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POSCO Verdict: औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सुनाई पांच वर्ष की सश्रम कारावास की सजा

POSCO Verdict: औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सुनाई पांच वर्ष की सश्रम कारावास की सजा
POSCO Verdict: औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सुनाई पांच वर्ष की सश्रम कारावास की सजा

औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने पोक्सो एक्ट के तहत नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी गौतम कुमार को पांच वर्ष की सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। टंडवा थाना पुलिस ने आरोपी को गुजरात से बरामद किया था। अदालत ने अपराध को गंभीर मानते हुए कठोर दंड दिया।

Updated:
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Aakash Srivastava
Aakash Srivastava
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POSCO Verdict: औरंगाबाद में पोक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला

औरंगाबाद के व्यवहार न्यायालय ने आज एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। स्पेशल पोक्सो कोर्ट सह जिला न्यायाधीश छः ने नाबालिग के अपहरण और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में आरोपी को दोषी पाते हुए पांच वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर दस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

मामले की सुनवाई और फैसला

यह मामला टंडवा थाना कांड संख्या-100/24, जी. आर-212/24 से संबंधित है। अभियुक्त गौतम कुमार, निवासी इटवां टंडवा, पर बीएनएस धारा और पोक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर शिवलाल मेहता ने बताया कि अदालत ने बीएनएस धारा के तहत पांच वर्ष की सजा और पोक्सो एक्ट की धारा 12 के तहत तीन वर्ष की सजा तथा कुल बीस हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यदि अभियुक्त जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे प्रत्येक मामले में तीन-तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

घटना की पृष्ठभूमि

अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही के अनुसार, इस मामले की प्राथमिकी पीड़िता के भाई द्वारा दर्ज कराई गई थी। दर्ज प्राथमिकी में बताया गया कि 24 अगस्त 2024 को वह अपनी मां के इलाज के लिए अपनी बहन के साथ गया था। इसी दौरान, गौतम कुमार नामक युवक ने नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर भगा लिया।

घटना की सूचना मिलते ही टंडवा थाना पुलिस ने जांच शुरू की और घटना के करीब 20 दिन बाद पुलिस ने आरोपी और पीड़िता को गुजरात से बरामद किया। तत्पश्चात, अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

पुलिस जांच और आरोप पत्र

इस मामले की जांच प्रशिक्षु पुलिस उपनिरीक्षक अमित कुमार द्वारा की गई। उन्होंने 16 नवंबर 2024 को न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया था। जांच के दौरान पुलिस को कई पुख्ता साक्ष्य मिले और पीड़िता सहित पांच महत्वपूर्ण गवाहों ने अदालत में बयान दिए, जिनके आधार पर अपराध की पुष्टि हुई।

न्यायालय की सख्त टिप्पणी

POSCO Verdict: सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि नाबालिगों के साथ ऐसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य न केवल अपराधी को दंडित करना है बल्कि समाज में एक संदेश देना भी है कि नाबालिगों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को किसी प्रकार की राहत नहीं मिलेगी।

पीड़िता के परिवार ने जताई राहत

फैसले के बाद पीड़िता के परिवार ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त किया। परिवार ने कहा कि “हमें विश्वास था कि न्याय मिलेगा और आज न्यायालय ने हमारे भरोसे को कायम रखा।” इस निर्णय से क्षेत्र में यह संदेश गया है कि कानून अपने आप में निष्पक्ष है और पीड़ित को अंततः न्याय मिलता है।

पोक्सो एक्ट के तहत सख्ती जारी

यह फैसला पोक्सो एक्ट के तहत बिहार में न्यायालयों द्वारा अपनाई जा रही सख्त नीति को भी दर्शाता है। हाल के वर्षों में बाल अपराधों के मामलों में अदालतें तेजी से कार्रवाई कर रही हैं ताकि समाज में अपराध के प्रति भय बना रहे।

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