Maharashtra Farmers Relief: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 2 लाख रुपये तक के कृषि एवं फसल ऋण से जुड़े दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क को पूरी तरह माफ कर दिया है। राजस्व विभाग द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, यह छूट 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी। यह निर्णय राज्य के लाखों छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा।
सरकार की अधिसूचना में क्या शामिल है
राजस्व विभाग की ताजा अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि कृषि और फसल ऋण से संबंधित सभी प्रकार के दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क की छूट दी गई है। इसमें अधिस्वीकृति पत्र, नकद पत्र, करारनामा, तारण पत्र, गिरवी पत्र, गारंटी पत्र और कृषि ऋण से जुड़े अन्य सभी कानूनी दस्तावेज शामिल हैं।
किन दस्तावेजों पर मिलेगी छूट
इस फैसले के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए जाने वाले कृषि ऋण के लिए तैयार किए जाने वाले सभी दस्तावेज स्टाम्प शुल्क से मुक्त होंगे। पहले इन दस्तावेजों पर किसानों को निर्धारित दर से स्टाम्प शुल्क देना पड़ता था, जो अब आगामी आदेश तक पूरी तरह माफ रहेगा। यह छूट संबंधित दस्तावेजों के साथ संलग्न किसी भी लेख पर भी लागू होगी।
किसानों को कैसे मिलेगा सीधा लाभ
महाराष्ट्र में लाखों छोटे और सीमांत किसान हैं जो खेती के लिए बैंकों से ऋण लेते हैं। ऋण लेने की प्रक्रिया में स्टाम्प शुल्क एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ होता था। 2 लाख रुपये तक के ऋण पर यह शुल्क माफ होने से किसानों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। अब वे इस बची हुई राशि का उपयोग बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि आवश्यकताओं में कर सकेंगे।
ऋण प्रक्रिया होगी आसान और सुगम
स्टाम्प शुल्क माफी से ऋण लेने की प्रक्रिया न केवल सस्ती बल्कि सरल भी हो जाएगी। कई बार किसान स्टाम्प शुल्क के भुगतान में आने वाली जटिलताओं के कारण ऋण लेने से कतराते थे। अब जब यह शुल्क पूरी तरह माफ है, तो किसान बिना किसी झिझक के बैंकों और सहकारी संस्थाओं से ऋण प्राप्त कर सकेंगे। इससे कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होने की संभावना है।
कृषि क्षेत्र को मिलेगी नई मजबूती
यह निर्णय केवल किसानों की आर्थिक राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश है। जब किसानों को समय पर और आसानी से ऋण मिलेगा, तो वे अपनी फसलों में बेहतर निवेश कर सकेंगे। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होगा।
राज्य की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव
महाराष्ट्र एक प्रमुख कृषि प्रधान राज्य है। यहां की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। जब किसान आर्थिक रूप से सशक्त होंगे, तो इसका सीधा असर राज्य की समग्र अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
राजस्व विभाग का व्यापक दृष्टिकोण
नागपुर से जारी इस अधिसूचना में राजस्व विभाग ने किसानों के व्यापक जनहित को सर्वोपरि रखा है। विभाग का मानना है कि किसानों पर आर्थिक बोझ कम करके ही कृषि क्षेत्र में वास्तविक विकास संभव है। यह कदम सरकार की किसान हितैषी नीतियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
आगामी आदेश तक रहेगी छूट
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह छूट आगामी आदेश तक जारी रहेगी। इसका अर्थ है कि जब तक सरकार कोई नया निर्णय नहीं लेती, तब तक किसान इस छूट का लाभ उठा सकेंगे। यह दीर्घकालिक राहत का संकेत है।
किसान संगठनों की प्रतिक्रिया
राज्य भर के किसान संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह कदम किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग थी। स्टाम्प शुल्क की माफी से छोटे किसानों को विशेष रूप से लाभ होगा, क्योंकि वे ही 2 लाख रुपये तक के ऋण की श्रेणी में आते हैं।
व्यावहारिक धरातल पर कैसे होगा क्रियान्वयन
1 जनवरी 2026 से यह योजना लागू होने के बाद किसानों को बैंकों में ऋण के लिए आवेदन करते समय स्टाम्प शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा। बैंक और वित्तीय संस्थाएं इस अधिसूचना के आधार पर सीधे दस्तावेज तैयार करेंगी। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आएगी।
यह निर्णय महाराष्ट्र सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जहां किसान कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्टाम्प शुल्क माफी न केवल एक प्रशासनिक राहत है, बल्कि यह किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।