X Grok AI India: सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में बीते कुछ सालों से एक बहस लगातार गहराती जा रही है—क्या तकनीक को पूरी आज़ादी दी जाए या उस पर कानून की लगाम जरूरी है। एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और उसके एआई चैटबॉट ग्रोक से जुड़ा ताज़ा विवाद इसी बहस का नया अध्याय बनकर सामने आया है।
हाल के दिनों में ग्रोक एआई पर यह आरोप लगा कि वह यूजर्स के निर्देश पर न्यूड और सेक्शुअली आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार कर रहा है। यह मामला सामने आते ही दुनिया भर में आलोचना शुरू हो गई। सवाल सिर्फ नैतिकता का नहीं था, बल्कि यह भी था कि क्या एक एआई टूल बिना किसी रोक-टोक के ऐसा कंटेंट बना सकता है, जो समाज और कानून दोनों के खिलाफ हो।
भारत में एक्स का बड़ा कदम
विवाद के बढ़ते दबाव के बीच भारत में एक्स ने बड़ा एक्शन लिया। सूत्रों के मुताबिक, प्लेटफॉर्म ने 3,500 से अधिक कंटेंट को ब्लॉक किया और 600 से ज्यादा अकाउंट डिलीट किए। यह कार्रवाई भारतीय ऑनलाइन कंटेंट कानूनों के अनुपालन के तहत की गई है। एक्स ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह भारत में अपने ऑपरेशन को कानून के दायरे में रखकर ही आगे बढ़ाएगा।
अश्लील कंटेंट पर सरकार की सख्ती
भारत सरकार ने ग्रोक द्वारा बनाए जा रहे अश्लील और सेक्शुअली आपत्तिजनक कंटेंट को गंभीरता से लिया। 2 जनवरी को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक्स को एक पत्र लिखकर साफ शब्दों में कहा कि प्लेटफॉर्म सेक्सुअल कंटेंट को रोकने में नाकाम रहा है।
सरकारी अधिकारियों का रुख बेहद स्पष्ट था—देश का कानून सर्वोपरि है। तकनीक चाहे कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, उसे सामाजिक और कानूनी सीमाओं का पालन करना ही होगा।
गलती की स्वीकारोक्ति और अधूरा जवाब
सूत्रों के अनुसार, एक्स ने सरकार के सामने अपनी गलती मानी और एआई द्वारा अश्लील इमेज बनाए जाने से रोकने पर सहमति जताई। हालांकि, मंत्रालय को दिया गया कंपनी का जवाब सरकार को संतोषजनक नहीं लगा।
एक अधिकारी के मुताबिक, एक्स ने पांच दिनों बाद जो जवाब भेजा, उसमें मूल मुद्दों को संबोधित करने के बजाय अपनी यूजर पॉलिसी के पन्ने भेज दिए गए। सरकार का कहना है कि जिन सवालों और चिंताओं को पत्र में उठाया गया था, उनका सीधा और ठोस जवाब नहीं दिया गया।
ग्रोक क्यों नहीं है न्यूट्रल टूल
इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि सरकार ने ग्रोक को एक न्यूट्रल टूल मानने से इनकार कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि अब सोच बदल चुकी है। ग्रोक सिर्फ एक तकनीकी माध्यम नहीं, बल्कि एक आर्टिफिशियल कंटेंट क्रिएटर है।
जिस तरह एक इंसान कंटेंट बनाता है और उसके लिए जिम्मेदार होता है, उसी तरह एआई से बने कंटेंट की जिम्मेदारी भी प्लेटफॉर्म की ही मानी जाएगी। यह दृष्टिकोण आने वाले समय में एआई आधारित सभी प्लेटफॉर्म के लिए एक मिसाल बन सकता है।
कानूनी चेतावनी और भविष्य का संकेत
सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर एआई चैटबॉट्स ने नियमों का पालन नहीं किया, तो अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, ग्रोक का असर इसलिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि वह सीधे एक्स जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ा हुआ है, जहां कंटेंट बहुत तेजी से फैलता है।
यह साफ संकेत है कि भारत अब डिजिटल स्पेस में ढील देने के मूड में नहीं है। तकनीक को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन कानून की सीमा के भीतर।
भारत अकेला नहीं है
ग्रोक एआई को लेकर चिंता जताने वाला भारत इकलौता देश नहीं है। इंडोनेशिया ने एआई से बने पोर्नोग्राफिक कंटेंट के चलते इस चैटबॉट को सस्पेंड कर दिया है। वहीं, यूके, फ्रांस और मलेशिया जैसे देशों ने भी पहले एआई कंटेंट जनरेशन पर सवाल उठाए हैं।