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मोहन भागवत का बड़ा बयान: भाजपा के अच्छे दिन आरएसएस की वजह से आए, राम मंदिर आंदोलन का मिला फायदा

मोहन भागवत का बड़ा बयान: भाजपा के अच्छे दिन आरएसएस की वजह से आए, राम मंदिर आंदोलन का मिला फायदा
Mohan Bhagwat meets former CJI Sharad Bobde: मोहन भागवत और बोबडे की मुलाकात में सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा (File Photo)

Mohan Bhagwat RSS Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भाजपा के अच्छे दिन आरएसएस की वजह से आए हैं। राम मंदिर आंदोलन में संघ की प्रतिबद्धता से भाजपा को चुनावी फायदा मिला। जेपी नड्डा के बयान के बाद यह बयान संघ कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने और भाजपा नेतृत्व को संदेश देने के लिए दिया गया।

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Asfi Shadab
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Mohan Bhagwat RSS Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में एक बड़ा बयान देते हुए भाजपा और आरएसएस के रिश्तों को लेकर अपनी बात साफ कर दी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा के जो अच्छे दिन आए हैं, वे आरएसएस की वजह से ही आए हैं। यह बयान उस समय आया है जब 2024 के आम चुनाव के दौरान तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि भाजपा आरएसएस के बिना भी चुनाव जीत सकती है। इस बयान से संघ कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल गया था और अब मोहन भागवत ने अपने बयान से स्थिति साफ कर दी है।

आरएसएस और भाजपा के बीच का रिश्ता

मोहन भागवत ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि राम मंदिर आंदोलन में आरएसएस की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि संघ ने राम मंदिर आंदोलन के लिए पूरी प्रतिबद्धता दिखाई थी और जिन्होंने इस आंदोलन का साथ दिया, उन्हें इसका फायदा मिला। यह साफ संकेत था कि राम मंदिर आंदोलन में संघ के नेतृत्व का सीधा असर भाजपा की चुनावी सफलता पर पड़ा है। इस तरह उन्होंने यह बता दिया कि भाजपा की राजनीतिक सफलता में आरएसएस का बड़ा योगदान रहा है।

संघ के कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने की कोशिश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मोहन भागवत का यह बयान आरएसएस के कार्यकर्ताओं का उत्साह बनाए रखने के लिए दिया गया है। जेपी नड्डा के बयान के बाद से संघ के कई कार्यकर्ता निराश हुए थे। उन्हें लगा था कि उनकी मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसे में मोहन भागवत ने अपने बयान से यह साफ कर दिया कि संघ का महत्व आज भी उतना ही है जितना पहले था। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में मदद मिलेगी।

भाजपा नेतृत्व के लिए संदेश

मोहन भागवत का यह बयान भाजपा के नेतृत्व के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है। भले ही भाजपा का विस्तार हो गया है और पार्टी अब देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है, लेकिन उसका वैचारिक आधार अब भी आरएसएस ही है। यह याद दिलाना जरूरी था कि पार्टी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे और संघ के विचारों को अपनी नीतियों का आधार बनाए। इससे यह भी साफ होता है कि भाजपा और आरएसएस के बीच का रिश्ता सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि वैचारिक स्तर पर गहरा है।

आरएसएस और भाजपा के रिश्तों पर उठते सवाल

लंबे समय से आरएसएस और भाजपा के रिश्तों को लेकर अलग-अलग तरह के सवाल उठते रहे हैं। कई बार यह कहा जाता रहा है कि आरएसएस भाजपा के फैसलों में दखल देता है। हालांकि संघ की तरफ से हमेशा इस बात को खारिज किया गया है। संघ का कहना है कि वे भाजपा को कार्यकर्ता देते हैं लेकिन पार्टी के फैसलों में उनका कोई दखल नहीं होता। यह एक स्वतंत्र राजनीतिक दल है जो अपने फैसले खुद लेती है।

भाजपा संघ की पार्टी नहीं है

मोहन भागवत ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा संघ की पार्टी नहीं है। यह एक अलग राजनीतिक दल है जिसमें बहुत से स्वयंसेवक काम करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी भाजपा में आरएसएस के कई कार्यकर्ता हैं लेकिन यह संघ की पार्टी नहीं है। स्वयंसेवक अपना काम करते हैं और पार्टी अपने फैसले खुद लेती है। इस तरह उन्होंने दोनों संगठनों के बीच की स्वतंत्रता को भी रेखांकित किया।

आरएसएस के पास समय की कमी

मोहन भागवत ने यह भी कहा कि आरएसएस के कार्यकर्ताओं के पास कोई और काम करने के लिए समय नहीं होता। उन्होंने कहा कि अगर आप संघ के कार्यकर्ताओं की माताओं और बहनों से बात करेंगे तो वे कहेंगी कि इन्हें घर पर भी ध्यान देने का समय नहीं मिलता। आरएसएस का एकमात्र काम है संपूर्ण हिंदू समाज को एकजुट करना। इसके अलावा उन्हें कोई और काम नहीं करना है। यह बयान संघ की प्रतिबद्धता और समर्पण को दर्शाता है।

संघ का विचार और उसका फायदा

मोहन भागवत ने आगे कहा कि देश में और भी कई समस्याएं हैं और उनका क्या होगा, यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। इस पर उन्होंने संघ संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार का हवाला देते हुए कहा कि संघ कुछ नहीं करेगा और स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेगा। इसका मतलब है कि स्वयंसेवक सभी महत्वपूर्ण कामों में शामिल होते हैं लेकिन वे स्वतंत्र रहते हैं। संघ उन पर कोई नियंत्रण नहीं रखता।

स्वयंसेवकों के बीच सहयोग की भावना

भागवत ने बताया कि संघ का काम मनमर्जी से चलता है। इसमें कोई सख्त नियंत्रण नहीं है। स्वयंसेवकों के बीच सहयोग की भावना होती है। संघ के पास एक शक्ति है और राष्ट्र के लिए एक विचार है। जो लोग इस विचार के अनुसार बात करते हैं, उन्हें इसका लाभ होता है। लेकिन संघ का मूल उद्देश्य किसी को लाभ पहुंचाना नहीं है बल्कि समाज को एकजुट करना है।

राजनीतिक संदेश का महत्व

मोहन भागवत का यह बयान सिर्फ एक साधारण बयान नहीं है बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। इससे यह साफ हो गया है कि आरएसएस और भाजपा के बीच का रिश्ता मजबूत है और दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। भाजपा की सफलता में संघ का बड़ा योगदान रहा है और यह आगे भी जारी रहेगा। यह बयान भाजपा के नेतृत्व को भी याद दिलाता है कि उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए।

समाज को एकजुट करने का लक्ष्य

Mohan Bhagwat RSS Statement: आरएसएस का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट करना है। मोहन भागवत ने अपने बयान में इस बात को दोहराया कि संघ इसी लक्ष्य के लिए काम करता है। चाहे राजनीति हो या सामाजिक काम, संघ के कार्यकर्ता हर जगह मौजूद हैं लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य समाज की एकता है। इस विचार के साथ जो भी जुड़ता है, उसे इसका फायदा मिलता है।

मोहन भागवत का यह बयान आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बना रहेगा। इससे यह साफ हो गया है कि भाजपा और आरएसएस का रिश्ता सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि वैचारिक भी है। राम मंदिर आंदोलन से लेकर चुनावी सफलता तक, संघ की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।