Rashtra Bharat Logo

अजित पवार की मृत्यु के तीन दिन बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने की जल्दबाजी क्यों

अजित पवार की मृत्यु के तीन दिन बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने की जल्दबाजी क्यों
Dattaji Meghe death condolence Vidarbha: उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने वरिष्ठ नेता दत्ताजी मेघे के निधन पर शोक जताया, विदर्भ के शिक्षा व चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान को अतुलनीय बताया। (File photo)

Sunetra Pawar Oath Ceremony: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु के तीन दिन बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री, पार्टी अध्यक्ष और विधायक दल की नेता बनाया जा रहा है। इस जल्दबाजी के पीछे पार्टी विलय की योजना और नेताओं का सत्ता खोने का डर है। शरद पवार को इस फैसले से बाहर रखा गया।

Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

Sunetra Pawar Oath Ceremony: बुधवार की सुबह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना के मात्र तीन दिन बाद शनिवार शाम को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रही हैं। पवार परिवार के लिए इतनी बड़ी त्रासदी के बीच राजनीतिक उत्तराधिकारी तय करने की इस जल्दबाजी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस फैसले के पीछे की असली वजह पार्टी के विलय को लेकर चल रहे समझौते से जुड़ी हुई है।

अजित पवार के साथियों को डर था कि अगर शरद पवार और अजित पवार की पार्टी का विलय हो गया तो एकीकृत पार्टी में शरद पवार गुट का वर्चस्व बढ़ जाएगा और उनका खुद का प्रभाव कम हो जाएगा। यही वजह है कि दुर्घटना के तीसरे दिन से ही महाराष्ट्र में बड़ी राजनीतिक हलचल शुरू हो गई।

तीन पदों की जिम्मेदारी सुनेत्रा को

अजित पवार के राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इनमें प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे शामिल थे। इन नेताओं ने मुख्यमंत्री को सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने के अपने फैसले की जानकारी दी। शाम को वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई जिसमें सुनेत्रा पवार ऑनलाइन शामिल हुईं। बैठक में फैसला लिया गया कि सुनेत्रा पवार को तीन बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।

पहली जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री का पद है। दूसरी जिम्मेदारी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का पद है। तीसरी जिम्मेदारी विधानसभा में पार्टी के विधायक दल की नेता का पद है। ये तीनों पद पहले अजित पवार के पास थे।

इसके अलावा सुनेत्रा पवार को महायुति सरकार में अजित पवार के पास मौजूद सभी मंत्रालयों की भी जिम्मेदारी मिलेगी। हालांकि वित्त मंत्रालय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास रहेगा। वित्त मंत्रालय के बदले में राष्ट्रवादी कांग्रेस को कोई दूसरा मंत्रालय दिया जाएगा। पार्टी नेता छगन भुजबल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पार्टी की सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया है।

शरद पवार को रखा गया बाहर

दिलचस्प बात यह है कि सुनेत्रा पवार को यह जिम्मेदारियां सौंपने से पहले शरद पवार से कोई सलाह नहीं ली गई। शनिवार सुबह बारामती में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद पवार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह फैसला प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने लिया है। उन्हें सुनेत्रा पवार को दी जाने वाली जिम्मेदारियों के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी।

शरद पवार को इस प्रक्रिया से बाहर रखने से राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेताओं के इरादों पर सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि असली वजह 17 जनवरी को हुआ वह समझौता है जो शरद पवार और अजित पवार के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों गुटों का विलय 12 फरवरी को घोषित होना था।

विलय का डर और सत्ता खोने की चिंता

पार्टी के पुराने नेताओं को डर है कि अगर पार्टी एकजुट हो गई तो जुलाई 2023 के विद्रोह के बाद शरद पवार के साथ रहने वाले नेताओं का वर्चस्व बढ़ जाएगा। इससे अजित पवार के साथ आए नेताओं का महत्व कम हो जाएगा।

अजित पवार के गुट के नेताओं के सामने एक और बड़ी चिंता है। हाल ही में शरद पवार ने कहा था कि वह किसी भी हालत में भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। इससे इन नेताओं को डर लगने लगा कि अगर एकीकृत पार्टी बन गई तो वह केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और राज्य में महायुति से बाहर हो सकती है।

कानूनी मुश्किलों का डर

महायुति में शामिल होने से पहले अजित पवार के कई साथी नेताओं पर गंभीर आरोप थे। सीबीआई, ईडी और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जैसी एजेंसियां इनकी जांच कर रही थीं। महायुति में शामिल होने के बाद इन नेताओं को न सिर्फ सत्ता मिली बल्कि कानूनी मुश्किलों से भी राहत मिली।

अब इन नेताओं को डर है कि अगर एकीकृत राष्ट्रवादी कांग्रेस महायुति से बाहर हो गई तो उनकी कानूनी परेशानियां फिर से शुरू हो सकती हैं। यही वजह है कि ये नेता किसी भी तरह अपनी स्थिति मजबूत रखना चाहते हैं।

सुनेत्रा पवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि

Sunetra Pawar Oath Ceremony:: दूसरी तरफ सुनेत्रा पवार राजनीति में बिल्कुल नई हैं। उनका राजनीतिक सफर 2024 में शुरू हुआ जब उन्होंने बारामती से लोकसभा चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में वह अपनी भाभी सुप्रिया सुले से हार गई थीं। इसलिए अजित पवार के गुट के नेताओं को लगता है कि सुनेत्रा के नेतृत्व में उन पर अपना प्रभाव बनाए रखना आसान होगा।

हालांकि महाराष्ट्र की राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष बनाना सिर्फ एक अस्थायी व्यवस्था है। जल्द या देर से दोनों गुटों का विलय होना तय माना जा रहा है। विलय के बाद सुनेत्रा पवार की भूमिका में बड़ा बदलाव हो सकता है।

आगे की राजनीति

महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार का प्रभाव हमेशा से रहा है। अजित पवार की असमय मृत्यु ने पार्टी के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। एक तरफ शरद पवार हैं जो पार्टी के संस्थापक और वरिष्ठ नेता हैं। दूसरी तरफ अजित पवार के वफादार साथी हैं जो अपनी स्थिति मजबूत रखना चाहते हैं।

सुनेत्रा पवार को तीन बड़ी जिम्मेदारियां देने का फैसला इसी संघर्ष का नतीजा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र की राजनीति में यह फैसला किस तरह के बदलाव लाता है। पार्टी का विलय होता है या नहीं यह भी एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब समय ही देगा।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।