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12 साल बाद पूरा हुआ मुजफ्फरपुर-हाजीपुर बाइपास, अब नहीं लगेगा जाम; शहरवासियों को मिली बड़ी राहत

Muzaffarpur-Hajipur Bypass Bihar News: 12 साल की देरी के बाद यातायात राहत
Muzaffarpur-Hajipur Bypass Bihar News: 12 साल की देरी के बाद यातायात राहत
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मुजफ्फरपुर-हाजीपुर बाइपास हुआ शुरू, शहर में जाम की समस्या से मिलेगी राहत

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक रहा। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मुजफ्फरपुर-हाजीपुर बाइपास आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इस बाइपास के शुरू होने से शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव में बड़ी राहत मिलेगी और बाहरी वाहनों को अब शहर में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा। इससे शहरवासियों को जाम से मुक्ति मिलेगी और यात्रा समय में भी कमी आएगी।

वेब स्टोरी:


एनएचएआई ने खोला रास्ता, पहले वाहन ने किया आवागमन शुरू

शनिवार सुबह मधौल में रखे गए बोल्डर को जेसीबी मशीन से हटाया गया और इसके साथ ही आवागमन की औपचारिक शुरुआत हुई। सबसे पहले मोतिहारी जाने वाले एक ट्रक ने इस नए बाइपास से होकर गुजरते हुए ट्रैफिक मूवमेंट की शुरुआत की। इसके बाद वाहनों का रेला लग गया और धीरे-धीरे आम लोगों ने भी इस मार्ग का उपयोग शुरू कर दिया।


बाइपास से आसान होगा पटना-हाजीपुर से दरभंगा और मोतिहारी का सफर

यह 17 किलोमीटर लंबा बाइपास मधौल से शुरू होकर कांटी सदातपुर में फोरलेन सड़क से जुड़ता है। इसके निर्माण पर करीब 200 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इस बाइपास से अब पटना-हाजीपुर से दरभंगा, सीतामढ़ी, मोतिहारी और वैशाली की यात्रा काफी आसान हो जाएगी। पहले लोगों को रामदयालु चौक होकर जाना पड़ता था, जहां ट्रैफिक जाम एक आम समस्या थी।


डीएम बोले – यह जिला विकास का बड़ा कदम

मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि यह परियोजना जिले के लिए ऐतिहासिक है। “इससे न केवल ट्रैफिक सुगम होगा, बल्कि यह क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी नई दिशा देगा। रामदयालु से लेकर चांदनी चौक तक जाम की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आएगा,” उन्होंने कहा।


बुनियादी ढांचा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

यह बाइपास 66 अंडरपास, चार माइनर ब्रिज और एक रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के साथ बनाया गया है। कपरपुरा में निर्मित आरओबी इस परियोजना का मुख्य हिस्सा रहा, जिसका काम करीब एक साल पहले शुरू हुआ था। इसके पूरे होने में देरी इसी कारण हुई। आरओबी के संचालन में आने से अब ट्रैफिक का दबाव शहर की सड़कों से हट जाएगा।


12 साल की देरी के बाद पूरी हुई परियोजना

दिलचस्प बात यह है कि इस बाइपास की स्वीकृति वर्ष 2010 में ही मिल गई थी, और इसे 2013 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन भूमि अधिग्रहण और मुआवजा विवादों के कारण परियोजना ठप पड़ गई। रैयतों द्वारा कोर्ट में मामला दायर किए जाने से काम में लगभग छह वर्षों की देरी हुई। आखिरकार वर्ष 2021-22 में कोर्ट के आदेश के बाद पुनः काम शुरू हुआ और अब 2025 में यह परियोजना पूर्ण हो सकी है।


लोगों में उत्साह, लेकिन जानकारी का अभाव

बाइपास के शुरू होने की खबर के बावजूद कई लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी। मधौल की ओर से आने वाले वाहनों के लिए किलोमीटर और गंतव्य जिलों का बोर्ड थोड़ा आगे लगाया गया है, जिससे कई ड्राइवरों को बाइपास का एंट्री पॉइंट नजर नहीं आता। कार चालक अविनाश कुमार ने बताया कि “हमें इस नए मार्ग के बारे में जानकारी नहीं थी, इसलिए पहले पुराने रास्ते से ही जाना तय किया था।”


क्षेत्रीय विकास को मिलेगी रफ्तार

एनएचएआई अधिकारियों के मुताबिक, यह बाइपास न केवल ट्रैफिक कम करेगा बल्कि स्थानीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी गति देगा। अब दरभंगा, सीतामढ़ी, वैशाली और समस्तीपुर जैसे पड़ोसी जिलों के यात्रियों को समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।


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Aryan Ambastha

राष्ट्रभारत डॉट कॉम में लेखक एवं विचारक | वित्त और उभरती तकनीकों में गहरी रुचि | राजनीति एवं समसामयिक मुद्दों के विश्लेषक | कंटेंट क्रिएटर | नालंदा विश्वविद्यालय से स्नातक।

प्रौद्योगिकी, वित्त, राजनीति और समाज के आपसी संबंधों को समझने और व्याख्या करने का विशेष कौशल रखते हैं। जटिल विषयों को सरल, शोध-आधारित और संतुलित दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुँचाना इनकी पहचान है। संपर्क: aryan.ambastha@rashtrabharat.com

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