PM Modi New Office: देश की सत्ता का सबसे अहम केंद्र—प्रधानमंत्री कार्यालय—अब अपने ऐतिहासिक पते से विदा लेने की तैयारी में है। साउथ ब्लॉक, जहां से दशकों तक भारत की नीतियों, फैसलों और भविष्य की दिशा तय हुई, अब जल्द ही एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। खबरों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय जल्द ही सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स में स्थानांतरित हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि साउथ ब्लॉक से प्रधानमंत्री कार्यालय का संचालन जवाहरलाल नेहरू के दौर से होता रहा है। आज़ाद भारत के इतिहास में यह इमारत सत्ता की निरंतरता और स्थायित्व का प्रतीक रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री कार्यालय का यहां से हटना स्वाभाविक रूप से कई सवाल और चर्चाएं पैदा करता है—क्या यह सिर्फ व्यवस्थागत बदलाव है या शासन के दृष्टिकोण में भी कोई बड़ा परिवर्तन छिपा है?
साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ तक का सफर
साउथ ब्लॉक केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक स्मृति का हिस्सा है। यहीं से युद्धों के फैसले लिए गए, कूटनीतिक रणनीतियां बनीं और आर्थिक नीतियों की नींव रखी गई। लेकिन समय के साथ शासन की ज़रूरतें बदली हैं। आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों और एकीकृत प्रशासनिक ढांचे की मांग ने नए परिसरों की आवश्यकता को जन्म दिया है। सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स इसी आवश्यकता का परिणाम है।
क्यों खास है सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स
दारा शिकोह रोड पर स्थित सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स सेंट्रल विस्टा परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय एक ही परिसर में कार्य कर सकें, लेकिन सभी की अपनी स्वतंत्र और सुरक्षित इमारतें हों। इससे न केवल समन्वय बेहतर होगा, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बन सकेगी।
प्रशासनिक दक्षता की नई परिभाषा
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय पहले ही इस नए परिसर में शिफ्ट हो चुका है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के भी जल्द स्थानांतरण की संभावना है। प्रधानमंत्री कार्यालय का यहां आना प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करेगा। अलग-अलग स्थानों पर बिखरे विभागों को एक जगह लाने से समय, संसाधन और ऊर्जा—तीनों की बचत होगी।
मकर संक्रांति और प्रतीकात्मक संदेश
खबरों में यह भी चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मकर संक्रांति के दिन नए कार्यालय में प्रवेश कर सकते हैं। भारतीय परंपरा में मकर संक्रांति को नई शुरुआत और परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इस दिन कार्यालय परिवर्तन एक सांकेतिक संदेश भी देता है—पुराने ढांचे से आगे बढ़कर नए भारत की ओर कदम।
सेंट्रल विस्टा परियोजना और नाम परिवर्तन की कड़ी
यह बदलाव प्रधानमंत्री मोदी के उस दृष्टिकोण से भी जुड़ता है, जिसमें नामों और प्रतीकों के माध्यम से प्रशासन को जनता के अधिक करीब लाने का प्रयास किया गया है। ‘रेस कोर्स रोड’ का ‘लोक कल्याण मार्ग’ बनना, ‘राजपथ’ का ‘कर्तव्य पथ’ में बदलना और अब ‘कर्तव्य भवन’ जैसे नाम—ये सभी बदलाव सत्ता के चरित्र को सेवा और उत्तरदायित्व से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखे जा सकते हैं।
आधुनिक सुविधाओं से लैस नया पीएमओ
नई प्रधानमंत्री कार्यालय इमारत में अत्याधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल गवर्नेंस को ध्यान में रखकर सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसका निर्माण लार्सन एंड टर्बो द्वारा किया गया है, जिसे वर्ष 2022 में यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यह भवन न केवल कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए है, बल्कि भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों को भी ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।