सूचना का अधिकार कमजोर हुआ, लोकतंत्र पर खतरा — कांग्रेस का आरोप
रांची, 12 अक्टूबर:
झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर सूचना के अधिकार (RTI) कानून को कमजोर करने और देश की लोकतांत्रिक पारदर्शिता पर प्रहार करने का आरोप लगाया है।
वेब स्टोरी:
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने रांची स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में और श्रीमती सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ ऐतिहासिक सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) आम जनता को शासन के हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित कराने का सशक्त माध्यम था।
2019 में संशोधन से घटा अधिकार का प्रभाव
कमलेश ने कहा कि 2019 में किए गए संशोधनों ने इस कानून की स्वतंत्रता को कमजोर कर दिया। पहले सूचना आयुक्त का कार्यकाल 5 वर्ष तय था और उनकी सेवा शर्तें सुरक्षित थीं, लेकिन संशोधन के बाद यह अधिकार केंद्र सरकार को दे दिया गया।

इसके अलावा, 2023 के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम ने व्यक्तिगत जानकारी के दायरे को इतना बढ़ा दिया कि अब जनहित में भी कई जानकारियाँ सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं।
उन्होंने कहा कि यह संशोधन लोकधन के उपयोग, सांसद निधि (MPLAD Fund), मनरेगा लाभार्थियों और राजनीतिक चंदे जैसी पारदर्शी सूचनाओं को दबाने का माध्यम बन गया है।
सूचना आयोग में बढ़ती लंबित फाइलें
प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग में 11 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल दो आयुक्त कार्यरत हैं।
नवंबर 2024 तक आयोग में 23,000 से अधिक मामले लंबित हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों पर खर्च, कोविड काल में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों और पीएम केयर फंड से संबंधित सूचनाओं पर RTI के तहत कोई जवाब नहीं दिया गया।
इसी तरह, इलेक्टोरल बॉन्ड के मामले में भी आरटीआई के तहत जानकारी देने से इनकार किया गया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही कुछ आंकड़े सार्वजनिक किए गए।
विहस्ल ब्लोअर एक्ट लागू नहीं, जवाबदेही पर सवाल
कमलेश ने कहा कि यूपीए सरकार के समय विहस्ल ब्लोअर्स प्रोटेक्शन एक्ट संसद से पारित हुआ था, लेकिन 2014 के बाद मोदी सरकार ने अब तक उसे लागू नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यदि यह कानून लागू होता, तो भ्रष्टाचार और सरकारी गड़बड़ियों को उजागर करने वाले लोगों को सुरक्षा मिलती।
कांग्रेस की माँगें
झारखंड कांग्रेस ने केंद्र सरकार से निम्नलिखित माँगें रखीं —
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2019 के संशोधन को निरस्त किया जाए।
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डीपीडीपी अधिनियम की धारा 44(3) की समीक्षा व संशोधन किया जाए।
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सूचना आयोग में रिक्त पदों पर नियुक्ति तुरंत की जाए।
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विहस्ल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट को लागू किया जाए।
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आयोग में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और महिला प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी, लाल किशोरनाथ शाहदेव, सोनाल शांति, राजन वर्मा और राकेश किरण महतो भी उपस्थित थे।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सूचना का अधिकार जनता की शक्ति है, और इस शक्ति को कमजोर करना लोकतंत्र के खिलाफ सीधा कदम है।