विदेश की धरती पर जब भारतीय संस्कृति की सुगंध फैलती है, तो वह दृश्य अद्भुत होता है। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों स्विट्जरलैंड के ज़्यूरिख और दावोस में देखने को मिला, जहां महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का स्वागत करने के लिए प्रवासी मराठी समुदाय उमड़ पड़ा। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाग लेने के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री फडणवीस ने जब विदेशी धरती पर महाराष्ट्र राज्यगीत की धुन सुनी, तो वह पल भावुक करने वाला था।

स्वागत में परंपरा और आधुनिकता का संगम
19 जनवरी को जब मुख्यमंत्री फडणवीस ज़्यूरिख की धरती पर उतरे, तो वहां मराठी समाज ने उनका ऐसा स्वागत किया जो भारतीय संस्कृति की झलक दिखाता था। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रवासी भारतीयों ने जिस तरह से उनका अभिवादन किया, वह दर्शाता है कि विदेश में रहकर भी हमारा समाज अपनी जड़ों से कितना जुड़ा हुआ है। महाराष्ट्र राज्यगीत की गूंज ने तो माहौल को और भी भावुक बना दिया।
दावोस में भी उत्साह से भरा स्वागत
ज़्यूरिख से आगे दावोस पहुंचने पर भी यही उत्साह देखने को मिला। यहां स्विट्जरलैंड में भारत के राजदूत मृदुलकुमार ने औपचारिक स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और किंजारापू राम मोहन नायडू भी मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे और महानगरपालिका चुनावों में मिली शानदार सफलता के लिए उन्हें बधाई दी। यह जीत सिर्फ एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का प्रतीक है।

बृहन्महाराष्ट्र मंडल का विशेष आयोजन
बृहन्महाराष्ट्र मंडल द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में “स्वागत देवाभाऊ” का फलक देखकर लगा कि विदेश में बसे मराठी लोग अपने नेता से कितना जुड़ाव महसूस करते हैं। यह आयोजन केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि भावनात्मक लगाव की अभिव्यक्ति थी।
मुख्यमंत्री का संदेश: विरासत और विकास साथ-साथ
स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि महा-एनआरआई फोरम के माध्यम से देश, धर्म और भाषा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका यह कहना गौरतलब है कि सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के बिना भौतिक प्रगति अधूरी है। यह संदेश आज के समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जब विकास की अंधी दौड़ में हम अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं।
मुंबई के विकास की महत्वाकांक्षी योजना
मुख्यमंत्री ने मुंबई के विकास को लेकर बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में मुंबई को विश्व की विकसित राजधानियों से भी अधिक प्रगतिशील बनाने की ठोस योजना पर काम चल रहा है। यह महज एक वादा नहीं, बल्कि एक दृष्टिकोण है जो महाराष्ट्र को वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा।
विदेशों में मराठी समाज की साख
मुख्यमंत्री ने विदेशों में बसे मराठी समाज की मेहनत और विश्वसनीयता की भी सराहना की। यह सच है कि जहां भी मराठी समुदाय गया, उसने अपनी कर्मठता से पहचान बनाई। चाहे व्यापार हो, शिक्षा हो या फिर तकनीकी क्षेत्र, हर जगह मराठी लोगों ने अपनी छाप छोड़ी है।

वैश्विक मंच पर महाराष्ट्र की आवाज
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे वैश्विक मंच पर महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में एक बड़ी बात है। यह दौरा केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि राज्य के लिए निवेश, रोजगार और विकास के नए अवसर लेकर आ सकता है। मुख्यमंत्री की यह यात्रा महाराष्ट्र को वैश्विक निवेशकों के सामने एक आकर्षक गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर है।
निष्कर्ष
ज़्यूरिख और दावोस में मुख्यमंत्री फडणवीस का स्वागत यह दर्शाता है कि प्रवासी भारतीय समुदाय अपनी जड़ों से कितना जुड़ा हुआ है। यह यात्रा न केवल राजनीतिक बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र के विकास की जो तस्वीर मुख्यमंत्री ने खींची है, वह आशा और विश्वास से भरी है।