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चुनाव से पहले मंत्री कृष्णानंद पासवान का बयान: “अगर बुर्का चलेगा तो घूंघट भी चलेगा” – चुनाव आयोग से मांग

KrishnaNand Paswan Statement
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KrishnaNand Paswan Statement: बुर्का और घूंघट पर चुनाव आयोग से विशेष छूट की मांग

बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में चुनावी सरगर्मी के बीच भाजपा विधायक और बिहार सरकार के गन्ना उद्योग मंत्री KrishnaNand Paswan Statement के चलते सुर्खियों में हैं। पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र से विधायक पासवान ने हाल ही में चुनाव आयोग से एक अहम मांग रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान बुर्का पहनने वाली महिलाओं को मतदान केंद्र पर रियायत दी जाती है, उसी तर्ज पर घूंघट पहनने वाली महिलाओं को भी छूट मिलनी चाहिए।

मंत्री पासवान ने स्पष्ट कहा, “अगर बुर्का चलेगा, तो घूंघट भी चलेगा।” उनके इस बयान ने बिहार के चुनावी माहौल में नया राजनीतिक बहस शुरू कर दिया है। ग्रामीण और पारंपरिक महिला मतदाताओं के बीच यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, विपक्षी दल इसे धार्मिक भावनाओं को भुनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

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राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, KrishnaNand Paswan Statement का उद्देश्य मुख्यतः ग्रामीण महिला मतदाताओं को साधना और उनकी पारंपरिक भावनाओं को ध्यान में रखना है। बिहार की ग्रामीण राजनीति में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, और ऐसे बेबाक बयान अक्सर चुनावी रणनीति का हिस्सा होते हैं।

KrishnaNand Paswan Statement
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हालांकि, इस मुद्दे पर कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं को भड़का सकता है। कुछ राजनीतिक दल इसे चुनावी अवसर पर धार्मिक पहचान पर राजनीति करने की कोशिश मान रहे हैं। वहीं, भाजपा के अंदरूनी सूत्र इसे मंत्री की बेबाक शैली और ग्रामीण मतदाताओं से सीधे संवाद करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

KrishnaNand Paswan अपने बिंदास और खुलकर बोलने वाले बयानों के लिए पहले भी चर्चा में रह चुके हैं। उन्होंने कई मौकों पर ऐसे बयान दिए हैं जो सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर वायरल हुए हैं। उनके समर्थक इसे उनके ग्रामीण संपर्क और जनता के साथ सीधा संवाद करने की शैली मानते हैं।

इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी मिली-जुली रही। विपक्षी दल इसे चुनावी अवसर पर वोट बैंक की राजनीति कह रहे हैं, वहीं उनके समर्थक इसे महिला मतदाताओं के अधिकार और पारंपरिक संस्कृति को ध्यान में रखने की बात मान रहे हैं।

वेब स्टोरी:

चुनाव आयोग ने अब तक इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह विषय चर्चा का केंद्र बनेगा। चुनाव आयोग की रियायतें और नियम महिलाओं के मताधिकार को सुनिश्चित करने और वोटिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, KrishnaNand Paswan Statement इस बात का संकेत है कि आगामी चुनाव में बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला मतदाताओं को साधने के लिए कई रणनीतियां अपनाई जा रही हैं। हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इस बयान का सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

Aakash Srivastava

राष्ट्रभारत में लेखक एवं संपादक | राजनीतिक विश्लेषक | खेल और व्यवसाय की रिपोर्टिंग में विशेष रुचि | पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से स्नातक।

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