Jharkhnad Band: खूंटी के एदेल संगा पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे आदिवासी सामाजिक व्यवस्था और पारंपरिक नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है। यही वजह है कि इस हत्याकांड के दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आक्रोश थमा नहीं है। मुख्य आरोपी के अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर रहने को लेकर आदिवासी संगठनों में गहरी नाराजगी है।
इसी नाराजगी और न्याय की मांग को लेकर आज 17 जनवरी को संपूर्ण झारखंड बंद का आह्वान किया गया है। आदिवासी संगठनों का साफ कहना है कि जब तक हत्याकांड के मुख्य शूटर और साजिशकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
7 आरोपी गिरफ्तार, लेकिन मुख्य शूटर अब भी फरार
पुलिस ने इस मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन हत्याकांड का मुख्य शूटर अब भी कानून की पकड़ से बाहर है। संगठनों का आरोप है कि इतने संवेदनशील और चर्चित मामले में भी मुख्य आरोपी का फरार रहना जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
मशाल जुलूस के जरिए झारखंड बंद का आह्वान
झारखंड बंद से एक दिन पहले, कल 16 जनवरी की शाम खूंटी, रांची सहित राज्य के कई जिलों में आदिवासी संगठनों ने मशाल जुलूस निकाले। इन जुलूसों के जरिए आम लोगों से बंद को समर्थन देने की अपील की गई।
सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड में आदिवासी एकता मंच की ओर से मशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस के दौरान लोगों ने कहा कि पड़हा राजा सोमा मुंडा जीवन भर जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहे और उनकी हत्या ने आदिवासी समाज को गहरा आघात पहुंचाया है।
बंद रहेगा शांतिपूर्ण, आवश्यक सेवाएं रहेंगी चालू
आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि 17 जनवरी का झारखंड बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। स्कूल बस, एंबुलेंस, अस्पताल, दवा दुकान और अन्य आवश्यक सेवाओं को बंद से मुक्त रखा गया है।
कुचाई में आदिवासी एकता मंच ने घोषणा की है कि शनिवार सुबह 7 बजे से बाजार बंद रहेगा, लेकिन आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।
कई संगठनों ने दिया झारखंड बंद को समर्थन
सोमा मुंडा हत्याकांड के विरोध में बुलाए गए झारखंड बंद को राज्य के दर्जनों संगठनों का समर्थन मिला है। इसमें आदिवासी समन्वय समिति खूंटी, आदिवासी बचाओ मोर्चा, मानकी मुंडा संघ चाईबासा, आदिवासी महासभा, केंद्रीय सरना समिति, आदिवासी बचाओ युवा मोर्चा, झारखंड पार्टी, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, सरना सोंगोम समिति, एदेल सांगा पड़हा समिति, संयुक्त बाइस पड़हा, आदिवासी छात्रसंघ, झारखंड आदिवासी संयुक्त मोर्चा सहित कई सामाजिक और धार्मिक संगठन शामिल हैं।
इसके अलावा ऑल मुस्लिम यूथ एसोसिएशन समेत अन्य सामाजिक संगठनों का समर्थन इस आंदोलन को और व्यापक बना रहा है।
पीड़ित परिवार को मुआवजा और सुरक्षा की मांग
मशाल जुलूस के दौरान वक्ताओं ने कहा कि हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी के साथ-साथ पीड़ित परिवार को मुआवजा और सुरक्षा भी दी जानी चाहिए। उनका कहना था कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा।
7 नवंबर को हुई थी पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या
पड़हा राजा सोमा मुंडा की 7 नवंबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके अगले ही दिन खूंटी बंद हुआ था, जिसमें पक्ष और विपक्ष के कई नेता शामिल हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी मनोज कौशिक ने एसआईटी का गठन किया और एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया था।
साथ ही सदर थाना प्रभारी मोहन कुमार को निलंबित कर उनकी जगह अशोक सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आईजी स्वयं खूंटी पहुंचकर पीड़ित परिवार से मिले थे और एसपी से मामले की प्रगति की जानकारी ली थी।
पुलिस प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
झारखंड बंद को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे। प्रशासन की कोशिश है कि बंद के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो और आम जनजीवन सुरक्षित रहे।