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तेज प्रताप यादव के बंगले से गायब हुआ सरकारी सामान, मंत्री लखेंद्र पासवान ने लगाए आरोप

तेज प्रताप यादव के बंगले से गायब हुआ सरकारी सामान, मंत्री लखेंद्र पासवान ने लगाए आरोप
तेज प्रताप यादव के आवास पर चोरी, 20 लाख नगद समेत कीमती सामान गायब (File Photo)

Tej Pratap Yadav Government Bungalow Controversy: बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने पटना स्थित सरकारी बंगला खाली किया। नए मंत्री लखेंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि बंगले से पंखा, कुर्सी, सोफा, बल्ब जैसे सामान गायब हैं। बंगला खस्ताहाल स्थिति में मिला। भवन निर्माण विभाग जांच कर रहा है। पहले तेजस्वी यादव पर भी ऐसे आरोप लग चुके हैं।

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Asfi Shadab
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बिहार की राजनीति में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया है। लेकिन इस बंगले को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है। नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री लखेंद्र पासवान को जब यह बंगला आवंटित हुआ तो उन्होंने आरोप लगाया कि बंगले से कई जरूरी सामान गायब हैं। इस मामले ने बिहार की सियासत में एक नया मोड़ ला दिया है।

पटना के 26 एम स्टैंड रोड पर स्थित इस सरकारी आवास को लेकर उठे सवाल एक बार फिर यादव परिवार को घेरे में ला खड़ा किया है। मंत्री लखेंद्र पासवान का कहना है कि जब वे अपने नए आवास को देखने गए तो उन्हें बंगले की हालत देखकर हैरानी हुई। उन्होंने बताया कि बंगले से सोफा, कुर्सी, बल्ब, पंखा जैसी जरूरी चीजें गायब मिलीं।

बंगले की खस्ताहाल स्थिति

मंत्री लखेंद्र पासवान ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकारी नियमों के मुताबिक जब किसी मंत्री या विधायक को आवास दिया जाता है तो उसमें सभी जरूरी सामान और सुविधाएं होनी चाहिए। लेकिन इस बंगले में तो बुनियादी सुविधाएं भी नहीं बची हैं। उन्होंने बताया कि कुछ जगहों पर पंखे और एसी उखाड़ लिए गए हैं। कई दरवाजों की कुंडी टूटी हुई है और छत के कई हिस्सों का प्लास्टर उखड़ा हुआ है।

मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि फिलहाल यह बंगला रहने लायक नहीं है। उन्होंने इस बारे में भवन निर्माण विभाग को जानकारी दे दी है। अब जब तक बंगले की पूरी मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक वे इसमें शिफ्ट नहीं होंगे। यह बयान सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

तेज प्रताप ने कैसे खाली किया बंगला

सूत्रों के अनुसार तेज प्रताप यादव ने अपना अधिकतर सामान इस बंगले से अपने कार्यालय में शिफ्ट कर दिया है। उन्हें यह सरकारी बंगला करीब दो साल पहले आवंटित किया गया था। उस समय वे महागठबंधन की सरकार में मंत्री थे और हसनपुर विधानसभा सीट से विधायक भी थे। लेकिन हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में महुआ सीट से चुनाव हारने के बाद उनकी स्थिति बदल गई।

चुनाव में हार के बाद तेज प्रताप अब ना तो किसी सदन के सदस्य हैं और ना ही किसी संवैधानिक पद पर हैं। इसी वजह से उन्हें भवन निर्माण विभाग की तरफ से सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस मिला था। नियमों के मुताबिक जो व्यक्ति विधायक, मंत्री या किसी संवैधानिक पद पर नहीं है, वह सरकारी आवास का हकदार नहीं रह जाता।

यादव परिवार पर पहले भी लगे थे आरोप

यह पहली बार नहीं है जब यादव परिवार के किसी सदस्य पर सरकारी आवास से सामान चोरी करने का आरोप लगा हो। इससे पहले अक्टूबर 2024 में तेज प्रताप के छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी ऐसे ही आरोप लगे थे। जब उन्होंने पटना के 5, देशरत्न मार्ग स्थित अपना सरकारी बंगला खाली किया था तो भाजपा और जेडीयू के नेताओं ने उन पर टोंटी, एसी, पंखा, बेड समेत कई सामान चुराने के आरोप लगाए थे।

उस समय भी काफी हंगामा हुआ था। हालांकि तेजस्वी यादव की ओर से इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया था। उनकी टीम ने कहा था कि यह सब राजनीतिक बदले की कार्रवाई है और विपक्ष को बदनाम करने की साजिश है। बाद में उस बंगले को डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आवंटित कर दिया गया था।

विपक्ष की क्या है प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर अभी तक तेज प्रताप यादव या राजद की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्म हो सकता है। भाजपा और जेडीयू के नेता पहले से ही यादव परिवार पर कई तरह के आरोप लगाते रहे हैं। अब यह नया मामला उन्हें एक और मौका दे सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल और उसकी सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। जनता के पैसे से बनी संपत्ति का सही इस्तेमाल होना चाहिए। ऐसे मामलों में जांच होनी चाहिए और अगर कोई कसूरवार पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

आगे क्या होगा

फिलहाल भवन निर्माण विभाग इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। विभाग के अधिकारी बंगले का निरीक्षण करेंगे और यह देखेंगे कि वाकई में कौन-कौन से सामान गायब हैं। इसके बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अगर यह साबित होता है कि सरकारी सामान जानबूझकर हटाया गया है तो इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

मंत्री लखेंद्र पासवान ने साफ कर दिया है कि जब तक बंगले की पूरी मरम्मत नहीं होती, वे इसमें नहीं रहेंगे। सरकार ने भवन निर्माण विभाग को मरम्मत का काम जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दे दिए हैं। लेकिन यह मामला अब सिर्फ एक बंगले तक सीमित नहीं रह गया है। यह बिहार की राजनीति में एक बड़े सवाल का रूप ले चुका है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा कैसे की जाए और इसके दुरुपयोग को कैसे रोका जाए।

यह मामला आने वाले दिनों में बिहार विधानसभा में भी उठ सकता है। विपक्षी दल इसे लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं सत्ता पक्ष इसे यादव परिवार की गलतियों के तौर पर पेश कर सकता है। फिलहाल सभी की नजरें भवन निर्माण विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।