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Bihar Politics: लालू-राबड़ी खाली कर रहे सरकारी आवास! जानिए कहां होगा नया ठिकाना

Bihar Politics: लालू-राबड़ी खाली कर रहे सरकारी आवास! जानिए कहां होगा नया ठिकाना
Bihar Politics: लालू-राबड़ी खाली कर रहे सरकारी आवास

बिहार की राजनीति में 10 सर्कुलर रोड को लेकर सियासी चर्चा तेज है। लालू-राबड़ी परिवार के 39 हार्डिंग रोड शिफ्ट होने के संकेत हैं। सरकार इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहा है। यह बदलाव सत्ता के प्रतीकों पर नई बहस छेड़ रहा है।

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Dipali Kumari
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Bihar Politics: बिहार की राजनीति में कुछ पते सिर्फ ईंट और सीमेंट के ढांचे नहीं होते, वे सत्ता, प्रभाव और राजनीतिक इतिहास के प्रतीक बन जाते हैं। 10 सर्कुलर रोड भी ऐसा ही एक पता है, जिसने दशकों तक सत्ता के केंद्र में रहकर कई राजनीतिक दौर देखे हैं। अब एक बार फिर यह सरकारी आवास चर्चा में है और इसके केंद्र में हैं राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी।

पिछले कुछ दिनों से यह सवाल बिहार की राजनीति में गूंज रहा है कि क्या 10 सर्कुलर रोड की सियासी कहानी अब अपने अंतिम अध्याय की ओर बढ़ रही है। राजद सूत्रों की मानें तो लालू-राबड़ी परिवार जल्द ही 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास में शिफ्ट हो सकता है और मकर संक्रांति के बाद इस पर औपचारिक निर्णय लिए जाने की संभावना है। पार्टी इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन राजनीति में हर प्रशासनिक कदम अपने साथ संदेश भी लेकर आता है।

सरकारी आवास और बिहार की सियासत का पुराना रिश्ता

10 सर्कुलर रोड केवल एक सरकारी बंगला नहीं रहा है। यह लालू-राबड़ी शासनकाल की पहचान बन चुका है। सत्ता में रहते हुए और सत्ता से बाहर होने के बाद भी यह पता राजद की राजनीतिक मौजूदगी का प्रतीक माना जाता रहा। यही वजह है कि इस आवास को खाली करने की प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बन गई।

39 हार्डिंग रोड की ओर बढ़ता कदम

राजद से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जैसे ही 39 हार्डिंग रोड का बंगला औपचारिक रूप से सुपुर्द किया जाएगा, लालू प्रसाद यादव वहां शिफ्ट होने का फैसला ले सकते हैं। महुआ बाग स्थित नए आवास में फिलहाल जाने की संभावना कम बताई जा रही है, क्योंकि वहां निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। इससे साफ है कि पार्टी अब 10 सर्कुलर रोड को लेकर लंबे समय से चली आ रही खींचतान को खत्म करना चाहती है।

देर रात की शिफ्टिंग और बढ़ती चर्चाएं

गुरुवार देर रात 10 सर्कुलर रोड से पेड़-पौधों, गमलों और घरेलू सामान को पिकअप वैन में ले जाने का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और इसे बंगला खाली करने की अंतिम तैयारी के रूप में देखा जाने लगा। हालांकि लालू परिवार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

नोटिस से शुरू हुई पूरी प्रक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 25 नवंबर 2025 को हुई, जब बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राबड़ी देवी को केंद्रीय पूल से नया सरकारी आवास आवंटित किया गया है। प्रशासनिक आदेश के बाद अब शिफ्टिंग की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।

कृष्ण गौशाला तक पहुंचा सामान

10 सर्कुलर रोड से हटाए जा रहे फूलों के गमले और बागवानी से जुड़ा सामान दानापुर के नया टोला स्थित कृष्ण गौशाला में रखा जा रहा है। छोटे वाहनों के जरिये देर रात यह सामान वहां पहुंचाया गया। यह दृश्य अपने आप में संकेत देता है कि आवास खाली करने की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।

जदयू का तंज और कानून की बात

जनता दल यूनाइटेड ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने सोशल मीडिया पर कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद पुराने सरकारी आवास पर बने रहना नियमों का उल्लंघन है। उनके अनुसार यह राजनीति नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के सही उपयोग का सवाल है।

राजद का पलटवार और राजनीतिक आरोप

राजद ने जदयू-भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव का कहना है कि 10 सर्कुलर रोड खाली करना कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि सत्ता पक्ष उन नेताओं पर चुप क्यों है, जो नियमों के बावजूद अब भी सरकारी आवासों में रह रहे हैं। राजद का आरोप है कि सरकार अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उछाल रही है।

प्रशासनिक कदम या राजनीतिक संदेश

बिहार की राजनीति में हर प्रतीक का अपना महत्व होता है। 10 सर्कुलर रोड से विदाई केवल एक आवास परिवर्तन नहीं, बल्कि एक युग के अंत और नए राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। सवाल यह भी है कि क्या यह कदम सत्ता और विपक्ष के बीच नई सियासी रेखाएं खींचेगा।

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Dipali Kumari

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