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आतंक, ड्रोन और सूचना युद्ध: ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों पर बोले आर्मी चीफ, बताया पूरा सच

ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों पर बोले आर्मी चीफ
ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों पर बोले आर्मी चीफ (File Photo)
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की सुरक्षा रणनीति पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि आतंकी गतिविधियां घटी हैं, लेकिन खतरा खत्म नहीं हुआ। ड्रोन, फंडिंग और नैरेटिव वारफेयर से निपटने के लिए भारत पूरी तरह तैयार है।
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Operation Sindoor: भारत के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का ताजा बयान केवल एक सैन्य प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश की बदलती सुरक्षा रणनीति, अनुभवों और भविष्य की तैयारी का स्पष्ट संकेत देता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार इतने विस्तार से बोलते हुए उन्होंने यह साफ कर दिया कि भारत अब सिर्फ सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद, सूचना युद्ध और मनोवैज्ञानिक दबाव से निपटने के लिए भी पूरी तरह तैयार है।

ऑपरेशन सिंदूर को केवल एक सैन्य कार्रवाई के रूप में देखना अधूरा होगा। सेना प्रमुख के अनुसार, इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय सेना न सिर्फ प्रतिक्रिया देने में सक्षम है, बल्कि हालात को पहले से भांपने और नियंत्रित करने की क्षमता भी रखती है।

आतंकियों की गतिविधियों में आई कमी

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकी गतिविधियों में कमी आई है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है। उन्होंने बताया कि सीमा पार अब भी करीब आठ आतंकी कैंप सक्रिय हैं, जहां आतंकियों की मौजूदगी बनी हुई है।

सेना प्रमुख ने पाकिस्तान को लेकर भी दो टूक शब्दों में कहा कि वहां आतंकियों को तैयार करने की प्रक्रिया अभी भी जारी है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब फंडिंग और संचालन के तरीके बदल गए हैं। पहले जैसी खुली गतिविधियां भले कम दिखें, लेकिन अंदरखाने तैयारी लगातार चल रही है।

जनरल द्विवेदी ने यह भी संकेत दिया कि आतंकी संगठन अब तुरंत जवाब देने के बजाय समय लेकर रणनीति बना रहे हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारत की सख्ती और सतर्कता ने उन्हें दबाव में ला दिया है।

पाकिस्तानी ड्रोन और भारत की नजर

हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने के सवाल पर सेना प्रमुख ने स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि ये छोटे और डिफेंसिव ड्रोन हैं, जिनका उद्देश्य भारत की गतिविधियों पर नजर रखना और संभावित कमजोरियों की तलाश करना है।

जनरल द्विवेदी के अनुसार, भारतीय सेना ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में कोई भी खाली जगह नहीं छोड़ी है। यही कारण है कि दुश्मन के लिए अब किसी भी तरह की हरकत करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।

नैरेटिव वारफेयर बना नई चुनौती

सेना प्रमुख के बयान का सबसे अहम पहलू नैरेटिव वारफेयर को लेकर रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि आधुनिक युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं लड़े जाते, बल्कि सूचनाओं और धारणाओं के जरिए भी लड़े जाते हैं।

सोशल मीडिया पर नियंत्रण का फैसला

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना द्वारा अपने कई ट्विटर हैंडल बंद किए जाने पर जनरल द्विवेदी ने साफ किया कि यह एक रणनीतिक फैसला था। उन्होंने कहा कि किसी भी नैरेटिव डोमेन में गैप नहीं होना चाहिए। अगर जानकारी में निरंतरता नहीं रहती, तो नकारात्मक खबरें हावी हो जाती हैं।

सेना ने एडीजी स्ट्रेटकॉम को ही सूचना का एकमात्र आधिकारिक माध्यम रखा। इसका नतीजा यह हुआ कि सेना की विश्वसनीयता और संदेश की स्पष्टता बनी रही। यह कदम भविष्य की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है।

मनोवैज्ञानिक रक्षा तंत्र की जरूरत

सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि भारत के पास एक मजबूत साइकॉलजिकल डिफेंस डिविजन हो। इसके लिए काम शुरू कर दिया गया है। साथ ही एक सेंट्रल डिविजन बनाया गया, जो फेक न्यूज और गलत सूचनाओं का रियलटाइम में खंडन कर रहा था।

जनरल द्विवेदी ने आगाह किया कि नैरेटिव वारफेयर सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। यह तुर्की या किसी तीसरे देश से भी हो सकता है। इसलिए भारत को हर मोर्चे पर सतर्क रहना होगा।

कुल मिलाकर, सेना प्रमुख का यह बयान यह साफ करता है कि भारत अब सुरक्षा को केवल सीमा तक सीमित नहीं रख रहा। आतंकवाद, ड्रोन, फंडिंग नेटवर्क और सूचना युद्ध, हर स्तर पर तैयारी की जा चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख ने भारत की सैन्य और रणनीतिक सोच को और मजबूत किया है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।