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संघ किसी के खिलाफ नहीं, सत्ता या लोकप्रियता की चाहत नहीं: मोहन भागवत

संघ किसी के खिलाफ नहीं, सत्ता या लोकप्रियता की चाहत नहीं: मोहन भागवत
RSS Chief Mohan Bhagwat: संघ किसी के खिलाफ नहीं, मुंबई में दिया बयान (File Photo)

RSS Chief Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में कहा कि संघ किसी के खिलाफ नहीं है और सत्ता या लोकप्रियता नहीं चाहता। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने कांग्रेस को सुरक्षा वाल्व के रूप में बनाया था, लेकिन भारतीयों ने इसे स्वतंत्रता संग्राम का साधन बना दिया। हेडगेवार के जीवन संघर्ष और क्रांतिकारी गतिविधियों का भी जिक्र किया।

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Asfi Shadab
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संघ का उद्देश्य और विचारधारा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को मुंबई में एक जनसभा को संबोधित करते हुए संघ के बारे में कई अहम बातें कहीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आरएसएस किसी के खिलाफ नहीं है और ना ही संघ को सत्ता या लोकप्रियता की कोई चाहत है। भागवत ने बताया कि संघ का काम सकारात्मक प्रयासों को बढ़ावा देना और समाज को सही दिशा देना है।

मोहन भागवत ने अपने भाषण में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उभरी विभिन्न विचारधाराओं का जिक्र किया। उन्होंने राजा राम मोहन रॉय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती जैसे महान सुधारकों और नेताओं के योगदान को याद किया। इन सभी विचारकों ने अपने-अपने तरीके से देश और समाज को नई दिशा देने का काम किया था।

संघ की असली पहचान क्या है

भागवत ने समझाया कि आरएसएस किसी घटना की प्रतिक्रिया के रूप में काम नहीं करता है। संघ का मुख्य उद्देश्य देश में चल रहे सकारात्मक प्रयासों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि संघ कोई अर्धसैनिक बल नहीं है, भले ही स्वयंसेवक नियमित पथ संचलन करते हैं और लाठी चलाते हैं। इसे अखाड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

आरएसएस प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ राजनीति में सीधे तौर पर शामिल नहीं है। हालांकि, संघ से जुड़े कुछ लोग राजनीतिक जीवन में सक्रिय हैं, लेकिन यह उनका निजी फैसला है। संघ का काम समाज को संगठित करना और राष्ट्र के प्रति जागरूकता फैलाना है।

समाज को दिशा देने की जरूरत

भागवत ने चिंता जताई कि आज भी समाज को सही दिशा देने और अनुकूल वातावरण बनाने का काम पूरी तरह से नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। समाज में एकता और संगठन की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि संघ इसी दिशा में काम कर रहा है। स्वयंसेवकों को राष्ट्र भक्ति और सेवा भाव की शिक्षा दी जाती है। संघ का उद्देश्य एक मजबूत और एकजुट भारत का निर्माण करना है, जहां हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे।

1925 से पहले की परिस्थितियां

मोहन भागवत ने वर्ष 1925 में आरएसएस की स्थापना से पहले के देश की परिस्थितियों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक सुरक्षा वाल्व के रूप में स्थापित किया था। अंग्रेजों का मकसद था कि भारतीयों की नाराजगी को एक सीमित दायरे में रखा जाए।

लेकिन भारतीय नेताओं ने कांग्रेस को स्वतंत्रता संग्राम का शक्तिशाली साधन बना दिया। लोगों ने इस मंच का उपयोग अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाने के लिए किया। यह भारतीयों की दूरदर्शिता और समझदारी का परिणाम था कि एक छोटी शुरुआत बड़े आंदोलन में बदल गई।

केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन संघर्ष

भागवत ने आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और संघर्ष को याद किया। उन्होंने बताया कि हेडगेवार का बचपन बेहद कठिनाइयों में बीता। जब वह मात्र 13 वर्ष के थे, तब प्लेग महामारी में उनके माता-पिता का निधन हो गया।

