बिहार की राजनीति में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया है। लेकिन इस बंगले को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है। नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री लखेंद्र पासवान को जब यह बंगला आवंटित हुआ तो उन्होंने आरोप लगाया कि बंगले से कई जरूरी सामान गायब हैं। इस मामले ने बिहार की सियासत में एक नया मोड़ ला दिया है।
पटना के 26 एम स्टैंड रोड पर स्थित इस सरकारी आवास को लेकर उठे सवाल एक बार फिर यादव परिवार को घेरे में ला खड़ा किया है। मंत्री लखेंद्र पासवान का कहना है कि जब वे अपने नए आवास को देखने गए तो उन्हें बंगले की हालत देखकर हैरानी हुई। उन्होंने बताया कि बंगले से सोफा, कुर्सी, बल्ब, पंखा जैसी जरूरी चीजें गायब मिलीं।
बंगले की खस्ताहाल स्थिति
मंत्री लखेंद्र पासवान ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकारी नियमों के मुताबिक जब किसी मंत्री या विधायक को आवास दिया जाता है तो उसमें सभी जरूरी सामान और सुविधाएं होनी चाहिए। लेकिन इस बंगले में तो बुनियादी सुविधाएं भी नहीं बची हैं। उन्होंने बताया कि कुछ जगहों पर पंखे और एसी उखाड़ लिए गए हैं। कई दरवाजों की कुंडी टूटी हुई है और छत के कई हिस्सों का प्लास्टर उखड़ा हुआ है।
मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि फिलहाल यह बंगला रहने लायक नहीं है। उन्होंने इस बारे में भवन निर्माण विभाग को जानकारी दे दी है। अब जब तक बंगले की पूरी मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक वे इसमें शिफ्ट नहीं होंगे। यह बयान सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
तेज प्रताप ने कैसे खाली किया बंगला
सूत्रों के अनुसार तेज प्रताप यादव ने अपना अधिकतर सामान इस बंगले से अपने कार्यालय में शिफ्ट कर दिया है। उन्हें यह सरकारी बंगला करीब दो साल पहले आवंटित किया गया था। उस समय वे महागठबंधन की सरकार में मंत्री थे और हसनपुर विधानसभा सीट से विधायक भी थे। लेकिन हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में महुआ सीट से चुनाव हारने के बाद उनकी स्थिति बदल गई।
चुनाव में हार के बाद तेज प्रताप अब ना तो किसी सदन के सदस्य हैं और ना ही किसी संवैधानिक पद पर हैं। इसी वजह से उन्हें भवन निर्माण विभाग की तरफ से सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस मिला था। नियमों के मुताबिक जो व्यक्ति विधायक, मंत्री या किसी संवैधानिक पद पर नहीं है, वह सरकारी आवास का हकदार नहीं रह जाता।
यादव परिवार पर पहले भी लगे थे आरोप
यह पहली बार नहीं है जब यादव परिवार के किसी सदस्य पर सरकारी आवास से सामान चोरी करने का आरोप लगा हो। इससे पहले अक्टूबर 2024 में तेज प्रताप के छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी ऐसे ही आरोप लगे थे। जब उन्होंने पटना के 5, देशरत्न मार्ग स्थित अपना सरकारी बंगला खाली किया था तो भाजपा और जेडीयू के नेताओं ने उन पर टोंटी, एसी, पंखा, बेड समेत कई सामान चुराने के आरोप लगाए थे।
उस समय भी काफी हंगामा हुआ था। हालांकि तेजस्वी यादव की ओर से इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया था। उनकी टीम ने कहा था कि यह सब राजनीतिक बदले की कार्रवाई है और विपक्ष को बदनाम करने की साजिश है। बाद में उस बंगले को डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आवंटित कर दिया गया था।
विपक्ष की क्या है प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर अभी तक तेज प्रताप यादव या राजद की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्म हो सकता है। भाजपा और जेडीयू के नेता पहले से ही यादव परिवार पर कई तरह के आरोप लगाते रहे हैं। अब यह नया मामला उन्हें एक और मौका दे सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल और उसकी सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। जनता के पैसे से बनी संपत्ति का सही इस्तेमाल होना चाहिए। ऐसे मामलों में जांच होनी चाहिए और अगर कोई कसूरवार पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
आगे क्या होगा
फिलहाल भवन निर्माण विभाग इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। विभाग के अधिकारी बंगले का निरीक्षण करेंगे और यह देखेंगे कि वाकई में कौन-कौन से सामान गायब हैं। इसके बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अगर यह साबित होता है कि सरकारी सामान जानबूझकर हटाया गया है तो इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
मंत्री लखेंद्र पासवान ने साफ कर दिया है कि जब तक बंगले की पूरी मरम्मत नहीं होती, वे इसमें नहीं रहेंगे। सरकार ने भवन निर्माण विभाग को मरम्मत का काम जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दे दिए हैं। लेकिन यह मामला अब सिर्फ एक बंगले तक सीमित नहीं रह गया है। यह बिहार की राजनीति में एक बड़े सवाल का रूप ले चुका है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा कैसे की जाए और इसके दुरुपयोग को कैसे रोका जाए।
यह मामला आने वाले दिनों में बिहार विधानसभा में भी उठ सकता है। विपक्षी दल इसे लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं सत्ता पक्ष इसे यादव परिवार की गलतियों के तौर पर पेश कर सकता है। फिलहाल सभी की नजरें भवन निर्माण विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।