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अन्नामलाई ने राज ठाकरे को दिया करारा जवाब, कहा- मुझे धमकाने वाले ये कौन होते हैं

Annamalai Hits Back at Raj Thackeray: भाजपा नेता ने ठाकरे परिवार की धमकियों को किया खारिज
Annamalai Hits Back at Raj Thackeray: भाजपा नेता ने ठाकरे परिवार की धमकियों को किया खारिज (Image Source: IG/@annamalai_kuppusamy)
भाजपा नेता के अन्नामलाई ने राज ठाकरे की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ठाकरे परिवार उन्हें डराने वाला कौन होता है। मुंबई में हुई रैली में राज ठाकरे ने अन्नामलाई को रसमलाई कहकर मजाक उड़ाया था। अन्नामलाई ने तमिल समुदाय के अपमान का आरोप लगाया और कहा कि वे मुंबई जरूर आएंगे। महाराष्ट्र में 15 जनवरी को नगर निगम चुनाव होने हैं।
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भाजपा नेता के अन्नामलाई ने सोमवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे को करारा जवाब दिया। अन्नामलाई ने साफ शब्दों में कहा कि धमकियां और व्यक्तिगत हमले उन्हें मुंबई आने से नहीं रोक सकते। यह बयान मुंबई और तमिल नेता के कामराज पर उनकी टिप्पणियों को लेकर हुए विवाद के बाद आया है।

हाल ही में मुंबई में आयोजित एमएनएस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) की संयुक्त रैली में राज ठाकरे ने अन्नामलाई पर तीखा हमला बोला था। इसके जवाब में अन्नामलाई ने सवाल उठाया कि ठाकरे परिवार उन्हें धमकी देने वाला कौन होता है।

ठाकरे परिवार की धमकियों को किया खारिज

अन्नामलाई ने कहा, “आदित्य ठाकरे और राज ठाकरे मुझे धमकाने वाले कौन होते हैं? मैं एक किसान का बेटा हूं और मुझे किसी राजनीतिक धमकी का डर नहीं है।” उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें चेतावनी दी है कि अगर वे मुंबई आए तो उनके साथ शारीरिक हिंसा की जाएगी।

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा, “कुछ लोगों ने लिखा है कि अगर मैं मुंबई आया तो मेरी टांगें काट देंगे। मैं मुंबई जरूर आऊंगा। कोशिश करके देख लो मेरी टांगें काटने की। अगर मुझे इन धमकियों से डर लगता तो मैं अपने गांव में ही रुक गया होता।”

मराठी गौरव को ठेस पहुंचाने के आरोप खारिज

अन्नामलाई ने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि उनकी टिप्पणियों से मराठी गौरव को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा, “अगर मैं कहता हूं कि कामराज भारत के महानतम नेताओं में से एक हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि वे अब तमिल नहीं रहे? अगर मैं कहता हूं कि मुंबई एक विश्व स्तरीय शहर है, तो क्या इसका मतलब यह है कि महाराष्ट्रियन लोगों ने इसे नहीं बनाया?”

अन्नामलाई ने जोर देकर कहा कि मुंबई की प्रतिष्ठा मराठी लोगों के योगदान से अलग नहीं की जा सकती। उन्होंने अपने आलोचकों को अज्ञानी करार दिया।

तमिल समुदाय के अपमान का आरोप

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ हमले एक सीमा पार कर गए हैं और अब सीधे तमिल समुदाय का अपमान किया जा रहा है। धोती और लुंगी जैसे पारंपरिक पोशाक के संदर्भों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह व्यक्तिगत हमला नहीं बल्कि पूरे समुदाय पर हमला है।

अन्नामलाई ने कहा, “मेरा अपमान करना कोई नई बात नहीं है। डीएमके सालों से यह कर रही है। लेकिन अब तमिलों को एक समुदाय के रूप में अपमानित किया जा रहा है। यह राजनीति धमकियों और डराने-धमकाने पर जीवित रहती है। मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो हाथ-पैर काटने की बातों से डर जाऊंगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि डीएमके, जो ऐतिहासिक रूप से उनकी आलोचना करती रही है, अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के साथ गठबंधन में है, और उन्हें यह स्थिति आश्चर्यजनक लगती है।

राज ठाकरे का रसमलाई वाला बयान

यह विवाद महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों से पहले शुरू हुआ जब राज ठाकरे ने मुंबई में एमएनएस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की संयुक्त रैली में अन्नामलाई को निशाना बनाया। राज ठाकरे ने भाजपा नेता को ‘रसमलाई’ कहकर उनका मजाक उड़ाया और सवाल किया कि मुंबई से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी करने का उन्हें क्या अधिकार है।

हटाओ लुंगी बजाओ पुंगी का नारा

राज ठाकरे ने रैली में कहा था, “तमिलनाडु से एक रसमलाई आ गई है। यहां से तुम्हारा क्या लेना-देना? हटाओ लुंगी बजाओ पुंगी।” यह नारा ऐतिहासिक रूप से शिवसेना के शुरुआती अभियानों से जुड़ा है जो दक्षिण भारतीयों के खिलाफ थे।

बाल ठाकरे ने 1960 में कार्टून साप्ताहिक मार्मिक की शुरुआत की थी और 1966 में शिवसेना की स्थापना की थी। उन्होंने मराठी पहचान की राजनीति को तेज बयानबाजी के जरिए गति दी, जो अक्सर दक्षिणी राज्यों से आए प्रवासियों को निशाना बनाती थी।

महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव

मुंबई, पुणे और पिंपरी-चिंचवड सहित महाराष्ट्र भर में 29 नगर निगमों के लिए मतदान 15 जनवरी को होना है। मतों की गिनती 16 जनवरी को होगी। इन चुनावों से पहले राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं और बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।

राजनीतिक गठबंधन और समीकरण

इस पूरे प्रकरण में दिलचस्प बात यह है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और एमएनएस ने संयुक्त मोर्चा बनाया है। दोनों दल ऐतिहासिक रूप से मराठी अस्मिता की राजनीति करते रहे हैं। अब डीएमके भी इस समीकरण का हिस्सा है, जो अन्नामलाई को विरोधाभासी लगता है।

अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी धमकी से डरने वाले नहीं हैं और मुंबई जाने के अपने इरादे पर कायम रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे भारत के किसी भी हिस्से में जा सकते हैं और कोई भी उन्हें रोक नहीं सकता।

यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है, जहां क्षेत्रीय गौरव और राष्ट्रीय राजनीति के बीच टकराव साफ दिख रहा है। नगर निगम चुनावों के नतीजे इस राजनीतिक बहस की दिशा तय करेंगे।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।