इसके बाद हेडगेवार को भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन इन सभी मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी निभाई।

स्वतंत्रता आंदोलन में हेडगेवार की भूमिका

मोहन भागवत ने बताया कि हेडगेवार ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उनके स्कूल के दिनों में ही वंदे मातरम आंदोलन शुरू हुआ था और उन्होंने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया।

जब हेडगेवार ने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की, तो नागपुर के कुछ देशभक्त लोगों ने उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोलकाता भेजने के लिए धन जुटाया। कोलकाता में उनका संपर्क क्रांतिकारी समूहों से हुआ, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी।

कोकेन कोडनेम की रोचक घटना

भागवत ने हेडगेवार के जीवन की एक रोचक घटना को साझा किया। उन्होंने बताया कि हेडगेवार ने क्रांतिकारी गतिविधियों में कोकेन नाम का कोडनेम इस्तेमाल किया था। यह नाम उन्होंने कोकेनचंद्र नामक व्यक्ति से प्रेरित होकर लिया था।

एक बार एक दिलचस्प घटना हुई। पुलिस की टीम कोकेनचंद्र को गिरफ्तार करने के लिए आई, लेकिन गलतफहमी में उन्होंने हेडगेवार को हिरासत में ले लिया। यह घटना रास बिहारी बोस की किताब में भी दर्ज है। यह उस दौर की क्रांतिकारी गतिविधियों की एक झलक है।

संघ का सकारात्मक दृष्टिकोण

मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि आरएसएस का दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक रहा है। संघ किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्र के पक्ष में काम करता है। संघ का उद्देश्य समाज में एकता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि संघ अपने स्वयंसेवकों को चरित्र निर्माण और सेवा भाव की शिक्षा देता है। यह संगठन किसी राजनीतिक पद या लोकप्रियता के लिए काम नहीं करता। संघ का काम चुपचाप समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।

राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका

भागवत ने बताया कि संघ राष्ट्र निर्माण के काम में लगा हुआ है। देश के कोने-कोने में संघ के स्वयंसेवक सामाजिक काम कर रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में संघ प्रेरित संगठन सक्रिय हैं।

संघ का मानना है कि मजबूत समाज से ही मजबूत राष्ट्र बनता है। इसलिए संघ समाज के हर वर्ग को जोड़ने और उन्हें संगठित करने का काम करता है। यह काम बिना किसी प्रचार या शोर-शराबे के किया जाता है।

विचारधारा की प्रासंगिकता

मोहन भागवत ने कहा कि राजा राम मोहन रॉय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती जैसे विचारकों की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। इन महापुरुषों ने समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

संघ इन्हीं महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा लेकर काम करता है। संघ का मानना है कि भारत की प्राचीन संस्कृति और आधुनिक विकास के बीच सामंजस्य जरूरी है। यही संतुलन देश को आगे ले जा सकता है।

स्वतंत्रता संग्राम की विरासत

भागवत ने स्वतंत्रता संग्राम में शामिल सभी विचारधाराओं और नेताओं को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि चाहे गांधीजी का अहिंसा का मार्ग हो, या क्रांतिकारियों का सशस्त्र संघर्ष, सभी ने देश की आजादी के लिए योगदान दिया।

हेडगेवार भी इसी स्वतंत्रता संग्राम की उपज थे। उन्होंने महसूस किया कि देश को एक संगठित समाज की जरूरत है। इसी सोच से उन्होंने 1925 में आरएसएस की स्थापना की।

मोहन भागवत का यह भाषण संघ की विचारधारा और उद्देश्य को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर था। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का काम राजनीति नहीं, बल्कि समाज निर्माण है। संघ किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्र के हित में काम करता है। हेडगेवार के जीवन संघर्ष और उनके विचारों ने आज भी संघ के करोड़ों स्वयंसेवकों को प्रेरित किया है।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।