Vikram Natya Samaroh Ujjain: ‘आदि–अनंत’ में सजी शिव की दिव्य छटा, दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

Vikram Natya Samaroh Ujjain 2026 Adi Anant Dance Drama: महाराज शोध पीठ, संस्कृति विभाग, मप्र शासन के तत्वावधान में कालिदास अकादमी के संकुल भवन में सायं 7:30 बजे आदि–अनंत की प्रस्तुति शुरू हुई। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भगवान शिव के योगी और नटराज, दोनों स्वरूपों से सजीव परिचित कराया। नृत्य-नाट्य में शिव को एकत्व, ऊर्जा और ब्रह्मांडीय चेतना के प्रतीक रूप में उकेरा गया। भाव, संगीत और नृत्य के समन्वय ने पूरे सभागार में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया।
उज्जैन। विक्रम उत्सव–2026 के अंतर्गत आयोजित विक्रम नाट्य समारोह में दिल्ली की अन्वेषणा सोसायटी फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाट्य ‘आदि–अनंत’ का राजेश सिंह कुशवाह वरिष्ठ कार्य परिषद सदस्य सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन, डॉ. हरीश सिंह साहित्यकार, योगेश शर्मा पूर्व अध्यक्ष छात्रसंघ विक्रम विश्वविद्यालय, श्री रूप पमनानी समाज सेवी ने कलाकारों का स्वागत एवं सम्मान किया, जबकि संचालन राष्ट्रीय कवि दिनेश दिग्गज ने किया।
Vikram Natya Samaroh Ujjain 2026 Adi Anant Dance Drama: महाराज शोध पीठ, संस्कृति विभाग, मप्र शासन के तत्वावधान में कालिदास अकादमी के संकुल भवन में सायं 7:30 बजे आदि–अनंत की प्रस्तुति शुरू हुई। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भगवान शिव के योगी और नटराज, दोनों स्वरूपों से सजीव परिचित कराया। नृत्य-नाट्य में शिव को एकत्व, ऊर्जा और ब्रह्मांडीय चेतना के प्रतीक रूप में उकेरा गया। भाव, संगीत और नृत्य के समन्वय ने पूरे सभागार में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया।
त्रिपुरांतक प्रसंग में तारकासुर के तीन पुत्रों के अत्याचार और देवताओं की पीड़ा का प्रभावी चित्रण किया गया। वरदान से अजेय बने असुरों का भगवान शिव द्वारा एक ही बाण से संहार करने का दृश्य ऊर्जावान नृत्य और प्रभावी प्रकाश संयोजन के साथ प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
गंगा अवतरण में राजा भगीरथ की तपस्या और मां गंगा के पृथ्वी अवतरण की कथा भावपूर्ण ढंग से दिखाई गई। शिव द्वारा गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर पृथ्वी को विनाश से बचाने का दृश्य भक्ति और करुणा से ओतप्रोत रहा। किरात अर्जुन प्रसंग में वनवास के दौरान अर्जुन की तपस्या, शिव का किरात रूप में आगमन और दोनों के बीच हुआ युद्ध प्रस्तुति का प्रमुख आकर्षण रहा। अंत में अर्जुन का अहंकार भंग होना और शिव द्वारा पाशुपतास्त्र प्रदान करने का प्रसंग दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित कर गया। समग्र रूप से ‘आदि–अनंत’ ने भारतीय पुराणों की आध्यात्मिक गाथाओं को सशक्त नृत्य-नाट्य शैली में प्रस्तुत करते हुए भरपूर सराहना प्राप्त की।

