 जनवरी को मद्रास हाई कोर्ट में सुनवाई होगी, जिससे फिल्म की किस्मत का फैसला होगा।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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तमिल सिनेमा के मशहूर अभिनेता विजय की आने वाली फिल्म जन नायगन को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। हालांकि फिल्म की रिलीज को लेकर कानूनी अड़चनें बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। बुकमाईशो पर इस फिल्म के लिए 10 लाख से ज्यादा लोगों ने अपनी दिलचस्पी जाहिर की है, जो किसी भी फिल्म के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

यह फिल्म विजय के सिनेमा करियर की आखिरी फिल्म मानी जा रही है, क्योंकि इसके बाद वे पूरी तरह से राजनीति में आने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम यानी TVK की शुरुआत भी कर दी है। ऐसे में उनके फैंस इस फिल्म को लेकर और भी ज्यादा उत्सुक हैं।

बुकमाईशो पर दर्शकों की भारी दिलचस्पी

BookMyShow के आंकड़ों के मुताबिक, 10 लाख से ज्यादा यूजर्स ने जन नायगन फिल्म के पेज पर जाकर ‘I’m interested’ यानी ‘मुझे दिलचस्पी है’ के विकल्प पर क्लिक किया है। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और इससे साफ जाहिर होता है कि दर्शक इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

यह आंकड़ा उस समय और भी खास हो जाता है जब फिल्म को अभी तक सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन यानी CBFC से मंजूरी नहीं मिली है। फिल्म की रिलीज डेट भी अभी तक तय नहीं हो पाई है। लेकिन इन सब के बीच भी दर्शकों का जोश और उत्साह कम नहीं हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता और उनके राजनीति में आने के फैसले ने इस फिल्म को और भी ज्यादा चर्चा में ला दिया है। लोग इस फिल्म को सिर्फ मनोरंजन के रूप में नहीं, बल्कि विजय के सिनेमाई सफर की आखिरी यादगार के रूप में भी देख रहे हैं।

CBFC से सर्टिफिकेट नहीं मिलना बड़ी समस्या

जन नायगन फिल्म को शुरुआत में 9 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना थी। लेकिन रिलीज से कुछ दिन पहले ही यह खबर आई कि CBFC ने फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं दिया है। बोर्ड ने फिल्म को एक रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया है, जिसके बाद से फिल्म की रिलीज अटकी हुई है।

CBFC का काम फिल्मों को देखकर उन्हें सर्टिफिकेट देना है, जिसके बाद ही कोई फिल्म सिनेमाघरों में दिखाई जा सकती है। लेकिन जब बोर्ड को लगता है कि फिल्म में कुछ विवादास्पद चीजें हैं, तो वह उसे रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज देता है। यह कमेटी फिल्म की दोबारा जांच करती है और फिर फैसला लेती है कि फिल्म को सर्टिफिकेट दिया जाए या नहीं।

अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि CBFC ने फिल्म में कौन सी बातों को विवादास्पद माना है। फिल्म निर्माताओं ने भी इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज

फिल्म के निर्माताओं ने KVN Productions LLP के नाम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने मांग की थी कि फिल्म को तुरंत सर्टिफिकेट दिया जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते इस याचिका को खारिज कर दिया।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने निर्माताओं की जल्दबाजी पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि निर्माता “बहुत तेज रफ्तार” में काम कर रहे हैं, जबकि यह मामला पहले से ही मद्रास हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में सुनवाई के लिए तय है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जब मामला पहले से ही हाई कोर्ट में है, तो उसे वहीं निपटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया और निर्माताओं को हाई कोर्ट का फैसला इंतजार करने के लिए कहा।

मद्रास हाई कोर्ट में 20 जनवरी को सुनवाई

अब सारी नजरें 20 जनवरी को होने वाली मद्रास हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई हैं। इस दिन हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी और फैसला देगी कि फिल्म को सर्टिफिकेट मिलना चाहिए या नहीं।

इससे पहले, मद्रास हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने CBFC को निर्देश दिया था कि वह बिना देरी के फिल्म को सर्टिफिकेट दे। लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने इस आदेश पर रोक लगा दी। अब डिवीजन बेंच ही इस मामले पर अंतिम फैसला लेगी।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हाई कोर्ट फिल्म के पक्ष में फैसला देती है, तो फिल्म जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है। लेकिन अगर कोर्ट CBFC के पक्ष में फैसला देती है, तो फिल्म की रिलीज और देरी से हो सकती है या फिर निर्माताओं को फिल्म में कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं।

विजय की राजनीति में एंट्री और फिल्म का महत्व

जन नायगन फिल्म विजय के लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह उनके सिनेमाई करियर की आखिरी पारी है। विजय ने पहले ही घोषणा कर दी है कि इस फिल्म के बाद वे पूरी तरह से राजनीति में आ जाएंगे।

उन्होंने तमिलगा वेट्री कड़गम नाम की अपनी पार्टी बनाई है। तमिलनाडु की राजनीति में उनकी एंट्री को लेकर काफी चर्चा हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता उन्हें राजनीति में भी फायदा पहुंचा सकती है।

ऐसे में यह फिल्म विजय के फैंस के लिए बहुत खास हो जाती है। यह उनके सिनेमाई सफर की आखिरी यादगार है। इसलिए फैंस इस फिल्म को किसी भी हाल में देखना चाहते हैं।

विजय ने तमिल सिनेमा में तीन दशक से ज्यादा का करियर बनाया है। उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दी हैं और लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई है। उनकी फिल्में सिर्फ तमिलनाडु में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विदेशों में भी लोकप्रिय हैं।

जन नायगन फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण इसकी रिलीज अटकी हुई है। 20 जनवरी को मद्रास हाई कोर्ट की सुनवाई से फिल्म की किस्मत का फैसला होगा। विजय के फैंस को उम्मीद है कि कोर्ट फिल्म के पक्ष में फैसला देगी और जल्द ही वे अपने पसंदीदा स्टार को पर्दे पर देख सकेंगे। फिलहाल, सबकी नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हुई हैं।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।