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8th Pay Commission: सरकार के फैसले से मचा बवाल, 69 लाख पेंशनर्स को आयोग से बाहर रखने पर फेडरेशन की नाराजगी

8th Pay Commission: सरकार के फैसले से मचा बवाल, 69 लाख पेंशनर्स को आयोग से बाहर रखने पर फेडरेशन की नाराजगी
8th Pay Commission: सरकार के फैसले से मचा बवाल, 69 लाख पेंशनर्स को आयोग से बाहर रखने पर फेडरेशन की नाराजगी

केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग से 69 लाख पेंशनर्स को बाहर रखने के निर्णय पर विवाद बढ़ गया है। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर सुधार की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि निर्णय नहीं बदला गया तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग से 69 लाख पेंशनर्स बाहर, सरकार के फैसले से उठे सवाल

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को इस आयोग के दायरे से बाहर रखा गया है। इससे ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) सहित कई कर्मचारी संगठन नाराज हैं। फेडरेशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इस निर्णय में तत्काल सुधार की मांग की है।

पेंशनर्स को बाहर रखने पर बढ़ा आक्रोश

AIDEF का कहना है कि सातवें वेतन आयोग में पेंशन संशोधन का प्रावधान स्पष्ट रूप से शामिल था, लेकिन इस बार आठवें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference) से यह क्लॉज हटा दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि पहले से रिटायर कर्मचारियों की पेंशन वृद्धि पर रोक लग सकती है।

फेडरेशन ने कहा कि यह निर्णय उन लाखों कर्मचारियों के साथ अन्याय है जिन्होंने अपने जीवन का लंबा समय देश की सेवा में लगाया। संगठन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा,
“जिन लोगों ने दशकों तक अपने जीवन का सबसे मूल्यवान समय राष्ट्र के लिए समर्पित किया, उन्हें अब वृद्धावस्था में भुलाया जा रहा है। यह न केवल अनुचित है बल्कि असंवेदनशील भी।”

फेडरेशन की चार प्रमुख मांगें

फेडरेशन ने केंद्र सरकार के समक्ष चार मुख्य मांगें रखी हैं—

  1. पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को आठवें वेतन आयोग के दायरे में शामिल किया जाए।

  2. नई वेतन और पेंशन संरचना की प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2026 तय की जाए।

  3. अग्रिम ली गई कम्यूटेड पेंशन को 11 साल बाद बहाल करने का प्रावधान किया जाए (फिलहाल यह अवधि 15 वर्ष है)।

  4. हर पांच वर्ष में पेंशन में 5% की वृद्धि की व्यवस्था लागू की जाए, जैसा कि संसद की स्थाई समिति ने सिफारिश की थी।

महंगाई के आंकड़ों पर उठे सवाल

वेतन आयोग के कार्यान्वयन में महंगाई दर (Inflation Rate) की भूमिका अहम होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि महंगाई दर के आंकड़े सही नहीं होंगे तो वेतन संरचना असंतुलित हो सकती है।
वर्तमान में हाउसिंग इंफ्लेशन की गणना सरकारी मकानों के किराए और लाइसेंस शुल्क से की जाती है, जो बाजार के वास्तविक किराए से काफी अलग है।

उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2017 में जब सातवें वेतन आयोग ने HRA में वृद्धि की, तो हाउसिंग इंफ्लेशन 4.7% से बढ़कर 8.45% तक पहुंच गया था, जबकि असल किराए में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था। इससे यह स्पष्ट है कि गलत आंकड़े वेतन निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

आयोग की संरचना और कार्यकाल

8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट 18 महीनों में सौंपनी है। रिपोर्ट में केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्ते और पेंशन ढांचे के लिए सिफारिशें शामिल होंगी।

फेडरेशन की चेतावनी: आंदोलन की तैयारी

फेडरेशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निर्णय में सुधार नहीं किया तो वे देशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि आठवां वेतन आयोग तभी सार्थक होगा जब उसमें पेंशनर्स को समान रूप से शामिल किया जाए।

AIDEF ने सरकार को यह भी याद दिलाया कि सातवें वेतन आयोग के दौरान भी कई विसंगतियां सामने आई थीं, जिनका असर अब तक खत्म नहीं हुआ। इसलिए इस बार सभी हितधारकों की राय को ध्यान में रखकर संतुलित निर्णय लेने की जरूरत है।

आठवें वेतन आयोग को लेकर जारी यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराता दिख सकता है। सरकार को अब यह तय करना होगा कि वह पेंशनर्स के हितों को शामिल करते हुए आयोग की सिफारिशों को संतुलित रूप में लागू करती है या नहीं। क्योंकि 69 लाख पेंशनर्स का यह वर्ग न केवल संख्यात्मक रूप से बड़ा है, बल्कि देश की सेवा में समर्पित एक महत्वपूर्ण जनसमूह भी है।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।