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आई.आई.एम. नागपुर की पहल से महाराष्ट्र के गांवों का कायाकल्प

IIM Nagpur IVDP 2.0: महाराष्ट्र के गांवों के विकास के लिए टाटा मोटर्स के साथ नया समझौता
IIM Nagpur IVDP 2.0: महाराष्ट्र के गांवों के विकास के लिए टाटा मोटर्स के साथ नया समझौता

IIM Nagpur IVDP 2.0: भारतीय प्रबंधन संस्थान नागपुर ने टाटा मोटर्स फाउंडेशन और महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर इंटीग्रेटेड विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम 2.0 शुरू किया। यह पहल गांवों के समग्र विकास के लिए है। योजना में प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन और किसानों को सीधा लाभ शामिल है।

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IIM Nagpur IVDP 2.0: महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में विकास की एक नई लहर आने वाली है। भारतीय प्रबंधन संस्थान नागपुर ने टाटा मोटर्स फाउंडेशन और महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर एक ऐसी योजना शुरू की है जो गांवों की तस्वीर बदल सकती है। इंटीग्रेटेड विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम यानी आई.वी.डी.पी. 2.0 नाम की इस योजना का मकसद गांवों का चहुंमुखी विकास करना है।

30 जनवरी 2026 को नागपुर में हुए एक समारोह में इस महत्वपूर्ण समझौते पर दस्तखत किए गए। आई.आई.एम. नागपुर के निदेशक डॉ. भिमराया मेत्री और टाटा मोटर्स फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनोद कुलकर्णी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से प्रिया खान भी मौजूद थीं। इसके अलावा आई.आई.एम. नागपुर के कई वरिष्ठ प्रोफेसर और अधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

तीन संस्थाओं का संयुक्त प्रयास

यह योजना तीन प्रमुख संस्थाओं के सहयोग से चलाई जाएगी। टाटा मोटर्स फाउंडेशन इस कार्यक्रम के लिए आर्थिक मदद मुहैया कराएगा। महाराष्ट्र सरकार प्रशासनिक सहायता देगी और जरूरी अनुमतियां प्रदान करेगी। वहीं आई.आई.एम. नागपुर ज्ञान साझेदार के रूप में काम करेगा। संस्थान अपने शोध और विशेषज्ञता से इस योजना को सही दिशा देगा।

इस तरह की साझेदारी से यह सुनिश्चित होगा कि योजना केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि जमीनी स्तर पर असर दिखाए। तीनों संस्थाओं की अलग-अलग ताकत इस योजना को मजबूत बनाएगी।

प्रशिक्षण पर विशेष जोर

इस कार्यक्रम की एक खास बात यह है कि इसमें सरकारी अधिकारियों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा। यशदा संस्थान के सहयोग से स्थानीय और जिला स्तर के अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।

अक्सर देखा जाता है कि सरकार की अच्छी से अच्छी योजनाएं भी जमीन पर सही तरीके से लागू नहीं हो पातीं। इसकी एक बड़ी वजह अधिकारियों की जानकारी की कमी या उचित मार्गदर्शन का अभाव होता है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी समस्या का समाधान करेगा।

ज्ञान को कक्षा से बाहर लाना

डॉ. भिमराया मेत्री ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षण संस्थानों का ज्ञान केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आई.आई.एम. नागपुर का उद्देश्य अपने शोध और विशेषज्ञता को किसानों और ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाना है। यह योजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। अगर यह योजना महाराष्ट्र में सफल रहती है तो इसे देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।

गांवों के समग्र विकास का लक्ष्य

आई.वी.डी.पी. 2.0 केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह गांवों के समग्र और सतत विकास पर केंद्रित है। इसका मतलब है कि यह योजना गांवों की हर जरूरत को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे सभी पहलुओं पर काम किया जाएगा।

ग्रामीण विकास का मतलब केवल सड़क और बिजली पहुंचाना नहीं है। इसका मतलब है ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी आय बढ़ाना और जीवन स्तर सुधारना। यह योजना इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ तैयार की गई है।

किसानों और ग्रामीणों को सीधा लाभ

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका फायदा सीधे किसानों और ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। अक्सर विकास योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका के कारण असली जरूरतमंद लोग लाभ से वंचित रह जाते हैं। लेकिन इस योजना में सीधे संपर्क और प्रशिक्षण के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाभ सही लोगों तक पहुंचे।

किसानों को नई तकनीक और बेहतर खेती के तरीके सिखाए जाएंगे। ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन

महाराष्ट्र सरकार की कई योजनाएं पहले से ग्रामीण विकास के लिए चल रही हैं। लेकिन इनका असर उतना नहीं दिखता जितना होना चाहिए। इस नई पहल से सरकारी योजनाओं का बेहतर तरीके से क्रियान्वयन होगा। अधिकारियों को मिलने वाला प्रशिक्षण इसमें अहम भूमिका निभाएगा।

प्रशासनिक समर्थन से यह सुनिश्चित होगा कि जमीनी स्तर पर कोई रुकावट न आए। सरकार की मंजूरी और मदद से काम तेजी से आगे बढ़ेगा।

अन्य राज्यों के लिए मिसाल

इस योजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सके। अगर महाराष्ट्र में यह सफल रहता है तो देश के दूसरे हिस्सों में भी इसे अपनाया जा सकता है। ग्रामीण भारत के विकास के लिए ऐसे मॉडल की बहुत जरूरत है।

हर राज्य की अपनी चुनौतियां और जरूरतें हैं। लेकिन इस योजना का मूल ढांचा ऐसा है कि इसे स्थानीय जरूरतों के हिसाब से बदला जा सकता है।

शैक्षणिक संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी

आई.आई.एम. नागपुर की यह पहल शैक्षणिक संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी का एक अच्छा उदाहरण है। प्रबंधन संस्थान केवल कॉर्पोरेट जगत के लिए नेता तैयार करने तक सीमित नहीं रह सकते। उन्हें समाज के विकास में भी योगदान देना चाहिए।

इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को भी वास्तविक दुनिया की समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने का मौका देते हैं। यह उनकी शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बनाता है।

टाटा मोटर्स फाउंडेशन की भूमिका

टाटा मोटर्स फाउंडेशन लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहा है। ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उनका योगदान सराहनीय है। इस योजना में उनकी आर्थिक मदद से कार्यक्रम को मजबूत आधार मिलेगा।

कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत ऐसे कार्यक्रमों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बहुत जरूरी है। यह सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का एक अच्छा उदाहरण है।

भविष्य की संभावनाएं

IIM Nagpur IVDP 2.0: यह योजना महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में विकास की नई उम्मीद जगा रही है। अगले कुछ वर्षों में इसके परिणाम दिखने शुरू होंगे। गांवों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और जीवन स्तर ऊपर उठेगा।

इस कार्यक्रम की सफलता से यह साबित होगा कि सरकार, शैक्षणिक संस्थान और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। ग्रामीण भारत के विकास के लिए ऐसी साझेदारी बहुत जरूरी है।

आई.आई.एम. नागपुर, टाटा मोटर्स फाउंडेशन और महाराष्ट्र सरकार की यह साझेदारी ग्रामीण विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। आई.वी.डी.पी. 2.0 केवल एक योजना नहीं बल्कि गांवों के समग्र विकास का एक सपना है। इस पहल से महाराष्ट्र के गांवों का वास्तविक कायाकल्प होगा और यह पूरे देश के लिए प्रेरणा बनेगा।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।