Rashtra Bharat Logo

लालू यादव की बेटी रोहिणी यादव, राजनीति और सोशल मीडिया से दूरी की ओर कदम

लालू यादव की बेटी रोहिणी यादव, राजनीति और सोशल मीडिया से दूरी की ओर कदम
Rohini Yadav: लालू की बेटी की राजनीति से दूरी का ऐलान
Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

सोशल मीडिया पर बड़े कदम और परिवार से बढ़ती दूरी ने रोहिणी आचार्य के राजनीतिक भविष्य पर नए सवाल खड़े किए।

बिहार की राजनीति में लालू-प्रसाद यादव के परिवार के अंदर चल रहे मतभेद एक बार फिर सतह पर आ गए हैं। इस बार चर्चा के केंद्र में हैं उनकी बेटी रोहिणी आचार्य, जिन्होंने अपने सोशल मीडिया व्यवहार और सार्वजनिक वक्तव्यों से संकेत दिया है कि वे राजनीति और पारिवारिक दायरे से अपने कदम पीछे खींच रही हैं।

राजनीतिक महत्वाकांक्षा से इनकार

रोहिणी ने हाल के दिनों में स्पष्ट किया है कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। उनके शब्दों में, पद और प्रतिष्ठा से अधिक उनके लिए आत्म-सम्मान और नैतिक मूल्य महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे परिवार और समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाती रही हैं, लेकिन किसी भी प्रकार की राजनीतिक लालसा उनमें कभी नहीं रही।

उनका कहना है कि राजनीति में उनके नाम को लेकर बिना किसी आधार के अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिनका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। इस प्रकार की अफवाहों से वे दुखी भी हैं और नाराज भी, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि वे अपनी गरिमा से कोई समझौता नहीं करेंगी।

सोशल मीडिया पर बड़ा कदम

रोहिणी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे यह संकेत मिला है कि वे न केवल राजनीति से दूरी बना रही हैं, बल्कि परिवार और पार्टी के कई प्रमुख नेताओं से भी अलग-थलग हो रही हैं।
उन्होंने एक साथ दर्जनों नेताओं को अनफॉलो कर दिया—जिनमें उनके पिता लालू प्रसाद यादव, भाई तेजस्वी यादव और आरजेडी के कई वरिष्ठ चेहरे शामिल थे।

इसके अलावा, उन्होंने अपनी प्रोफ़ाइल से पारिवारिक और राजनीतिक कार्यक्रमों की कई पुरानी तस्वीरें भी हटा दीं, और एक अकेली तटस्थ तस्वीर लगाई, जो उनके अलगाव की झलक देती है।

आरोप-प्रत्यारोप और खुली चुनौती

रोहिणी ने अपने आलोचकों को एक खुली चुनौती भी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि कोई यह साबित कर दे कि उन्होंने राजनीति में किसी पद या अवसर के लिए दबाव बनाया था या परिवार के भीतर झूठ फैलाया था, तो वे सार्वजनिक जीवन से सदा के लिए हट जाएंगी।
उन्होंने किडनी दान को लेकर उनपर लगाए गए झूठे आरोपों पर भी कड़ा रुख दिखाया और आरोप लगाने वालों से सबूत प्रस्तुत करने या सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

परिवार के भीतर असहमति

लालू परिवार में मतभेद कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल के महीनों में रोहिणी और कुछ अन्य नेताओं के बीच तनाव कहीं अधिक खुलकर सामने आया है।
बिहार की अधिकार यात्रा के दौरान एक घटना हुई थी, जिसमें एक बस में वरिष्ठ सीट पर बैठे एक नेता को लेकर रोहिणी ने अप्रत्यक्ष नाराजगी जताई थी। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि परिवार के भीतर विचारधारात्मक और व्यवहारिक मतभेद गहराते जा रहे हैं।

चुनाव और दबाव

लोकसभा चुनाव 2024 में रोहिणी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। यह भी कहा जा रहा है कि इस हार के बाद परिवार और पार्टी में उनकी उपयोगिता और प्रभाव कम समझा जाने लगा।
कुछ राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उसी समय से उनके भीतर असंतोष पैदा हुआ, और वे धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से पीछे हटने लगीं।

राजनीतिक संस्थाओं पर तीखे सवाल

हालांकि वे राजनीतिक महत्वाकांक्षा से इनकार करती हैं, लेकिन उन्होंने चुनाव आयोग से लेकर सत्तारूढ़ दल तक कई मुद्दों पर आलोचनात्मक रुख अपनाया है।
उन्होंने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नामों को हटाए जाने की बात कही है और आरोप लगाया है कि यह कदम विपक्षी समर्थकों को कमजोर करने के लिए उठाया गया था।

यह दिखाता है कि वे राजनीतिक मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद रखने से पीछे नहीं हटतीं, भले ही वे स्वयं किसी पद की दावेदार न हों।

सांस्कृतिक और राजनीतिक टिप्पणियाँ

हाल के दिनों में उन्होंने कुछ नेताओं के बयानों पर तीखी प्रतिक्रियाएँ भी दी हैं, खासकर तब, जब एक राजनीतिक नेता द्वारा एक कलाकार पर अपमानजनक टिप्पणी की गई थी।
रोहिणी ने सांस्कृतिक सम्मान को राजनीतिक भाषणों के केंद्र में रखने की बात कही और सवाल उठाया कि क्या कला और कलाकारों को नीचा दिखाना किसी भी रूप में उचित है।

उनकी यह प्रतिक्रिया बताती है कि सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर उनका दृष्टिकोण गंभीर और स्पष्ट है।

रोहिणी आचार्य का राजनीति और परिवार से दूरी बनाना महज एक निजी निर्णय नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी माना जा रहा है। उनके कदमों ने लालू परिवार की सियासत को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि रोहिणी पूर्णतः सार्वजनिक जीवन से अलग होती हैं या फिर किसी नए रूप में अपनी भूमिका तय करती हैं।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।