चंद्रपुर जिले से एक बार फिर किसानों की दर्दनाक स्थिति सामने आ रही है। साहूकारी के जाल में फंसे कुछ किसान आज कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार से मुलाकात करने वाले हैं। इन किसानों का कहना है कि कर्ज के दबाव में उनकी किडनी तक निकलवा ली गई, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है।
आज थोड़ी ही देर में ये किसान चंद्रपुर स्थित विजय वडेट्टीवार के घर पहुंचेंगे। यह मुलाकात श्रवण निवास, सरकार नगर, चव्हाण रॉयल्स में होने वाली है। किसान अपनी पूरी कहानी और परेशानियां सीधे नेता के सामने रखने की तैयारी में हैं।
किसानों की पीड़ा और साहूकारी का सच
साहूकारी कैसे बनी किसानों की मजबूरी
ग्रामीण इलाकों में आज भी कई किसान मजबूरी में साहूकारों से पैसा लेते हैं। बैंक से समय पर कर्ज न मिलना, फसल का नुकसान और बढ़ती लागत किसानों को साहूकारों के पास जाने पर मजबूर करती है। शुरुआत में कर्ज छोटा होता है, लेकिन ब्याज इतना ज्यादा होता है कि किसान कभी उसे चुका नहीं पाते।
किडनी निकालने तक पहुंचा मामला
कुछ किसानों ने बताया कि साहूकारों ने उन पर इतना दबाव बनाया कि उन्हें अपनी किडनी निकलवाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इलाज के नाम पर उन्हें दूसरे शहरों में ले जाया गया। वहां किडनी निकाल ली गई और बदले में बहुत कम पैसे दिए गए। इससे न कर्ज खत्म हुआ और न ही जिंदगी आसान हुई।
स्वास्थ्य और रोजगार दोनों पर असर
किडनी निकलने के बाद इन किसानों की सेहत लगातार खराब हो रही है। वे पहले की तरह खेत में काम नहीं कर पा रहे हैं। इलाज का खर्च बढ़ गया है और आमदनी कम हो गई है। परिवार की जिम्मेदारी निभाना भी उनके लिए मुश्किल हो गया है।
विजय वडेट्टीवार से मिलने की उम्मीद
न्याय की आखिरी उम्मीद
पीड़ित किसानों का कहना है कि अब उन्हें नेताओं से ही उम्मीद बची है। विजय वडेट्टीवार से मिलने के बाद वे सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं। किसानों को उम्मीद है कि इस मुलाकात से उनकी आवाज मजबूत होगी।
सरकार से मदद की मांग
किसान चाहते हैं कि सरकार इस पूरे मामले की जांच कराए। साहूकारों पर सख्त कार्रवाई हो और किडनी बेचने जैसे मामलों को रोका जाए। साथ ही पीड़ित किसानों को इलाज और आर्थिक मदद दी जाए।
पहले भी उठा चुके हैं आवाज
यह पहली बार नहीं है जब किसानों ने इस मुद्दे को उठाया है। पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब वे सीधे कांग्रेस विधायक दल के नेता से मिलकर समाधान चाहते हैं।
सिस्टम पर उठते सवाल
बैंक व्यवस्था की कमजोरी
अगर समय पर सही तरीके से बैंक से कर्ज मिलता, तो शायद किसानों को साहूकारों के पास न जाना पड़ता। यह मामला बैंक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
प्रशासन की जिम्मेदारी
प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे मामलों पर नजर रखे। किडनी निकालने जैसे गंभीर अपराध बिना मिलीभगत के नहीं हो सकते। इसकी गहराई से जांच जरूरी है।
समाज को सोचने की जरूरत
यह मामला सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि समाज का भी है। जब किसान अपनी जान का हिस्सा बेचने को मजबूर हो जाए, तो यह पूरे सिस्टम की नाकामी दिखाता है।