महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है जब नागपुर के बीजेपी विधायक कृष्ण खोपड़े के पुत्र रोहित खोपड़े ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय राजनीति को हिलाकर रख दिया है, बल्कि बीजेपी के भीतर बढ़ते असंतोष की तस्वीर भी सामने लाई है। कांग्रेस पार्टी ने इस अवसर को भुनाते हुए रोहित को अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला निमंत्रण दिया है।
पिता के नेतृत्व पर उठे सवाल
रोहित खोपड़े का यह कदम सिर्फ एक साधारण इस्तीफा नहीं है, बल्कि यह बीजेपी की आंतरिक राजनीति और नेतृत्व शैली पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि रोहित को अब अपने पिता के नेतृत्व पर विश्वास नहीं रहा है। यह टिप्पणी काफी गंभीर है क्योंकि यह एक परिवार के भीतर की राजनीतिक असहमति को सार्वजनिक करती है। परिवार में ही मतभेद होना यह दर्शाता है कि बीजेपी के भीतर की स्थिति कितनी जटिल हो चुकी है।
कांग्रेस का खुला स्वागत और बड़ा प्रस्ताव
कांग्रेस पार्टी ने इस मौके को गंवाना नहीं चाहा और रोहित खोपड़े को अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला निमंत्रण दिया है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि रोहित कांग्रेस में आते हैं, तो उनका भव्य स्वागत किया जाएगा और उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस में एक महत्वपूर्ण और बड़ा पद दिया जाएगा। यह प्रस्ताव युवा नेतृत्व को आकर्षित करने की कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
बीजेपी में बढ़ता असंतोष और टिकट काटने का विवाद
कांग्रेस के आमदार अभिजीत वंजारी ने बीजेपी की आंतरिक नीतियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी ने नागपुर सहित अन्य विधानसभा क्षेत्रों में कई पुराने और अनुभवी नगरसेवकों के टिकट काट दिए हैं। ये वे नगरसेवक हैं जिन्होंने बार-बार चुनाव जीतकर पार्टी को मजबूती दी थी, लेकिन अब उन्हें सर्वे के नाम पर हटा दिया गया है।
महाराष्ट्र के इतिहास में अभूतपूर्व घटना
वंजारी ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब 64 नगरसेवकों, यानी लगभग 50 प्रतिशत नगरसेवकों के टिकट एक साथ काट दिए गए हैं। यह एक ऐतिहासिक और साथ ही चिंताजनक उदाहरण है जो पार्टी के भीतर की अस्थिरता को दर्शाता है। इस कदम से बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ता पूरी तरह से हताश और निराश हो गए हैं।
इंसानियत की कमी का आरोप
कांग्रेस नेता का आरोप है कि बीजेपी में अब इंसानियत नहीं बची है और पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ किया जा रहा व्यवहार अनुचित है। जो लोग सालों से पार्टी के लिए मेहनत करते रहे, उन्हें एक झटके में किनारे कर देना यह दिखाता है कि पार्टी में वफादारी की कोई कीमत नहीं रह गई है।
कार्यकर्ताओं को चुनौती
वंजारी ने उन सभी नगरसेवकों को चुनौती दी है जिनके टिकट काटे गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये नगरसेवक वास्तव में कर्तृत्ववान और सक्षम हैं, तो उन्हें बीजेपी को उसकी वास्तविक जगह दिखा देनी चाहिए। यह बयान स्पष्ट रूप से इन नाराज नेताओं को कांग्रेस की ओर आकर्षित करने का प्रयास है।
बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण समय
यह पूरा घटनाक्रम बीजेपी की अंदरूनी राजनीति और नेतृत्व की असफलता को उजागर करता है। जब एक विधायक के खुद के बेटे को ही पार्टी छोड़नी पड़े, तो यह पार्टी के भीतर की गंभीर समस्याओं का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि रोहित खोपड़े क्या निर्णय लेते हैं और क्या अन्य नाराज नेता भी उनके नक्शेकदम पर चलते हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में यह मोड़ आगामी चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। बीजेपी को अपने घर को संभालना होगा, वरना असंतोष की यह लहर पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।