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झारखंड हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश होंगे जस्टिस महेश सोनक, जानिए इनकी पृष्ठभूमि

Justice Mahesh Sonak
झारखंड हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश होंगे जस्टिस महेश सोनक (File Photo)
बॉम्बे हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक को झारखंड हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी हुई। उनके अनुभव से न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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Jharkhand High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट के दूसरे वरीयतम न्यायाधीश जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक को झारखंड हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। झारखंड हाईकोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान 8 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके कार्यकाल की समाप्ति के साथ ही जस्टिस सोनक झारखंड हाईकोर्ट की जिम्मेदारी संभालेंगे।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जारी हुई अधिसूचना

केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के साथ ही जस्टिस महेश सोनक के नाम पर मुहर लग गई है। न्यायिक नियुक्तियों में राष्ट्रपति की स्वीकृति एक संवैधानिक प्रक्रिया होती है, जो इस पद की गंभीरता और गरिमा को दर्शाती है। कानून मंत्रालय की अधिसूचना के बाद अब उनके पदभार ग्रहण का रास्ता साफ हो गया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट से झारखंड तक का सफर

जस्टिस सोनक वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से एक हैं। लंबे समय तक वहां न्यायिक दायित्व निभाने के बाद अब वे झारखंड हाईकोर्ट का नेतृत्व करेंगे। बॉम्बे हाईकोर्ट जैसी व्यस्त और विविध मामलों वाली अदालत में काम करने का अनुभव उन्हें झारखंड जैसे राज्य में न्यायिक प्रशासन संभालने में मददगार साबित हो सकता है।

वकालत से न्यायाधीश बनने तक का सफर

जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक को अक्तूबर 1988 में महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकित किया गया था। वकालत के शुरुआती दौर से ही उन्होंने सिविल और संवैधानिक कानून के क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई। बॉम्बे हाईकोर्ट की पणजी पीठ में उन्होंने श्रम एवं सेवा कानून, पर्यावरण कानून, वाणिज्यिक और कर कानून, कंपनी कानून तथा जनहित याचिकाओं जैसे अहम विषयों पर व्यापक प्रैक्टिस की।

सरकार और संस्थानों के लिए निभाई अहम भूमिका

अपने विधिक करियर के दौरान जस्टिस सोनक ने केंद्र सरकार के लिए अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता के रूप में काम किया। इसके अलावा वे राज्य सरकार के विशेष अधिवक्ता और विभिन्न निगमों को कानूनी सेवाएं भी दे चुके हैं। इस दौरान उन्हें प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं को नजदीक से समझने का अवसर मिला, जो किसी भी मुख्य न्यायाधीश के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति और योगदान

उनकी विधिक दक्षता और अनुभव को देखते हुए 21 जून 2013 को उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद स्थायी न्यायाधीश के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। उनके फैसलों में संतुलन, स्पष्टता और कानून की गहरी समझ दिखाई देती है। यही कारण है कि वे अपने सहयोगियों और वकीलों के बीच एक सख्त लेकिन न्यायप्रिय न्यायाधीश के रूप में जाने जाते हैं।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि

जस्टिस सोनक का जन्म 28 नवंबर 1964 को हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गोवा के पणजी स्थित डॉन बॉस्को हाई स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद धेम्पे कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। एमएस कॉलेज ऑफ लॉ, पणजी से उन्होंने प्रथम श्रेणी में एलएलबी की उपाधि हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने जेवियर सेंटर ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च से पुर्तगाली भाषा में डिप्लोमा भी किया, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाता है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।