Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची से उठी एक कार्रवाई अब केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं रह गई है, बल्कि यह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अधिकारों की सीमा, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे बड़े संवैधानिक सवालों को जन्म दे रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और झारखंड पुलिस के बीच सीधे टकराव ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि यह मामला अब झारखंड हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है।
15 जनवरी की सुबह रांची में जो हुआ, उसने कई लोगों को पश्चिम बंगाल में हुए ईडी विवाद की याद दिला दी। रांची पुलिस की एक टीम अचानक एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंची, जहां दस्तावेजों की जांच की गई और सीसीटीवी फुटेज जब्त कर ली गई। इतना ही नहीं, ईडी के दो अधिकारियों के खिलाफ मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप में एफआईआर भी दर्ज कर ली गई। इस पूरी कार्रवाई को लेकर ईडी ने तीखी आपत्ति जताई है।
जांच एजेंसी बनाम राज्य पुलिस
ईडी का साफ कहना है कि यह कार्रवाई जांच में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप है। एजेंसी का आरोप है कि राज्य पुलिस ने बिना समुचित प्रक्रिया अपनाए केंद्रीय जांच एजेंसी के कार्यालय में प्रवेश किया और दबाव बनाने की कोशिश की। इसी आधार पर ईडी ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर को रद्द करने और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
ईडी के अनुसार, जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं, वे एक गंभीर भ्रष्टाचार मामले की जांच कर रहे थे। यह मामला पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पूर्व कर्मचारी संतोष कुमार से जुड़ा है, जिन पर 2.71 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि पूछताछ के दौरान किसी तरह की मारपीट नहीं हुई और शिकायतकर्ता ने खुद को चोट पहुंचाकर अधिकारियों को फंसाने की कोशिश की।
पुलिस की कार्रवाई से क्यों भड़का विवाद
संतोष कुमार ने 12 जनवरी को एयरपोर्ट थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि ईडी अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान उनके साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और धमकी दी। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने 15 जनवरी को ईडी कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू की।
यहीं से विवाद ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया। ईडी का कहना है कि यदि हर जांच के दौरान आरोपी की शिकायत पर इस तरह कार्रवाई होगी, तो किसी भी केंद्रीय एजेंसी का काम करना मुश्किल हो जाएगा।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला, निगाहें 16 जनवरी की सुनवाई पर
ईडी ने अपनी याचिका में साफ शब्दों में कहा है कि राज्य पुलिस का यह कदम न केवल अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है, बल्कि इससे जल आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मामलों की जांच भी प्रभावित हो सकती है। आज 16 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट में इस पूरे मामले की सुनवाई होनी है, जिस पर राज्य की सियासत की सांसें टिकी हैं।
राजनीतिक बयानबाज़ी ने बढ़ाया तापमान
इस पूरे प्रकरण में भाजपा और झामुमो आमने-सामने आ गए हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर आरोप लगाया कि ईडी कार्यालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े अहम सबूत मौजूद हैं और पुलिस कार्रवाई के बहाने उनसे छेड़छाड़ की आशंका है। उन्होंने इसे “झारखंड को बंगाल बनाने की कोशिश” करार दिया और केंद्र सरकार से केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईडी कार्यालय में हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार से जुड़े साक्ष्य हैं और राज्य सरकार उन्हें नष्ट करने की कोशिश कर रही है। उनके बयान ने विवाद को और भड़का दिया।
झामुमो का पलटवार
वहीं सत्तारूढ़ झामुमो ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पुलिस ने पूरी तरह नियमों के तहत काम किया है। उनके अनुसार, शिकायत मिलने पर जांच करना पुलिस का कर्तव्य है और ईडी अधिकारी थाने बुलाए जाने के बावजूद पेश नहीं हुए।