Rashtra Bharat Logo

6 राज्यों के कुल 15 शहरों में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी, सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी से जुड़ा है मामला

6 राज्यों के कुल 15 शहरों में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी, सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी से जुड़ा है मामला
6 राज्यों के कुल 15 शहरों में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी

सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े को लेकर ईडी ने छह राज्यों के 15 शहरों में छापेमारी शुरू की है। रेलवे समेत 40 विभागों के नाम पर ठगी की जा रही थी। जांच अभी जारी है।

Updated:
·by
Dipali Kumari
Dipali Kumari
Share:

विषयसूची

ED Raid: देश में सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद लगाए लाखों युवाओं के बीच एक बार फिर भरोसे को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। गुरुवार सुबह से ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़े संगठित फर्जीवाड़े के खिलाफ देश के छह राज्यों में एकसाथ छापेमारी शुरू की है। यह कार्रवाई सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे उस स्कैम को लेकर की जा रही है, जिसमें लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र और कॉल लेटर भेजकर लाखों रुपये की ठगी की जा रही थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस गिरोह ने रेलवे सहित लगभग 40 सरकारी विभागों के नाम का दुरुपयोग किया।

सरकारी नौकरी के नाम पर चल रहा था संगठित स्कैम

ईडी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित गिरोह का काम है। यह गैंग खुद को सरकारी भर्ती एजेंसियों से जुड़ा दिखाकर लोगों को संपर्क करता था। इसके लिए बाकायदा ऐसे ईमेल अकाउंट तैयार किए गए, जो देखने में पूरी तरह सरकारी विभागों जैसे लगते थे।

इन ईमेल आईडी से उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र, कॉल लेटर और जॉइनिंग से जुड़ी जानकारी भेजी जाती थी। कई मामलों में नियुक्ति पत्रों पर फर्जी मुहर और हस्ताक्षर भी किए गए थे, जिससे आम आदमी के लिए असली और नकली के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाता था।

रेलवे और अन्य विभागों के नाम पर ठगी

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस स्कैम में भारतीय रेलवे को सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया। लोगों को आरपीएफ, टीटीई और टेक्नीशियन जैसे पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता था। रेलवे के अलावा डाक विभाग, वन विभाग, टैक्स विभाग, लोक निर्माण विभाग, हाई कोर्ट, बिहार सरकार, डीडीए और राजस्थान सचिवालय जैसे नामों का भी उपयोग किया गया।

भरोसा जीतने के लिए सैलरी भी भेजी गई

इस गिरोह का तरीका सिर्फ कागजी फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं था। लोगों का भरोसा जीतने के लिए कुछ मामलों में दो से तीन महीने तक सैलरी के नाम पर रकम भी उनके खातों में ट्रांसफर की गई। इससे पीड़ितों को लगा कि उनकी नियुक्ति असली है और वे वास्तव में सरकारी कर्मचारी बन चुके हैं।

इसके बाद उनसे अलग-अलग बहानों से मोटी रकम वसूली जाती थी। जैसे ही शक गहराने लगता, संपर्क तोड़ दिया जाता था।

छह राज्यों के पंद्रह शहरों में एकसाथ कार्रवाई

फिलहाल ईडी इस मामले में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात और केरल में छापेमारी कर रही है। इन छह राज्यों के कुल पंद्रह शहरों में एजेंसी की टीमें तैनात हैं।

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के दो स्थानों पर, प्रयागराज और लखनऊ में एक-एक जगह छापेमारी चल रही है। बिहार के मुजफ्फरपुर में एक और मोतिहारी में दो ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी इस गिरोह से जुड़े ठिकानों की जानकारी मिली है। इसके अलावा चेन्नै, राजकोट और केरल के चार शहरों में भी ईडी की रेड जारी है।

जांच के शुरुआती चरण में मामला

ईडी की ओर से फिलहाल इस कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, जांच अभी शुरुआती चरण में है और दस्तावेजों, डिजिटल डेटा तथा बैंक लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।

एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के पीछे कौन लोग हैं, पैसा कहां-कहां ट्रांसफर किया गया और इसमें कितने लोग शामिल हैं।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Dipali Kumari

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।