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Chhatrapati Sambhajinagar Aurangabad News: पारधी समाज को मिली राहत, जिलाधिकारी का आदेश स्थगित

Chhatrapati Sambhajinagar Aurangabad News: पारधी समाज को मिली राहत, जिलाधिकारी का आदेश स्थगित
Chhatrapati Sambhajinagar Aurangabad News | Image Credit: Wikimedia
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Aryan Ambastha
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Chhatrapati Sambhajinagar Aurangabad News: अनुसूचित जाति–जनजाति आयोग ने दिया बड़ा निर्णय, 1978 से गायरान भूमि पर रह रहे परिवारों को बेघर होने से बचाया

पृष्ठभूमि: दशकों से गायरान भूमि पर निवास

छत्रपति संभाजीनगर जिले के गंगापुर, पैठण और वैजापुर तहसीलों में पारधी समाज 1978 से गायरान भूमि पर निवास कर रहा है। कई वर्षों से वे इस भूमि के स्वामित्व अधिकार के लिए आंदोलनरत थे। हाल ही में जिलाधिकारी ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, जिससे समाज में असंतोष फैल गया।

आयोग की सुनवाई और स्थगन आदेश

Chhatrapati Sambhajinagar Aurangabad News: जिलाधिकारी के आदेश को चुनौती देते हुए पारधी समाज ने महाराष्ट्र राज्य अनुसूचित जाति–जनजाति आयोग में दाद मांगी। आयोग के उपाध्यक्ष एडवोकेट धर्मपाल मेश्राम ने निवास प्रमाणों और वर्षों से बसे होने के आधार पर जिलाधिकारी का आदेश अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया। साथ ही जिलाधिकारी से 15 दिनों में विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई।

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सुनवाई में हुई तीखी बहस | Chhatrapati Sambhajinagar Aurangabad News

सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी के प्रतिनिधि, तहसीलदार, आदिवासी प्रकल्प अधिकारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी और शिकायतकर्ता केशव पवार समेत समाज के लोग मौजूद रहे। आयोग ने जिलाधिकारी पर नाराजगी जताई क्योंकि वे अतिक्रमण के अवैध होने के ठोस प्रमाण पेश नहीं कर पाए।

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भूमि और आवास योजना की चुनौती

Chhatrapati Sambhajinagar Aurangabad News: पारधी समाज के प्रतिनिधि केशव पवार ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना और पारधी आवास योजना का लाभ तभी मिलेगा जब भूमि का स्वामित्व होगा। गायरान भूमि नियमित न होने के कारण समाज के लोग इन योजनाओं से वंचित हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन पर उत्पीड़न और झूठे मुकदमे दर्ज करने का भी आरोप लगाया।

आयोग की सख्त हिदायत

आयोग ने ग्राम पंचायत, तहसीलदार और गटविकास अधिकारी को आवास प्रयोजन हेतु भूमि उपलब्ध कराने का आदेश दिया। साथ ही जिलाधिकारी को 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया।

पारधी समाज को मिली बड़ी राहत

आयोग के स्थगन आदेश से फिलहाल पारधी परिवारों को बेघर होने से राहत मिली है। राज्य शासन ने भी इस मुद्दे पर गंभीरता से दखल लेकर सकारात्मक चर्चा शुरू की है।