भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासन की गंभीरता को दर्शाते हुए पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल 32 सदस्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। आगामी महानगरपालिका चुनावों को देखते हुए पार्टी ने अनुशासनहीनता को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया और इन सभी सदस्यों को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। यह कदम पार्टी के भीतर एक स्पष्ट संदेश भेजता है कि अनुशासन से समझौता नहीं किया जाएगा।
पार्टी अनुशासन को मिली सर्वोच्च प्राथमिकता
भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा से अनुशासन और संगठनात्मक एकता को सबसे अधिक महत्व दिया है। महानगरपालिका चुनावों के दौरान पार्टी ने सभी कार्यकर्ताओं से अधिकृत उम्मीदवारों के लिए पूरी निष्ठा से काम करने की अपेक्षा की थी। लेकिन कुछ सदस्यों ने पार्टी के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए या तो विरोधी उम्मीदवारों का साथ दिया या निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया। इस तरह की गतिविधियों को पार्टी ने गंभीर अनुशासनहीनता माना और सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया।
पार्टी के लिए चुनाव के समय अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण होता है। जब कोई सदस्य पार्टी के निर्णय के विरुद्ध जाता है तो यह न केवल संगठन को कमजोर करता है बल्कि अन्य कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी प्रभावित करता है। इसी कारण भाजपा ने सभी 32 सदस्यों के खिलाफ एक साथ कार्रवाई करके यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी अनुशासन सबसे ऊपर है।
किन प्रभागों से कितने सदस्य निलंबित
निलंबित किए गए 32 सदस्य विभिन्न प्रभागों से संबंधित हैं। प्रभाग 1 से सुनिता महल्ले को निलंबित किया गया है। प्रभाग 2 से देवराज वासनिक और प्रभाग 3 से नसिमाबानो को भी यही सजा मिली है। प्रभाग 4 से सचिन खोब्रागडे और सुरेश टेंभरे दोनों को निलंबित किया गया है।
प्रभाग 5 से महेंद्र गुप्ता और पुष्पा किरपाने, प्रभाग 9 से रुणाल चौहान तथा प्रभाग 14 से सुनील अग्रवाल को भी निलंबन का सामना करना पड़ा। प्रभाग 17 से विनायक डेहनकर और प्रभाग 18 से धीरज चव्हाण तथा अक्षय ठवकर को छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया।
प्रभाग 19 से प्रकाश घाटे और पापा यादव, प्रभाग 20 से विशाल लारोकर और प्रभाग 21 से तीन सदस्य शुभम मौदेकर, सुलोचना कोवे और राकेश भनारकर निलंबित हुए। प्रभाग 22 से रविशंकर कुंभारे, दशरथ मस्के, आशिष भुते और नंदिनी भुते को भी यही सजा मिली।
प्रभाग 24 से सबसे ज्यादा पांच सदस्यों को निलंबित किया गया जिनमें टेकचंद सोनबोईर, नंदु अहिर, रेणु गेंडरे, शुभम पडोळे और राजू घोसे शामिल हैं। प्रभाग 26 से सुनील मानापुरे, प्रभाग 31 से सोनाली घोडमारे, प्रभाग 32 से दीपक चौधरी और प्रभाग 34 से आसावरी कोठीवान और सुनील मानेकर को भी निलंबित किया गया है।
पार्टी अध्यक्ष ने दिया स्पष्ट संदेश
भाजपा शहर अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी ने इस कार्रवाई पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी अनुशासित कार्यकर्ताओं की पार्टी है। पार्टी में अनुशासन को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। चुनाव के समय पार्टी का निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होता है। जो भी व्यक्ति पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के लिए काम नहीं करेगा या फिर पार्टी के विरुद्ध किसी भी तरह की गुप्त गतिविधियों में शामिल होगा, उसके खिलाफ बिना किसी देरी के सख्त कार्रवाई की जाएगी।
तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी के लिए भी विशेष छूट नहीं है। चाहे कोई छोटा कार्यकर्ता हो या कोई पुराना सदस्य, अगर वह पार्टी के निर्णय के विरुद्ध जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई अवश्य होगी। यह कदम आने वाले समय के लिए एक मिसाल बनेगा और सभी सदस्य समझ जाएंगे कि पार्टी अनुशासन के मामले में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतती।
निलंबन के बाद क्या होगा
जिन 32 सदस्यों को निलंबित किया गया है, उनका अब पार्टी की किसी भी गतिविधि से कोई संबंध नहीं रहेगा। ये सदस्य पार्टी के किसी भी कार्यक्रम, पद या चुनाव अभियान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। छह साल तक ये लोग पार्टी से पूरी तरह से बाहर रहेंगे। इस दौरान वे न तो पार्टी की ओर से किसी पद के लिए दावेदारी कर सकते हैं और न ही पार्टी के किसी आधिकारिक कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं।
यह निलंबन केवल एक औपचारिकता नहीं है बल्कि यह एक गंभीर संदेश है जो पूरे संगठन को दिया जा रहा है। पार्टी ने यह सुनिश्चित किया है कि जो लोग संगठन के प्रति वफादार नहीं हैं, उन्हें पार्टी में कोई जगह नहीं मिलेगी। यह कदम भविष्य में ऐसी गतिविधियों को रोकने में भी मददगार साबित होगा।
कार्यकर्ताओं से अधिकृत उम्मीदवारों के लिए काम करने की अपील
भाजपा ने अपने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से पुनः अपील की है कि वे पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों की जीत के लिए पूरी ताकत से काम करें। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि अब समय व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का नहीं बल्कि संगठन की जीत का है। हर कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और पार्टी के फैसले को सर्वोपरि मानना होगा।
पार्टी ने यह भी कहा है कि जो लोग पूरी निष्ठा से काम करेंगे, उन्हें भविष्य में पुरस्कृत किया जाएगा। लेकिन जो अनुशासनहीनता दिखाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह निलंबन इसी नीति का हिस्सा है। भाजपा चाहती है कि उसके सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करें और संगठन को मजबूत बनाएं।
इस तरह की सख्त कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि भाजपा अनुशासन के मामले में कोई समझौता नहीं करती। चुनाव के समय हर सदस्य को पार्टी के निर्णय का सम्मान करना अनिवार्य है। इस कदम से आने वाले चुनावों में पार्टी की एकता और मजबूत होगी तथा सभी कार्यकर्ता मिलकर संगठन की जीत सुनिश्चित करेंगे।