हिंगणा वानाडोंगरी क्षेत्र के गणेश कॉलनी में एक साधारण दिन अचानक एक जीव की जान बचाने की मुहिम में बदल गया। भाग्यश्री बोहरे अपने घर के कामों में व्यस्त थीं, तभी उन्हें एक अजीब-सी आवाज़ सुनाई दी। जब वे आवाज़ की दिशा में बाहर आईं, तो उन्होंने देखा कि उनके घर के बाहर लगी बेल पर एक कैटल एग्रेट यानी बगुला बुरी तरह फंसा हुआ है और जान बचाने के लिए छटपटा रहा है। स्थिति को समझते हुए उन्होंने तुरंत विदर्भ सर्प मित्र समिति के सदस्य आकाश मेश्राम से संपर्क किया।
सूचना मिलते ही तत्काल पहुंचे रेस्क्यू टीम
भाग्यश्री बोहरे की सूचना मिलते ही आकाश मेश्राम बिना एक पल गंवाए गणेश कॉलनी पहुंच गए। मौके पर निरीक्षण करने के बाद पता चला कि बगुला नायलॉन मांजा में बुरी तरह उलझा हुआ था। नायलॉन मांजा पक्षी के शरीर में कसकर लिपटा हुआ था, जिससे उसकी जान को गंभीर खतरा था। आकाश मेश्राम ने अपनी कुशलता और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए बेहद सावधानी से बगुले को मांजा से मुक्त कराया। इस पूरी प्रक्रिया में विशेष ध्यान रखा गया कि पक्षी को किसी तरह की अतिरिक्त चोट न पहुंचे।
पक्षी की जांच और सुरक्षित मुक्ति
नायलॉन मांजा से मुक्त कराने के बाद आकाश मेश्राम ने बगुले की पूरी तरह से जांच की। सौभाग्य से पक्षी को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी। स्वास्थ्य की जांच के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि बगुला उड़ने के लिए पूरी तरह सक्षम है। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से प्रकृति में मुक्त कर दिया गया। इस पूरे सराहनीय कार्य के लिए बोहरे परिवार ने आकाश मेश्राम और विदर्भ सर्प मित्र समिति का हृदय से आभार व्यक्त किया।
नायलॉन मांजा एक गंभीर खतरा
यह घटना एक बार फिर नायलॉन मांजा के खतरों को सामने लाती है। नायलॉन मांजा केवल एक खेल का साधन नहीं है, बल्कि यह एक जानलेवा चीज़ है जो हर साल कई जानों को खतरे में डालती है। यह मांजा न केवल पक्षियों के लिए खतरनाक है, बल्कि दोपहिया वाहन चालकों, पशुओं और छोटे बच्चों के लिए भी गंभीर खतरा बनता है।
पक्षियों पर नायलॉन मांजा का प्रभाव
पक्षियों के लिए नायलॉन मांजा एक मौत का जाल साबित होता है। उड़ते समय पक्षी इस मांजा में फंस जाते हैं और छटपटाते हुए अपनी जान गंवा देते हैं। कई बार तो पक्षियों के पंख इस मांजा में इतने बुरी तरह उलझ जाते हैं कि उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है। हर साल मकर संक्रांति और अन्य त्योहारों के दौरान सैकड़ों पक्षी इस मांजा की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं।
इंसानों के लिए भी खतरनाक
नायलॉन मांजा दोपहिया वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है। तेज गति से चलते समय यदि यह मांजा गर्दन या शरीर के किसी हिस्से में लग जाए, तो गहरी चोट लग सकती है। कई मामलों में तो लोगों की जान तक चली गई है। छोटे बच्चे जो खेल-खेल में इन मांजा से भरी गलियों में दौड़ते हैं, वे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
पशुओं के लिए भी घातक
सड़कों और खुले मैदानों में बिखरे नायलॉन मांजा पशुओं के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। गाय, भैंस और अन्य पशु अक्सर कचरे के साथ इस मांजा को भी खा लेते हैं, जिससे उनके पेट में गंभीर समस्याएं हो जाती हैं। कई बार तो यह मांजा उनके पैरों में भी उलझ जाता है, जिससे उन्हें चोट लगती है।
जागरूकता की सख्त जरूरत
विदर्भ सर्प मित्र समिति और अन्य सामाजिक संगठनों ने नायलॉन मांजा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे पतंगबाजी के दौरान नायलॉन मांजा का उपयोग बिल्कुल न करें। पारंपरिक सूती मांजा का इस्तेमाल किया जाए, जो पर्यावरण और जीव-जंतुओं के लिए कम हानिकारक है।
त्योहारों में विशेष सावधानी
मकर संक्रांति, उत्तरायण और अन्य त्योहारों के दौरान पतंगबाजी की परंपरा है। इन दिनों में विशेष रूप से सावधानी बरतने की जरूरत है। लोगों को चाहिए कि वे केवल सूती मांजा का उपयोग करें और पतंगबाजी के बाद बचे हुए मांजा को सही तरीके से डस्टबिन में डालें, न कि खुले में छोड़ दें।
विदर्भ सर्प मित्र समिति की भूमिका
विदर्भ सर्प मित्र समिति हिंगणा और आसपास के क्षेत्रों में जीव-जंतुओं की रक्षा के लिए काम कर रही है। यह संगठन न केवल सांपों को बचाता है, बल्कि पक्षियों और अन्य जानवरों को भी संकट से मुक्त कराने में मदद करता है। आकाश मेश्राम और उनकी टीम के सदस्य चौबीसों घंटे तैयार रहते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत मौके पर पहुंच जाते हैं।
आम नागरिकों से अपील
यदि किसी व्यक्ति को कहीं भी कोई पक्षी नायलॉन मांजा में फंसा हुआ दिखाई दे या कोई अन्य जानवर संकट में हो, तो तुरंत विदर्भ सर्प मित्र समिति के सदस्यों से संपर्क करना चाहिए। हिंगणा MIDC क्षेत्र के लिए विशेष रूप से मोनू सिंह (94221 20248) और अमित वंजारी (96651 75882) के नंबर उपलब्ध हैं। समय पर सूचना देने से कई जानें बचाई जा सकती हैं।
समाज की जिम्मेदारी
नायलॉन मांजा पर रोक लगाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। हर नागरिक को यह समझना होगा कि कुछ पलों के मनोरंजन के लिए किसी जीव की जान लेना कितना गलत है। हमें अपनी परंपराओं को बनाए रखते हुए भी पर्यावरण और जीव-जंतुओं की सुरक्षा का ध्यान रखना होगा।
इस घटना से सीख
हिंगणा में बगुले की यह बचत एक प्रेरणादायक घटना है। भाग्यश्री बोहरे की सतर्कता और आकाश मेश्राम की त्वरित कार्रवाई ने एक जीव की जान बचाई। यह घटना हमें सिखाती है कि जागरूकता और सही समय पर उठाए गए कदम कैसे जीवन बचा सकते हैं। आइए, हम सभी मिलकर नायलॉन मांजा के खिलाफ आवाज उठाएं और अपने आसपास के जीव-जंतुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।