सोने की कीमतों में उछाल, मांग में भारी गिरावट
भारत में इस वर्ष दशहरा त्यौहार पर सोने की मांग में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। भारत बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, इस बार बिक्री का आंकड़ा मात्र 18 टन रहा, जो पिछले वर्ष की 24 टन की तुलना में 25% कम है।
IBJA के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने बताया कि “पिछले साल दशहरा बेहतर रहा था, लेकिन इस साल सोने के दाम ₹1.16 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए हैं, जिससे मांग पर असर पड़ा है।”
ऊंचे दामों के बावजूद बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी
हालांकि बिक्री मात्रा में गिरावट आई, लेकिन सोने की बिक्री मूल्य में लगभग 30-35% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका कारण है — लगातार ऊंचे दाम।
इस बार दशहरा पर सोने का भाव ₹1.16 लाख प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि पिछले साल यह ₹78,000 प्रति 10 ग्राम था। इसके अलावा ग्राहकों को 3% जीएसटी और 15-30% तक मेकिंग चार्जेस भी देने पड़ते हैं, जो डिज़ाइन की जटिलता पर निर्भर करता है।
आगामी त्योहारी सीजन के लिए प्री-बुकिंग का दौर
बावजूद इसके, ग्राहकों में सोने को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है। कई उपभोक्ता धनतेरस, दिवाली और शादी के सीजन के लिए पहले से ही प्री-बुकिंग करा रहे हैं। जानकारों के अनुसार, “लोगों को उम्मीद है कि दामों में कोई बड़ी गिरावट नहीं आने वाली, इसलिए पहले से खरीदारी कर लेना बेहतर समझा जा रहा है।”
सिक्कों और हल्के आभूषणों की बढ़ी लोकप्रियता
इस दशहरा सीजन में निवेश के लिए सोने और चांदी के सिक्कों की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली।
पीएनजी ज्वैलर्स, पुणे के प्रबंध निदेशक सौरभ गाडगिल के अनुसार, “5 ग्राम के सोने और 20 ग्राम के चांदी के सिक्कों की मांग सबसे अधिक रही। निवेशक सोने-चांदी की बार खरीदने में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। बुलियन की बिक्री स्थिर बनी हुई है, जबकि कंगन, हार और डायमंड ज्वेलरी में भी हलचल दिख रही है।”
हल्के वजन वाले गहनों की बुकिंग में तेजी
सोने के बढ़े दामों के बीच ग्राहकों ने हल्के वजन वाले गहनों को प्राथमिकता दी है। वहीं, पुराने सोने के एक्सचेंज ने बिक्री को बनाए रखा है — यह कुल खरीद का लगभग 50-55% हिस्सा रहा।
सांस्कृतिक दृष्टि से सोने का महत्व बरकरार
भारत में सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि समृद्धि, सौभाग्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है। दशहरा जैसे शुभ अवसर पर सोना खरीदना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
व्यापारियों का मानना है कि भले ही ऊंचे दामों ने सामान्य ग्राहकों की खरीदारी पर असर डाला हो, लेकिन निवेशक वर्ग ने इस अवसर को लंबे समय के निवेश के रूप में देखा है।
विशेषज्ञों की राय: आगे भी ऊंचे रहेंगे दाम
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और डॉलर की मजबूती के चलते सोने की कीमतें निकट भविष्य में घटने की संभावना कम है।
कमोडिटी विश्लेषकों का कहना है कि “वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार की जा रही गोल्ड बायिंग के चलते सोने की कीमतें स्थिर रूप से ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी।”
त्योहारी मौसम में भले ही सोने की मांग मात्रा के हिसाब से घटी हो, परंतु मूल्य के हिसाब से यह वर्ष सबसे लाभदायक रहा। निवेशकों की रुचि सिक्कों और बार की ओर बढ़ी है, जबकि पारंपरिक उपभोक्ता हल्के आभूषणों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रह सकता है।
Disclaimer:
ये खबर सिर्फ जानकारी और ज्ञान के लिए है, ये कोई निवेश सलाह नहीं है। गोल्ड या कमोडिटी मार्केट में निवेश से पहले सलाहकरो से सलाह जरूर ले।