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Maharashtra News: होली से पहले मनरेगा मजदूरों को 67 करोड़ की बड़ी सौगात, 16 करोड़ मानव-दिवस का बजट स्वीकृत

Maharashtra News: होली से पहले मनरेगा मजदूरों को 67 करोड़ की बड़ी सौगात, 16 करोड़ मानव-दिवस का बजट स्वीकृत
Maharashtra tribal workers wage clearance: होली से पहले मनरेगा मजदूरों को 67 करोड़ की राहत (File Photo)

Maharashtra tribal workers wage clearance: महाराष्ट्र सरकार ने होली से पहले मनरेगा मजदूरों को बड़ी राहत देते हुए 67 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। मेलघाट, पालघर जैसे आदिवासी क्षेत्रों के श्रमिकों का लंबित वेतन 2-3 दिनों में सीधे खातों में जमा होगा। केंद्र ने 19 फरवरी को लेबर बजट बढ़ाकर 16 करोड़ मानव-दिवस किया। मार्च तक नियमित रोजगार जारी रहेगा।

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Asfi Shadab
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होली से पहले मनरेगा मजदूरों को मिली बड़ी राहत

महाराष्ट्र के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले मनरेगा मजदूरों के लिए होली से पहले खुशखबरी आई है। राज्य सरकार ने 67 करोड़ रुपये की राशि मंजूर करके लंबे समय से लंबित मजदूरी भुगतान का रास्ता साफ कर दिया है। यह फैसला खासतौर पर मेलघाट, पालघर और अन्य आदिवासी बहुल जिलों के हजारों श्रमिकों के लिए राहत भरा है, जो महीनों से अपनी मेहनत की कमाई का इंतजार कर रहे थे।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा देश की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों के अकुशल श्रमिकों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है। महाराष्ट्र में खासकर आदिवासी समुदाय के लोग इस योजना पर बहुत निर्भर हैं, क्योंकि यहां रोजगार के अवसर सीमित हैं।

बढ़े हुए बजट पर अटकी थी मजदूरी

पिछले कुछ महीनों से मनरेगा मजदूरों का वेतन रुका हुआ था। इसकी मुख्य वजह थी केंद्र सरकार से बढ़े हुए लेबर बजट प्रस्ताव पर मंजूरी का इंतजार। राज्य सरकार ने काम तो जारी रखा था, लेकिन बजट की कमी के कारण मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा था। इससे आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा था।

होली आदिवासी समुदाय का सबसे बड़ा और प्रमुख त्योहार है। इस त्योहार के लिए लोग पूरे साल इंतजार करते हैं और अपने परिवार के साथ खुशियां मनाने की तैयारी करते हैं। लेकिन मजदूरी का भुगतान रुकने से उनकी चिंता बढ़ गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने त्वरित कदम उठाया।

67 करोड़ रुपये का तत्काल भुगतान

राज्य सरकार ने मनरेगा मजदूरों की परेशानी को समझते हुए 67 करोड़ रुपये की राशि तुरंत मंजूर की है। यह राशि उन मजदूरों के बकाया वेतन के लिए है जिन्होंने पिछले महीनों में काम किया था। संबंधित भुगतान प्रस्ताव कोषागार में जमा कर दिए गए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, अगले दो से तीन दिनों में यह राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। इससे होली से पहले हजारों परिवारों को आर्थिक सहारा मिलेगा और वे अपना त्योहार खुशी से मना सकेंगे।

केंद्र ने बढ़ाया मानव-दिवस का बजट

एक और बड़ी राहत की खबर यह है कि 19 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के मनरेगा लेबर बजट को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। पहले यह बजट 13 करोड़ मानव-दिवस का था, जिसे अब संशोधित करके 16 करोड़ मानव-दिवस कर दिया गया है।

इस बढ़े हुए बजट से मार्च के अंत तक मनरेगा के तहत नियमित रोजगार उपलब्ध कराना संभव होगा। इससे न केवल मौजूदा श्रमिकों को राहत मिलेगी, बल्कि और भी लोगों को काम मिल सकेगा।

मनरेगा आयुक्त का बयान

मनरेगा आयुक्त डॉ. भरत बास्टेवाड ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब मजदूरी समय पर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के श्रमिकों को अब नियमित रूप से काम और उसका भुगतान मिलता रहेगा। इससे इन इलाकों में आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

आदिवासी क्षेत्रों में मनरेगा का महत्व

महाराष्ट्र के मेलघाट, पालघर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में खेती के अलावा रोजगार के साधन बहुत कम हैं। ऐसे में मनरेगा इन परिवारों के लिए आय का प्रमुख जरिया बन गया है। यह योजना न केवल रोजगार देती है, बल्कि इन क्षेत्रों के विकास में भी योगदान करती है।

मनरेगा के तहत सड़क निर्माण, तालाब खुदाई, जल संरक्षण जैसे कई विकास कार्य होते हैं। इससे गांवों की बुनियादी सुविधाएं भी बेहतर होती हैं। लेकिन जब मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं होता, तो श्रमिकों का मनोबल गिरता है और काम में रुकावट आती है।

होली पर खुशी की लहर

इस साल होली पर आदिवासी परिवारों में खुशी दोगुनी हो गई है। एक तरफ उनका प्रमुख त्योहार है, दूसरी तरफ महीनों से रुकी मजदूरी मिलने की खबर। 67 करोड़ रुपये की राशि सीधे खातों में आने से लोग अपने परिवार के लिए जरूरी सामान खरीद सकेंगे और त्योहार की तैयारी कर सकेंगे।

यह फैसला राज्य सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। होली जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर मजदूरों की चिंता को समझकर तत्काल कदम उठाना सराहनीय है।

आगे की राह

अब जबकि केंद्र ने बजट बढ़ा दिया है और राज्य ने भुगतान की व्यवस्था कर दी है, उम्मीद है कि आने वाले समय में मनरेगा मजदूरों को इस तरह की परेशानी नहीं होगी। नियमित भुगतान से श्रमिकों में विश्वास बढ़ेगा और वे बेहतर तरीके से काम कर सकेंगे।

महाराष्ट्र सरकार ने यह सुनिश्चित करने का वादा किया है कि मार्च के अंत तक सभी श्रमिकों को नियमित रोजगार मिलता रहेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आदिवासी समुदाय के जीवन स्तर में सुधार होगा।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।