Lucky Oberoi Murder CCTV: जालंधर में आज शुक्रवार की सुबह आम आदमी पार्टी के नेता लक्की ओबेरॉय की दिनदहाड़े हत्या कर दी गयी. इस सनसनीखेज वारदात से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। गुरुद्वारे के बाहर हुई इस हत्या के वे पल कैमरे में कैद हो गए हैं, जिन्हें देखकर यह साफ हो जाता है कि हमला पूरी तरह से योजनाबद्ध और बेखौफ अंदाज में किया गया।
VIDEO | Punjab Aam Aadmi Party leader Lucky Oberoi was shot dead on Friday outside a gurdwara in Jalandhar’s Model Town by unidentified assailants. The incident was caught on CCTV. #PunjabNews #Jalandhar #AAP
(Source: Third Party)
(Full video available on PTI Videos -… pic.twitter.com/m5I38fWjqp
— Press Trust of India (@PTI_News) February 6, 2026
जिस जगह को लोग आस्था, शांति और सुरक्षा का प्रतीक मानते हैं, वहीं गोलियों की गूंज ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे शहर में डर का माहौल पैदा कर दिया।
सीसीटीवी में कैद हुए हत्या के पल
सामने आए सीसीटीवी फुटेज में दिखता है कि दो युवक बाइक पर सवार होकर गुरुद्वारे के बाहर पहुंचते हैं। कुछ ही सेकंड बाद उनमें से एक युवक बाइक से उतरता है और सीधे लक्की ओबेरॉय की गाड़ी की ओर बढ़ता है। काले कपड़ों में नजर आ रहा यह हमलावर बिना किसी हिचकिचाहट के लगातार फायरिंग करता है। ओबेरॉय संभल भी नहीं पाते और गोलियां उन्हें छलनी कर देती हैं।
वीडियो में यह भी साफ है कि हमला अचानक नहीं था। हमलावरों को न सिर्फ ओबेरॉय के आने का समय पता था, बल्कि यह भी मालूम था कि वह गाड़ी कहां रोकेंगे। फायरिंग के बाद हमलावर तेजी से बाइक पर बैठते हैं और मौके से फरार हो जाते हैं।
पांच गोलियां और कुछ सेकंड में खत्म हो गई जिंदगी
पुलिस के मुताबिक, लक्की ओबेरॉय के शरीर में पांच गोलियां लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पूरी घटना कुछ सेकंड में ही खत्म हो गई। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग सहम गए। जब तक लोग मदद के लिए आगे आते, हमलावर फरार हो चुके थे।
गंभीर रूप से घायल ओबेरॉय को तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर फैलते ही उनके समर्थकों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।
पुलिस के लिए सबसे अहम सबूत बना फुटेज
जालंधर के एडिशनल डीसीपी हरिंदर सिंह गिल ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज पुलिस जांच का सबसे अहम हिस्सा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मौके पर दो आरोपी आए थे और उनमें से एक ने कई राउंड फायरिंग की। फॉरेंसिक टीमों को भी बुलाया गया है और आसपास के अन्य कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि हमलावर किस रास्ते से आए और वारदात के बाद किस दिशा में फरार हुए। साथ ही मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स के जरिए भी सुराग जुटाए जा रहे हैं।
सुनियोजित हत्या या निजी रंजिश?
सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर लक्की ओबेरॉय की हत्या के पीछे वजह क्या थी। क्या यह राजनीतिक रंजिश का नतीजा है, या फिर कोई निजी दुश्मनी? पुलिस दोनों ही एंगल से जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, ओबेरॉय की पत्नी ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर नगर निगम चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। ओबेरॉय को कैंट हल्का की इंचार्ज राजविंदर कौर थियाडा का करीबी भी माना जाता था, जिससे मामला राजनीतिक रंग भी ले रहा है।
राजनीति गरमाई, सरकार पर उठे सवाल
सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने इस घटना को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है और हालात ऐसे हैं कि सत्ताधारी पार्टी के नेता भी सुरक्षित नहीं हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर गुरुद्वारे के बाहर दिनदहाड़े हत्या हो सकती है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या हाल होगा। उन्होंने सरकार के ‘गैंगस्टरों के खिलाफ युद्ध’ पर भी सवाल खड़े किए।
आंकड़ों में छिपा डरावना सच
सुखबीर बादल ने दावा किया कि सिर्फ जनवरी 2026 में ही पंजाब में करीब 25 हत्याएं हो चुकी हैं, जबकि साल के पहले हफ्ते में ही 9 लोगों की जान गई। उन्होंने कहा कि हत्याएं अब हर जगह हो रही हैं—कोर्ट परिसर, बाजार, शादी समारोह और अब गुरुद्वारा साहिब के बाहर भी।
यह आंकड़े आम लोगों के मन में डर पैदा करते हैं और यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि आखिर राज्य किस दिशा में जा रहा है।
सीसीटीवी के बाद भी जवाब का इंतजार
सीसीटीवी फुटेज ने भले ही वारदात की तस्वीर साफ कर दी हो, लेकिन अब भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरोपी कब पकड़े जाएंगे। लोगों को उम्मीद है कि कैमरे में कैद इन सबूतों के आधार पर पुलिस जल्द कार्रवाई करेगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
लक्की ओबेरॉय की हत्या सिर्फ एक राजनीतिक नेता की मौत नहीं है, बल्कि यह पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है।